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प्रधान बदल गया लेकिन पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं हुई? टिकट की जंग जारी

पंजाब कांग्रेस को नया अध्यक्ष तो मिल गया है लेकिन नए अध्यक्ष के सामने समस्या वही पुरानी वाली है। पार्टी में अब टिकटों को लेकर अलग-अलग खेमों में टकराव देखने को मिल सकता है।

Rahul Gandhi and Pargat Singh

राहुल गांधी और पंजाब कांग्रस के प्रधान परगट सिंह, Photo Credit: Pargat Singh

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पंजाब कांग्रेस में लगातार बढ़ रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह अब पूर्व हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पार्टी की कमान दी गई है। बदलाव ऐसे समय हुआ है जब 2027 के विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं और पार्टी लंबे समय से अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। राजा वडिंग ने खुद राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा दिया। वह भले ही खुद को राहुल गांधी का सच्चा सिपाही बता रहे हैं लेकिन पंजाब में उनके सिपाही असमंझस में हैं कि अब उनके टिकट का क्या होगा। 

 

राजा वडिंग पंजाब कांग्रेस के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले नेताओं में से एक हैं। उन्होंने 2022 में उस समय पार्टी की कमान संभाली जब पार्टी राज्य में अपने सबसे खराब दौर से जूझ रही थी। इसके बाद उनके नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा गया जिसमें कांग्रेस पार्टी को सफलता मिली। हालांकि, इसके बाद पार्टी में गुटबाजी फिर से उभरकर सामने आने लगी। चरनजीत सिंह चन्नी उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे और बागी रुख दिखाने लगे थे। इसके बाद पार्टी ने पहले प्रभारी बदला और अब राजा वडिंग को भी हटा दिया गया है। 

 

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क्या राजा वड़िंग करेंगे बगावत?

जुलाई में जब कांग्रेस पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी टीम की घोषणा की तो चरनजीत सिंह चन्नी ने खुली बगावत कर दी और अपने घर पर अपने गुट के नेताओं की बड़ी बैठक आयोजित की। इसके बाद उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों का बहिष्कार भी किया। अब जब राजा वडिंग को हटा दिया गया है तो चर्चा है कि वह भी कुछ ऐसा ही कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया है। वह आज दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में राहुल गांधी के साथ दिखे लेकिन प्रधान पद से हटाए जाने को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है। 

 

उन्होंने प्रधान पद से हटाए जाने को चरनजीत सिंह चन्नी गुट की जीत बताया है। इसके साथ ही पद से हटने के बाद यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि पंजाब प्रभारी सचिन पायलट चाहते थे कि वह हटें। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए। उनके समर्थक भी उनके संघर्ष को लेकर पोस्ट कर रहे हैं लेकिन उन्होंने चरनजीत सिंह चन्नी की तरह बागी रुख नहीं दिखाया है। 

क्या खत्म हो गई गुटबाजी?

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी अभी खत्म हो गई है यह कहना जल्दबाजी होगा। राजा वडिंग भले ही प्रधान पद से हट गए हों लेकिन वह अपने समर्थकों के लिए टिकट की मांग करेंगे। पिछले साढे चार साल में उन्होंने संगठन में कई नेताओं को नियुक्त किया है जो उनके करीबी हैं। नवंबर 2025 में कांग्रेस ने पंजाब के 29 में से 27 जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस समय की रिपोर्टों के मुताबिक, ज्यादातर नियुक्तियों में राजा वड़िंग और तत्कालीन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा की पसंद का असर दिखाई दिया था। कई जिला अध्यक्षों को वड़िंग खेमे के करीब माना गया। 

 

दूसरी तरफ चरणजीत सिंह चन्नी, भारत भूषण आशु, परगट सिंह और खुशबाज सिंह ढिल्लों जैसे नेताओं वाले विरोधी खेमे की इन नियुक्तियों में बड़ी भूमिका नहीं रही थी। वड़िंग ने उस समय गुटबाजी की बात को खारिज करते हुए कहा था कि नियुक्तियां हाईकमान ने विचार-विमर्श के बाद की हैं। इसके बाद कई बार सार्वजनिक मंचों से राजा वडिंग ने कहा कि वह पुराने नेताओं की जगह नई पीढ़ी और गरीब परिवारों से आए नए नेताओं को टिकट देंगे। इसके पीछे वह राहुल गांधी के विचारों का जिक्र करते थे। इसका सीधा मतलब था कि कुछ जिला अध्यक्षों और संगठन के लोगों को टिकट मिल सकता था। राजा वडिंग के कई करीबी लोगों ने तो अपने क्षेत्रों में चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी थी। 

 

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जिला अध्यक्षों का क्या होगा?

राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के संगठन में जिला अध्यक्षों को राजनीतिक ताकत देने की बात कर चुके हैं। इसी बात को राजा वड़िंग भी कहते रहे कि वह नए नेताओं को मौका देंगे। अब जब प्रदेश अध्यक्ष बदल गया है तो जिला अध्यक्षों को बदलने का अधिकार भी उनके पास है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला अध्यक्षों की टीम भी बदलेगी? इसके साथ ही सवाल यह भी है कि राजा वडिंग के करीबी नेताओं को टिकट मिलेंगे या नहीं। अगर नई टीम पुराने जिला अध्यक्षों के साथ चुनाव में उतरती है तो वड़िंग के प्रभाव वाले संगठन और परगट सिंह के नेतृत्व के बीच तालमेल बड़ी चुनौती हो सकता है। वहीं अगर जिला अध्यक्षों में बदलाव होता है तो राजा वडिंग खेमे की तरफ से बागी रुख देखने को भी मिल सकता है।

 

 वड़िंग के कार्यकाल में जिन नेताओं ने संगठन में जगह बनाई या अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाई, वे टिकट के लिए अपनी दावेदारी करेंगे। दूसरी तरफ चन्नी और परगट सिंह के साथ खड़े नेताओं की भी अपनी राजनीतिक जमीन है। इसके अलावा प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के समर्थक भी कई सीटों पर दावेदारी पेश कर सकते हैं। ऐसे में टिकट बंटवारे के समय यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी केवल जीत की संभावना को आधार बनाती है या अलग-अलग खेमों के बीच संतुलन भी साधती है। नए प्रधान के सामने इन सभी खेमों को एक साथ लेकर चलने की बड़ी चुनौती है। 

 


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