पंजाब में कुछ महीने बाद ही विधानसभा के आम चुनाव होने हैं और चुनाव को लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। कुछ दलों ने तो अपने उम्मीदवार भी मैदान में उतार दिए हैं लेकिन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस अभी अपनी आंतरिक गुटबाजी में फंसी हुई है। चरनजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कांग्रेस के बड़े नेता पार्टी प्रधान राजा वडिंग के खिलाफ एकजुट हो गए हैं लेकिन
राहुल गांधी
अभी भी राजा को कमान देने के मूड में ही हैं। बाहरी रूप से देखें तो यह राजा वडिंग के खिलाफ बगावत लगती है लेकिन आंतरिक रूप से राजनीतिक जानकार इसके कई मायने निकाल रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस में कलह वास्तविक रूप में सिर्फ राजा वडिंग को प्रधान पद से हटाने की नहीं है बल्कि प्रधान बदलकर अपने खेमे का प्रधान बनाना और फिर अपनी पसंद यानी अपने खेमे के नेताओं को टिकट देना है। चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी का राज्य यूनिट का प्रधान टिकट बंटवारे में अहम भूमिका निभाता है।
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एक परिवार एक टिकट पर घमासान
पंजाब कांग्रेस में एक ही परिवार के कई ऐसे नेता हैं जो एक से ज्यादा टिकट अपने परिवार के लिए मांग रहे हैं। ऐसे नेताओं में ज्यादातर चरनजीत सिंह चन्नी के गुट में शामिल हैं। राजा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि वह एक ही परिवार में किसी को भी दो टिकट नहीं देंगे, उन्होंने ऐसे नेताओं को भी टिकट ना देने की बात कही जो कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियों में गए और फिर वापस कांग्रेस में आए। उन्होंने साफ तौर पर कई लोगों पर निशाना साधा और टिकट वितरण को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने जिला प्रधानों को टिकट देने की बात कही। जाहिर है कि ज्यादातर जिला प्रधान उनके ही खेमे के हैं।
रंधावा ने दिया जवाब
पंजाब कांग्रेस के दिग्गज नेता और चन्नी गुट में शामिल पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राजा वडिंग के इस बयान पर निशाना साधा। रंधावा ने यहां तक कह दिया कि अगर किसी परिवार के चार सदस्य चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं तो पार्टी उन्हें चार टिकट भी दे सकती है। यानी अब सरेआम पार्टी के नेता टिकटों को लेकर लड़ाई कर रहे हैं। हालांकि, रंधावा के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना भी हुई क्योंकि राजा वडिंग जो कह रहे थे वह कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के विचारों के अनुसार कह रहे थे। बीजेपी ने तो रंधावा की बात को सही कहते हुए गांधी परिवार पर ही निशाना साध लिया और कहा कि खुद गांधी परिवार से मां और बेटा-बेटी सांसद हैं तो पंजाब में भी एक परिवार को ज्यादा टिकट दिए जा सकते हैं।
रंधावा का यू टर्न
आलोचना के बाद सुखजिंदर रंधावा ने यू टर्न लिया और उन पर लग रहे आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'जब मुझे टिकट मिला था, उस समय मेरे पिता जी प्रदेश अध्यक्ष थे और उन्होंने उसी दिन सक्रिय राजनीति से अलग होने का फैसला कर लिया था। अगर टिकट लेना है तो सिर्फ एक ही टिकट लेंगे, नहीं तो एक भी नहीं। टिकट भी सिर्फ डेरा बाबा नानक से ही लेंगे। टिकट उन लोगों को दिए जाने चाहिए जो चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं, न कि उन लोगों को जो चापलूसी करते हैं।'
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क्या टिकट पर ही होगा संग्राम?
कांग्रेस पार्टी ने करीब 2 महीने पहले ही 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी थी। इस टीम में राजा वडिंग प्रधान, चरनजीत सिंह चन्नी कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा नेता प्रतिपक्ष के पद पर रखे गए थे लेकिन चन्नी को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने इस घोषणा के बाद से खुली बगावत कर दी है और प्रधान को हटाने की बात कह रहे हैं। राजा वडिंग कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल समेत कई राज्यों में कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष को सीएम बनाया है, तो चन्नी भी सीएम बन सकते हैं।
हालांकि, चन्नी के खेमे की नजर टिकटों पर है ताकि ज्यादा से ज्यादा अपने खेमे के लोगों को टिकट दी जा सके और चुनाव बाद अगर सरकार बनती है तो सीएम के लिए दावा किया जा सके। प्रदेश अध्यक्ष का टिकट देने में अहम रोल होता है और यही कारण है कि चन्नी का खेमा असहज है। अब इस लड़ाई को निर्णायक दौर में माना जा रहा है और बताया जा रहा है कि अगस्त के अंत तक आलाकमान सभी नेताओं को एक साथ लाने की कोशिश करेगा।