राज्यसभा ना मिलने पर बीजेपी में 'चूं' नहीं, कांग्रेस में क्यों हो जाती है बगावत?
राज्यसभा ना मिलने पर बीजेपी में 'चूं' तक नहीं होती जबकि कांग्रेस में राज्यसभा के लिए बगावत के सुर पनपने लगते हैं। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है

आनंद शर्मा। Photo Credit- PTI
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में बहुत बड़े-बड़े नेता हैं। यह नेता सालों से किसी ना किसी मलाईदार पदों पर रहे हैं या फिर वर्तमान में भी किसी ना किसी पद पर हैं। कांग्रेस जब बड़े नेताओं की जगह नए नेताओं को लोकसभा का टिकट या फिर राज्यसभा भेजती है तो यही नेता अपनी पार्टी से बगावत पर उतर जाते हैं। इस लिस्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, मिलिंद देवड़ा जैसे बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। इस लिस्ट में एक और नाम जुड़ गया है। वह नाम है आनंद शर्मा का। शर्मा हिमाचल प्रदेश से आते हैं। वह राज्य की एक राज्यसभा सीट से संसद पहुंचना चाहते थे। मगर, कांग्रेस ने उन्हें नहीं भेजकर युवा नेता कांगड़ा जिले के कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा पार्टी उम्मीदवार बना दिया।
अब अनुराग शर्मा का राज्यसभा जाना तय है। इस बात से पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा नाराज हो गए हैं। उनका पार्टी हाईकमान के इस फैसले पर दर्द छलका है। पार्टी के इस फैसले पर आनंद शर्मा ने कहा कि आत्मसम्मान बहुत महंगा पड़ता है। सच बोलना अब एक दंडनीय राजनीतिक अपराध बन गया है। आनंद शर्मा कोई पहले कांग्रेसी नेता नहीं हैं, जिन्हें पद नहीं मिलने पर अपनी पार्टी के खिलाफ बयान दिया है। इससे पहले ज्योतिरादित्य, जितिन, मिलिंद देवड़ा आदि नेता पार्टी से जाते वक्त कांग्रेस की किरकिरी करवा चुके हैं। दूसरी तरफ बीजेपी में 2014 के बाद ऐसा कोई भी नेता नहीं है, जिसने पार्टी हाईकमान के फैसले को विरोध किया हो। बीजेपी में इसका सीधा उदाहरण शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, वसुंधरा राजे सिंधिया आदि नेता हैं।
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ऐसे में राज्यसभा ना मिलने पर बीजेपी में 'चूं' तक नहीं होती जबकि कांग्रेस में राज्यसभा के लिए बगावत के सुर पनपने लगते हैं। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है...
आनंद शर्मा का मामला क्या है?
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पार्टी की राज्य इकाई की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं को राज्य से राज्यसभा सदस्य बनने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। कांग्रेस हाईकमान ने हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा भेजने का फैसला ले लिया। इस फैसले से कांग्रेस ने दो संदेश दिया है। पहले तो यह कि पार्टी नई पीढ़ी ने नेताओं को भी आगे बढ़ा रही है, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को आने वाले समय में मौका मिल सकता है। दूसरा ये कि कांग्रेस पार्टी में नए नेताओं को आगे करके भविष्य को देख रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने गुरुवार को शिमला में कहा कि सच बोलना अब राजनीतिक अपराध है। राजनीति में स्वाभिमान की कीमत चुकानी पड़ती है। आनंद शर्मा ने कहा कि उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, डॉक्टर मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का भी समय देखा है। उन्होंने कहा कि वह सच बोलते रहेंगे। आनंद का यह बयान उनसे जुड़े जी 23 विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व में बदलाव की बात की थी। खासतौर से राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर उन्होंने पहले ,वाल उठाए थे। संभवतया सच बोलने की कीमत चुकाने वाला उनका बयान इसी ओर इशारा कर रहा है।
राहुल गांधी के खिलाफ आनंद शर्मा
दरअसल, पिछले पांच-छह साल से आनंद शर्मा लगातार किसी ना किसी मंच से राहुल गांधी के खिलाफ और उनके नेतृत्व को लेकर सवालिया निशान उठा रहे थे। वह केवल राहुल के ही नहीं बल्कि सोनिया गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद के निकटतम साथी रहे हैं। शर्मा कांग्रेस के पूर्व बगावती ग्रुप G-23 के सदस्य भी रहे हैं। वह इससे पहले 2022 में राज्यसभा नहीं मिलने पर कांग्रेस से बगावती सुर अपना चुके हैं। आनंद शर्मा 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ डिनर कर चुके हैं, जिससे उनकी नजदीकियां होने की बात कही गई।
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कांग्रेस में एक राज्यसभा सीट के लिए आनंद शर्मा जैसे बड़े नेता बगावत करने की बात कहते हैं। इसकी एक वजह यह है कि कांग्रेस अलाकमान के पास केंद्र की सरकार नहीं है। साथ ही कांग्रेस राज्यों में 2014 के बाद से सिमटती जा रही है, जिसका सिलसिला आज भी जारी है। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान के पास अपने उन सीनियर नेताओं को देने के लिए राज्यसभा नहीं है, जो जमीन पर सक्रिय ना हों। पार्टी सत्ता में आने के लिए उन नेताओं को तरजीह दे रही है, जो जमीन पर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस में पार्टी हाईकमान के फैसलों को विरोध इसलिए भी होता है और बीजेपी में कोई नेता कुछ नहीं बोलता है, इसकी एक वजह दोनों दलों के वर्क कल्चर में फर्क है।
बीजेपी में मोदी-शाह का दबदबा
बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का दबदबा है। दोनों नेताओं की अपनी पार्टी पर जबरदस्त पकड़ है। मोदी-शाह ने जो फैसला ले लिया उसे बीजेपी में कोई नेता राज्यसभा तो दूर की बात है, उस फैसले को कोई वर्तमान मुख्यमंत्री भी नहीं टाल सकता। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल को एक झटके में पद से हटाकर केंद्र में ले आए थे। इसके अलावा राजस्थान में बीजेपी की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे को दरकिनार करके भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया गया।
ऐसे में यह साफ है कि कांग्रेस में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की कम राज्यों में सरकारें हैं। पार्टी के पास अपने नेताओं को देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। दूसरी तरफ बीजेपी के पास केंद्र से लेकर राज्यों में देने के लिए दर्जनों पद हैं।
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