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पहली परीक्षा में पास हुए सचिन पायलट, साथ आए राजा वडिंग-चन्नी, आगे क्या चुनौती?

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज तमाम नेता और कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस के तमाम गुट एक साथ नजर आए।

Punjab Congress Leaders in Chandigarh

सचिन पायलट के साथ पंजाब कांग्रेस के नेता, Photo Credit: Congress

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पंजाब कांग्रेस के लिए आज का दिन काफी अहम रहा क्योंकि आज पंजाब का प्रभार मिलने के बाद सचिन पायल पहली बार चंडीगढ़ पहुंचे। हालांकि, उनका किसी दूसरे प्रभारी की तरह स्वागत नहीं हुआ और ना ही कोई पदभार ग्रहण समारोह। सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गुलजार सिंह मामले में पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि करीब 3 महीने बाद पार्टी के तमाम बड़े नेता एक साथ एक मंच पर नजर आए। महीनों से बागी तेवर दिखा रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। 

 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भूपेश बघेल जो काम तीन महीनों में नहीं कर पाए वह काम सचिन पायलट ने एक दिन में कर दिखाया। पिछले तीन महीनों से पंजाब कांग्रेस में लगातार बगावत हो रही थी। चन्नी गुट प्रधान राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़ गया था लेकिन कांग्रेस आलाकमान इस मांग को स्वीकार नहीं कर रहा था। पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों से चन्नी गुट के नेताओं ने दूरी बना ली थी। एक दूसरे के खिलाफ जमकर पोस्टर और नारेबाजी की गई लेकिन आलाकमान की चेतावनी के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। आखिरकार आलाकमान ने प्रभारी को बदल दिया। 

 

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आज दिखी एकजुटता

प्रभारी बनने के बाद सचिन पायलट आज पहली बार चंडीगढ़ आए थे लेकिन इस यात्रा के लिए उन्होंने कई दिन दिल्ली में मंथन किया। राहुल गांधी , प्रियंका गांधी , राजा वडिंग, अंबिका सोनी, प्रताप सिंह बाजवा, चरनजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा और कई बड़े नेताओं से मिलकर सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने का प्लान बनाया। उन्होंने दिल्ली से ही ऐलान किया कि वह 15 सितंबर को गुलजार सिंह को न्याय दिलाने और आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनके इस प्रदर्शन के लिए तमाम नेताओं को निर्देश दिए गए और सभी नेताओं ने सोशल मीडिया से सड़क तक इसका प्रचार भी किया। 

 

आज सुबह जब सचिन पायलट ने पंजाब की धरती पर कदम रखा तो प्रधान राजा वडिंग उनके स्वागत के लिए गए और फिर दोनों एक साथ चंडीगढ़ पहुंचे। चंडीगढ़ में सैकड़ों की भीड़ के साथ तमाम नेता उनका इंतजार कर रहे थे। खास बात यह रही कि सचिन पायलट के साथ मंच पर राजा वडिंग और पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी एक साथ दिखाई दिए। ये दोनों नेता पिछले तीन महीनों से एक साथ नहीं आए थे। 

 

क्या बोले नेता?

पंजाब के पूर्व सीएम चरनजीत सिंह चन्नी जो पिछले कई दिनों तक कांग्रेस के सुर में सुर नहीं मिला रहे थे आज उनके भाषण की चर्चा हो रही है। आज वह मंच पर सचिन पायलट के साथ बैठे नजर आए और दूसरी तरफ राजा वडिंग बैठे हुए थे। इस दौरान दोनों के बीच बातचीत भी हुई। जब चन्नी को माइक मिला तो उन्होंने वही कहा जो सचिन पायलट सुनना चाहते थे। चन्नी ने कहा, 'हम लड़ेंगे इकट्ठे होकर, हम मरेंगे इकट्ठे होकर और केजरीवाल एंड गैंग, जो एक कंपनी है, जो काले अंग्रेज हैं, इनको पंजाब से भगाएंगे।' अब तक यह एकजुटता की बात वह नहीं कर रहे थे लेकिन आज उन्होंने मंच से इसकी घोषणा की। 

इसके साथ ही सुखजिंदर सिंह रंधावा जो चन्नी गुट में शामिल हो गए थे वह भी पार्टी लाइन पर बात करते नजर आए। सुखजिंदर रंधावा ने मंच से कहा कि हम सभी को मिलकर लड़ना है और चुनाव जीतना है। उन्होंने गुलजार सिंह मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने मंच से कांग्रेस पार्टी को चुनाव जीताने की अपील की और कहा कि चुनाव जीतने के बाद किसे आगे करना है यह आलाकमान ने तय करना है। उन्होंने कहा कि आलाकमान मा-बाप की तरह होता है और जब वह फैसला लेते हैं तो बच्चे उसका पालन करते हैं। 

 

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आगे क्या चुनौती?

सचिन पायलट आज अपने पहले टेस्ट में तो पास होते नजर आ रहे हैं और कई राजनीतिक जानकार तो उन्हें पूरे नंबर दे रहे हैं। लेकिन उन्हें अभी कई कठिन परीक्षाओं का सामना करना पड़ेगा। भले ही कांग्रेस के नेता एक मंच पर आ गए हों लेकिन उन्हें एक साथ रखना सचिन पायलट की चुनौती है। कांग्रेस पार्टी में सीएम की कुर्सी के लिए लड़ाई है और एक दो नहीं बल्कि कई चेहरे सीएम बनना चाहते हैं। ऐसे में हर कोई खुद और अपने समर्थकों के लिए टिकट की मांग करेगा। राजा वडिंग हो या चरनजीत सिंह चन्नी सारे नेता अपने-अपने गुट के कार्यकर्ताओं को टिकट दिलवाने की कोशिश करेंगे।

 

इसके साथ ही सीएम की रेस में शामिल तीन नेता सांसद हैं पार्टी को इन चेहरों को चुनाव लड़वाना है या नहीं यह भी तय करना है। फिलहाल तमाम नेता इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ेंगे लेकिन टिकटों के लिए लड़ाई होना तय है। 


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