पश्चिम बंगाल में जीत के बाद पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में बड़ा झटका लगा है। ज्यादातर सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। ऐेसे में पार्टी की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम और नगर पंचायतों समेत तमाम सीटों को मिलाकर इन चुनावों में कुल 1977 सीटों पर वोट डाले गए थे। इनमें 8 नगर निगम, 75 नगर कौंसिल और 20 नगर पंचायतें शामिल थीं। ज्यादातर पार्टियों ने अपने पार्टी सिंबल पर ही उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और नतीजा आम आदमी पार्टी के पक्ष में आया। बीजेपी को सिर्फ 172 सीटें मिली।
- AAP - 958
- कांग्रेस - 397
- अन्य - 251
- अकाली दल - 192
- BJP - 172
- BSP - 7
यह भी पढ़ें: नहीं सुधर रही पंजाब कांग्रेस, 2027 चुनाव से पहले रुठना-मनाना जारी, आपस में भिड़े
बीजेपी का खराब प्रदर्शन
भारतीय जनता पार्टी ने इन चुनावों में खराब प्रदर्शन किया है। भले ही पार्टी के नेता इन चुनावों में कुछ सीटों पर अपनी जीत की तरह दिखा रहे हों लेकिन पार्टी की तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी पांचवे नंबर पर रही। पार्टी के 1100 से ज्यादा उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई। हालांकि, कुछ जगहों से पार्टी के लिए अच्छी खबर भी आई है। अबोहर में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही पठानकोट में भी पार्टी का दमदार प्रदर्शन रहा है और फाजिल्का में भी पार्टी ने अपनी ताकत बढ़ाई है। बीजेपी सरकार बनाने का दावा कर रही है लेकिन इन चुनावों से पार्टी के दावों की पोल खुल गई है।
अकाली का भी खराब प्रदर्शन
शिरोमणि अकाली दल भी पंजाब में एक दशक बाद सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल पंजाब में बड़े स्तर पर प्रचार कर रहे हैं और पूरे पंजाब के दौरे कर रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी भी उम्मीद के हिसाब से प्रदर्शन नहीं कर पाई है। पार्टी को सिर्फ 192 सीटों पर जीत मिली है। पार्टी कुछ ही हिस्सों में जीत दर्ज कर पाई है और कहीं भी बड़ी ताकत के रूप में नहीं उभर रही है।
बीजेपी-अकाली साथ आते तो होता बदलाव
पंजाब में बीजेपी और अकाली दल दशकों तक एक दूसरे के साथ चुनाव लड़ते आए हैं। 2020 में किसान कानूनों के कारण अकाली दल ने बीजेपी से रास्ते अलग कर लिए थे और केंद्र सरकार का विरोध शुरू कर दिया था। इसके बाद से दोनों पार्टियों को नुकसान हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां सिंहल डिजिट में रह गई। इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने खराब प्रदर्शन किया जिसका सीधा फायदा कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी को हुआ। अकाली दल को सिर्फ एक लोकसभा सीट मिली और बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली।
अगर बीजेपी और अकाली दल स्थानीय निकाय चुनाव में एक साथ आ जाते तो कई जगहों पर उल्टफेर हो सकता था। दोनों दल मिलकर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरते और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विकल्प के रूप में सामने आते। दोनों पार्टियों की सीटों को मिला दिया जाए तो कांग्रेस पार्टी से कम हैं लेकिन अगर दोनों साथ लड़ती तो आम आदमी पार्टी के मुकाबले मुख्य विपक्षी ताकत बन सकती थी।
यह भी पढ़ें: पंजाब निकाय चुनावों में अकाली और IND से भी पीछे BJP, मौदी मैजिक बेअसर क्यों?
2027 में होगा गठबंधन?
बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा पंजाब में आम है लेकिन बीजेपी ने साफ कर दिया है कि पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी। हालांकि, राजनीति संभावनाओं का खेल है लेकिन फिलहाल गठबंधन की चर्चा पार्टियों में नहीं हो रही है। अकाली दल और बीजेपी दोनों पार्टियों के कई नेता गठबंधन चाहते हैं लेकिन बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व गठबंधन के पक्ष में नहीं है। अभी 2027 के चुनाव में कुछ समय बाकी है और अगर दोनों चुनाव से पहले गठबंधन करते हैं तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के एक विकल्प के रूप में सामने आ सकते हैं।