चुनाव आयोग ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की खाली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है लेकिन उत्तर प्रदेश की तीन खाली विधानसभा सीटों पर अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है। इसे लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहित विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) संभावित हार की आशंका के चलते उपचुनाव नहीं कराना चाहती। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अब तक किसी कार्यक्रम का संकेत नहीं मिलने से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
चुनाव आयोग ने बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना का कार्यक्रम घोषित किया है। इन सीटों में कुछ हाल के महीनों में ही रिक्त हुई थीं जबकि उत्तर प्रदेश की कई सीटें छह से सात महीने पहले खाली हो चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।
यूपी की तीन सीटें महीनों से खाली
उत्तर प्रदेश में सबसे पहले घोसी (मऊ) विधानसभा सीट 20 नवंबर 2025 को समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद रिक्त हुई थी। इसके बाद फरीदपुर (बरेली) से बीजेपी विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल और दुद्धी (सोनभद्र) से समाजवादी पार्टी विधायक विजय सिंह गोंड के निधन के बाद दोनों सीटें भी खाली हो गईं। विधानसभा सचिवालय इन रिक्तियों की सूचना काफी पहले चुनाव आयोग को भेज चुका है, लेकिन अब तक उपचुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई।
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कानून क्या कहता है?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार किसी विधानसभा सीट के रिक्त होने पर सामान्य परिस्थितियों में छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए। अपवाद केवल तब होता है, जब विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम हो या किसी विशेष परिस्थिति में चुनाव कराना संभव न हो। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक है। ऐसे में इन सीटों पर उपचुनाव कराने में कार्यकाल संबंधी कोई कानूनी बाधा नहीं दिखाई देती। यही वजह है कि चुनाव टलने को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का आरोप है कि बीजेपी को इन सीटों पर अपनी स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है। इसलिए सरकार और सत्तारूढ़ दल उपचुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को लंबे समय तक अपने प्रतिनिधि से वंचित रखना उचित नहीं है और चुनाव आयोग को जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करना चाहिए।
विपक्षी दलों का यह भी दावा है कि यदि उपचुनाव होते हैं तो जनता महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बीजेपी को जवाब देगी। हालांकि, बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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चुनाव आयोग की चुप्पी से बढ़ी अटकलें
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक उत्तर प्रदेश की रिक्त सीटों पर उपचुनाव को लेकर कोई औपचारिक निर्देश या कार्यक्रम नहीं मिला है। आयोग की यह चुप्पी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उपचुनाव और अधिक समय तक टलते हैं तो यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, जबकि सभी की नजर अब चुनाव आयोग के अगले फैसले पर टिकी है।