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दिग्गजों से किनारा, नए चेहरों को मौका, अब बनने लगी है 'राहुल की कांग्रेस'?

लंबे समय से दलितों और आदिवासियों की बात कर रहे राहुल गांधी का टारगेट अब इसी वोटबैंक है और इसी के हिसाब से वह अपनी टीम भी तैयार कर रहे हैं।

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राहुल गांधी, File Photo Credit: PTI

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कांग्रेस ने हाल ही में जब राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 6 नामों का एलान किया तो कुछ नामों ने सबको चौंका दिया। आनंद शर्मा जैसे दिग्गज की निराशा साफ झलकी, कई नेता मायूस हुए लेकिन कई ऐसे नेता चर्चा में आए जो अब तक कोई बड़ी पहचान नहीं रखते थे। माना जा रहा है कि यह वही बदलाव है जिसे राहुल गांधी लंबे समय से करना चाह रहे थे। कई नेता ऐसा दावा कर चुके हैं कि कांग्रेस के भीतर ही एक 'राहुल की कांग्रेस' बनाने की कोशिश जारी है और यह लिस्ट उसी कोशिश का एक हिस्सा है। इसमें जातिगत समीकरण का ध्यान रखते हुए ऐसे नेताओं का मौका दिया जा रहा है जो कद में भले न बड़े हों लेकिन कांग्रेस के प्रति समर्पित हैं और लंबे समय से काम कर रहे हैं।


इस लिस्ट में दलित और आदिवासी उम्मीदवारों को तरजीह देने के साथ-साथ यह भी ध्यान रखा गया है कि वे पार्टी के साथ लंबे समय से काम कर रहे हों। यही वजह है कि जिला अध्यक्ष रहे नेता को सीधे राज्यसभा भेज दिया गया है। इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि जमीनी नेताओं को उनकी मेहनत के हिसाब से पद दिया जाएगा भले ही वे उतना बड़ा कद न रखते हों। इसी के साथ 'राहुल की कांग्रेस' ने यह संदेश भी दिया है कि अब चेहरों के बजाय मेहनत को इनाम दिया जाएगा।

 

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क्या है राहुल का प्लान?

 

राहुल गांधी ने कुछ समय पहले जिला कांग्रेस कमेटियों को मजबूत करने की बात कही थी। इसी क्रम में कई जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई और राहुल गांधी का प्लान है कि आगे चलकर विधानसभा और लोकसभा के टिकट बांटने में भी ये जिला अध्यक्ष अहम भूमिका निभाएं। यही वजह है कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट एक जिलाध्यक्ष अनुराग शर्मा को दे दी गई। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, रजनी पाटिल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जैसे कद्दावर नेताओं तक पर भारी पड़े।  

 

इसी तरह हरियाणा में तमाम पुराने नेताओं और नेताओं के परिवारों को दरकिनार करते हुए करमवीर बौद्ध को मौका दिया गया है। दलित समुदाय से आने वाले करमवीर काफी समय से कांग्रेस के लिए खाम कर रहे हैं और पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के मुखिया राजेंद्र पाल गौतम के साथ काम देखते हैं। राहुल गांधी की अगुवाई में हुए संविधान सम्मेलनों के आयोजन में भी उनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में उनकी दावेदारी को राहुल गांधी के उस प्लान का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत राहुल देशभर के दलित मतदाताओं को कांग्रेस के साथ जोड़ना चाहते हैं।

 

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एक और रोचक बात है कि हरियाणा में करमवीर बौद्ध भूपेंद्र सिंह हुड्डा या शैलजा कुमारी या किसी अन्य तीसरे गुट के भी नहीं हैं। माना जा रहा है कि वह टीम राहुल का हिस्सा हैं और उन्हें राज्यसभा पहुंचाकर राहुल गांधी हरियाणा में अपनी टीम को मजबूत करना चाहते हैं।


दिग्गजों से किनारा कर रहे राहुल गांधी?

 

कई बार यह देखा गया कि कांग्रेस के पुराने नेता राहुल गांधी से सहज नहीं हैं। दिग्विजय सिंह, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद और इस तरह के कई नेता या तो राहुल गांधी की टीम से दूरी बनाकर रखते रहे या राहुल की टीम ने इन नेताओं को तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस छोड़कर जाने वाले कई नेताओं ने तो यह बात खुलकर कही कि राहुल गांधी सिर्फ अपने करीबी 3-4 लोगों की सलाह पर काम करते हैं। पुराने नेताओं को देखा जाए तो सिर्फ पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद और जयराम रमेश ही सक्रिय दिखते हैं। इसमें से जयराम रमेश राहुल गांधी के बेहद खास नेताओं में गिने जाते हैं। कहा जाता है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के पीछे भी जयराम रमेश की अहम भूमिका थी।

 

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इसके अलावा, कई राज्यों में यह देखा गया है कि राहुल गांधी नई टीम खड़ी करने में लगे हैं। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने ही कमलनाथ या किसी अन्य पुराने नेता की बजाय जीतू पटवारी को मौका दिया। इसी तरह राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा को मौका मिला। गुजरात में राहुल गांधी जिग्नेश मेवानी जैसे नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं और जम्मू-कश्मीर में भी नई लीडरशिप खड़ी कर रहे हैं। 

 

ऐसे में यही देखने को मिल रहा है कि राहुल गांधी अपनी नई टीम खड़ी करने, लीडरशिप तैयार करने और उन्हें हर स्तर पर मौका देकर आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। 


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