कांग्रेस पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव के बाद से अपने संगठन से लेकर परफॉर्मेंस में सुधार के लिए लगातार कोशिशें कर रही है। कहीं ना कहीं कांग्रेस इसमें सुधार करती हुई दिखाई भी दे रही है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और
राहुल गांधी
ने कई राज्यों में संगठनात्मक बदलाव किए हैं। साथ ही पार्टी को केरल जैसे महत्वपूर्ण राज्य में सरकार बनाने में सफलता मिली है। हालांकि, केरल में कांग्रेस पहले से सत्ता पाने की उम्मीद भी थी। ऐसी ही उम्मीद पार्टी को पंजाब में भी है, जहां उसका का मुकाबला आम आदमी पार्टी से है।
कांग्रेस आलाकमान ने बहुत ही शांति से हाल ही में कर्नाटक में सिद्दारमैया से सत्ता लेकर डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपा है। मगर, पंजाब में इस उम्मीद के बीच में कांग्रेस की अंदरूनी कलह सामने आ गई है, जो पार्टी की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। संगठनात्मक बदलाव कर रही कांग्रेस एक बार फिर से मुश्किल दौर से गुजर रही है। पंजाब कांग्रेस में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम को लेकर बगावत जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। यही वजह है कि कहा जाने लगा है कि सुधर रही कांग्रेस में पंजाब डेंट लगा रहा है।
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बगावत करने के फूल मूड में चन्नी
दरअसल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से बगावत करने के फूल मूड में आ गए हैं। चन्नी पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष ना बनाए जाने से नाराज हैं। कांग्रेस हाई कमान ने मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा है।
कांग्रेस हाई कमान के इसी फैसले के विरोध में पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी ने मोर्चा खोला है। चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की मांग है कि उनके नेता को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। जबकि, कांग्रेस ने पंजाब में समीकरण सामधने के लिए चन्नी को राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इलेक्शन कैंपेन का इंचार्ज जैसा महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा है।
अलग राह पर चल रहे हैं चन्नी
बीते सोमवार को नाराज चरणजीत चन्नी ने पंजाब में अपने आवास पर अपने समर्थक नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करके उन्होंने 'एकता में शक्ति' का संदेश दिया। यह संदेश साफ तौर पर कांग्रेस आलाकमान को था। इसी दौरान बैठक के बाद एक ट्वीट में उन्होंने कहा, 'कांग्रेस नेताओं ने मुझसे मेरे घर पर मुलाकात की और मुझसे पंजाब के लोगों की भावनाओं और उम्मीदों को हाई कमांड के सामने रखने की अपील की।'
राहुल गांधी के सामने चुनौती क्या है?
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए यह सिर्फ एक राज्य का विवाद नहीं है बल्कि इसके पीछे कई सियासी वजह भी हैं। उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी 2027 के आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट रखना है। अगर राहुल ऐसा करने में सफल नहीं होते हैं तो कांग्रेस को पंजाब से निराशा हाथ लग सकती है।
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झगड़े का फायदा 'आप' को मिल सकता है
पंजाब उन कुछ राज्यों में से है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता में वापसी की उम्मीद रखती है। यह उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की 13 में से 7 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को 3 और शिरोमणि अकाली दल को एक ही सीट मिली। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते थे। ऐसे में कांग्रेस के पास पंजाब की सत्ता में वापसी का सुनहरा मौका भी है।
मगर, पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच गुटबाजी बढ़ती है तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी बीजेपी को मिल सकता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस एकजुट विपक्ष की छवि बनाना चाहती है लेकिन पंजाब का विवाद उस संदेश को कमजोर कर सकता है।