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PDM की पटकथा तैयार! ओवैसी के संकेत के बाद मिले चंद्रशेखर और स्वामी प्रसाद

यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और सपा को घेरने के लिए तीसरे मोर्चे के गठन की संभावनाएं तेज हो गई है। ओवैसी के बयान के बाद चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

chandrashekhar azad and swami prasad maurya

चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावनाएं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में प्रदेश में नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत जताई थी। उनके इस बयान के बाद आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की लंबी मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। दोनों नेताओं के बीच कई घंटों तक राजनीतिक हालात, सामाजिक समीकरण और 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। राजनीतिक गलियारों में इसे पीडीएम यानी पिछड़ा, दलित और मुस्लिम गठबंधन की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

 

हाल ही में ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर में आयोजित जनसभा के दौरान अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को विधानसभा चुनाव का संभावित चेहरा बताते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इसी सभा में उन्होंने प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बाद से ही प्रदेश की राजनीति में नए गठबंधन और तीसरे मोर्चे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब चंद्रशेखर और स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।

PDM फॉर्मूले पर चल रही राजनीतिक कवायद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोटों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। चंद्रशेखर आजाद दलित समाज में अपनी मजबूत पहचान रखते हैं जबकि स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से पिछड़े वर्गों की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वहीं ओवैसी मुस्लिम समाज में अपनी राजनीतिक पैठ बढ़ाने में जुटे हैं। ऐसे में इन नेताओं का एक साथ आना प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।

 

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कौन-कौन दल आ सकते हैं साथ?

 

संभावित तीसरे मोर्चे में एआईएमआईएम, आजाद समाज पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य के राजनीतिक मंच के अलावा अपना दल (कमेरावादी) पहले से ही ओवैसी के साथ नजर आता रहा है। इसके अलावा पीस पार्टी, राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल, महान दल और कुछ अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के भी इस गठबंधन का हिस्सा बनने की चर्चाएं हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पर्दे के पीछे बातचीत जारी होने की चर्चा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह संभावित गठबंधन सबसे ज्यादा असर समाजवादी पार्टी के परंपरागत पीडीए और मुस्लिम-पिछड़ा वोट बैंक पर डाल सकता है। चंद्रशेखर दलित वोटों, स्वामी प्रसाद पिछड़े वर्गों और ओवैसी मुस्लिम वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि यह मोर्चा आकार लेता है तो प्रदेश की राजनीति में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।

 

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2027 के चुनाव पर टिकी नजर

 

विधानसभा चुनाव में अभी समय है लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। चंद्रशेखर और स्वामी प्रसाद की मुलाकात को इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि आने वाले महीनों में ओवैसी, चंद्रशेखर, स्वामी प्रसाद और अन्य छोटे दल एक मंच पर आते हैं तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया राजनीतिक ध्रुव उभर सकता है।

 

फिलहाल, तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है लेकिन संकेत यही हैं कि प्रदेश में तीसरे मोर्चे की पटकथा लिखी जा रही है। ओवैसी की सभाओं से शुरू हुई चर्चा अब नेताओं की मुलाकातों तक पहुंच चुकी है और 2027 के सियासी रण से पहले यह गठजोड़ बड़ा राजनीतिक प्रयोग साबित हो सकता है।


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