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चरणजीत सिंह चन्नी कैसे भड़का रहे पंजाब कांग्रेस में बगावत की आग? इनसाइड स्टोरी

कांग्रेस पार्टी ने पंजाब चुनाव के लिए अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है लेकिन इसके बाद पार्टी में नाराजगी सामने आ रही है। चरनजीत सिंह चन्नी आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं।

charanjit singh channi and manish tewari

चरनजीत सिंह चन्नी और मनीष तिवारी, Photo Credit: ANI

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पंजाब कांग्रेस ने पार्टी के अंदर गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश करते हुए तामाम नेताओं को एडजस्ट किया और 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टीम की घोषणा कर दी। गुटबाजी खत्म करने और सोश और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश इस लिस्ट में साफ देखी गई। लिस्ट जारी होने के बाद से पंजाब कांग्रेस के कुछ नेता चु्प्प बैठ गए हैं और पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी नाराज नजर आ रहे हैं। 

 

पूर्व सीएम चन्नी को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह प्रदेश की कमान सौंप देगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और पार्टी ने प्रधान और सीएलपी के पद पर राजा  वडिंग और प्रताप सिंह बाजवा को ही रखा। इसके बाद से चन्नी पार्टी से नाराज बताए जा रहे हैं। चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि,  कैंपेंनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने पर चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। 

 

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क्या बगावत करेंगे चन्नी?

पंजाब कांग्रेस में पिछले कई चुनावों से एक ट्रेंड साफ देखा गया है कि जो भी पार्टी का अध्यक्ष बनता है उसी को पार्टी जीत के बाद सीएम बनाती है। 2022 चुनाव में भी चन्नी ने अध्यक्ष की कुर्सी पर ना होने पर खुद को सीएम फेस घोषित करवाया था। अब चन्नी के सामने चुनौती है कि राजा वडिंग की प्रधानगी में चुनाव लड़ा गया तो सीएम की रेस में उन्हें प्राथमिकता मिल सकती है। ऐसे में चन्नी असहज हैं। 

 

चन्नी की बगावत को लेकर पंजाब की सियासत में चर्चा हो रही है। चन्नी और उनके समर्थकों ने कांग्रेस पार्टी के फैसले को अभी तक स्वीकार नहीं किया है। आज 11 बजे चन्नी ने अपने आवास पर अपने समर्थक सांसदों, विधायकों व हलका इंचार्जों की मीटिंग बुलाई है। बैठक में दो से तीन सांसद, 10 से 12 विधायकों और 40 के करीब हलका इंचार्जों के पहुंचने की चर्चा है। चन्नी के करीबी नेताओं का मानना है कि चन्नी अब आर पार के मूड में हैं। खबर  लिखे जाने तक कुछ नेताओं के इस मीटिंग में पहुंचने की जानकारी सामने आ चुकी है, जिनमें पूर्व मंत्री भरत भूषण आशू के पहुंचने की पुष्टि हुई है। 

क्या कर रहे राजा वडिंग?

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राजा वडिंग को पार्टी ने प्रधान के तौर पर चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। ऐसे में राजा वडिंग पार्टी का चेहरा होंगे। हालांकि, पार्टी में गुटबाजी को खत्म करना उनके लिए मुश्किल होगा। राजा वडिंग फिलहाल आलाकमान से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि दिल्ली से इस बगावत को रोकने के लिए कोई फरमान आएगा। हालांकि, अभी तक इस बैठक के बारे में पार्टी की ओर से कोई भी बात नहीं की गई है। राजा वडिंग का खेमा इसे चन्नी की नाराजगी के तौर पर देख रहा है और उनका मानना है कि कुछ दिन में यह सब शांत हो जाएगा और चन्नी को आलाकमान का फैसला मानना ही होगा। 

चुप्पी साधे बैठे नेता

चन्नी खेमे के माने जाने वाले कई नेताओं ने अभी तक आलाकमान के फैसले पर चुप्पी साधी हुई है। राणा गुरजीत सिंह, प्रगट सिंह, ओपी सोनी और भारत भूषण को अलग-अलग कमेटी में जिम्मेदारी दी गई है लेकिन उनकी ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इन सभी नेताओं के आज बैठक में शामिल होने की संभावना हैं। इनके अलावा कुछ सांसद और विधायकों के साथ-साथ पूर्व सांसद, विधायक और पार्टी के इंचार्ज भी शामिल हो सकते हैं। 

 

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चन्नी के पास क्या विकल्प?

चन्नी अब आर-पार के मूड में बताए जा रहे हैं। चन्नी की मांग यह थी कि या तो उन्हें प्रधान बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। हालांकि, पार्टी ने उनकी दोनों मांगों को खारिज कर दिया है। चन्नी आज अपने समर्थकों के साथ मीटिंग कर आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। दलित समाज के एक लोकप्रिय नेता होने के नाते चन्नी के साथ एक बड़ा वर्ग जुड़ा हुआ है। ऐसे में चन्नी कांग्रेस आलाकमान पर अपनी मांग मनवाने के लिए दबाव बनाएंगे। इसके बावजूद अगर आलाकमान नहीं मानता है तो चन्नी पार्टी से बगावत का भी विचार कर सकते हैं। चन्नी को अगर समर्थकों का साथ मिलता है तो वह कैप्टन अमरिंदर सिंह की राह पर चलकर अलग पार्टी भी बना सकते हैं। चन्नी ने पहला विधानसभा चुनाव निर्दलीय ही जीता था। अगर चन्नी बगावत करते हैं तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा। 

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