उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी शुरुआती दौर में हैं, लेकिन INDIA गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सियासी घमासान तेज होता दिखाई देने लगा है। लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी को कड़ी चुनौती देने वाली समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अब विधानसभा चुनाव से पहले अपने-अपने राजनीतिक वजूद और ताकत का दावा कर रही हैं।
कांग्रेस के नेता गठबंधन में 125 से 150 सीटों तक की हिस्सेदारी और बराबरी के सम्मान की बात कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के नेता कांग्रेस को प्रदेश की जमीनी हकीकत, संगठन और पिछले चुनावी प्रदर्शन का हवाला देकर उसकी सीमाएं याद दिला रहे हैं।
दोनों दलों के नेताओं की लगातार बयानबाजी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि कहीं विधानसभा चुनाव से पहले 'बड़े भाई' बनने की यह होड़ INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भारी न पड़ जाए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस मुद्दे पर स्पष्ट रणनीति नहीं बनाई तो सीट बंटवारे को लेकर बढ़ता विवाद विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।
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कांग्रेस बोली- अब छोटा भाई नहीं बनेंगे
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इमरान मसूद साफ कह चुके हैं कि कांग्रेस अब 'छोटा भाई' बनकर चुनाव नहीं लड़ेगी। वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गौतम ने भी कई बार कहा है कि पार्टी को उसकी ताकत और जनाधार के मुताबिक सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि कांग्रेस 125 से 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदार है।कांग्रेस का तर्क है कि लोकसभा चुनाव में मिली सफलता केवल किसी एक दल की नहीं, बल्कि गठबंधन की साझा जीत थी। इसलिए विधानसभा चुनाव में भी सीटों का बंटवारा सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।
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समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को दिखाया 2022 का आईना
कांग्रेस की बढ़ती दावेदारी पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का कहना है कि सीटों का बंटवारा राजनीतिक ताकत और जीतने की क्षमता के आधार पर होगा, न कि दावों के आधार पर। समाजवादी पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी कई बार कहा है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी विपक्षी ताकत है और गठबंधन में सीटों का फैसला उसी आधार पर होगा।
समाजवादी पार्टी प्रवक्ता मनोज काका ने कांग्रेस को याद दिलाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अकेले चुनाव लड़कर सिर्फ दो सीटें जीत सकी थी। उनका कहना है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव का पैमाना नहीं बना सकती।
लोकसभा की सफलता से बढ़ा कांग्रेस का आत्मविश्वास
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद कांग्रेस संगठन अब विधानसभा चुनाव में भी बड़ी हिस्सेदारी चाहता है। वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि प्रदेश में उसका संगठन, बूथ नेटवर्क और जनाधार कांग्रेस की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है, इसलिए सीटों का बंटवारा भी उसी राजनीतिक वास्तविकता के आधार पर होना चाहिए।
बयानों से बढ़ रही सियासी तल्खी
सीटों को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। कांग्रेस जहां सम्मानजनक हिस्सेदारी और बराबरी की बात कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी जीतने की क्षमता और पिछले चुनावी रिकॉर्ड को आधार बना रही है।
ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों का फार्मूला तय करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सार्वजनिक बयान इसी तरह आते रहे तो औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों दलों के बीच अविश्वास बढ़ सकता है, जिसका असर गठबंधन की मजबूती पर भी पड़ सकता है।
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भारतीय जनता पार्टी की भी टिकी हैं निगाहें
विपक्षी गठबंधन के भीतर बढ़ती बयानबाजी पर भारतीय जनता पार्टी भी नजर बनाए हुए है। भारतीय जनता पार्टी नेताओं का दावा है कि INDIA गठबंधन में सीटों को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं होगा और विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते यह खींचतान और बढ़ सकती है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को विपक्ष की कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकती है।
2027 से पहले सबसे बड़ी परीक्षा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के लिए साथ रहना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। जिस तरह दोनों दलों के नेता सार्वजनिक मंचों से अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का दावा कर रहे हैं, उससे साफ है कि विधानसभा चुनाव से पहले सीटों का बंटवारा और बड़े भाई बनने की लड़ाई INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनने जा रही है। अब सबकी नजर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व पर है कि वे इस बयानबाजी को कैसे थामते हैं और सीटों पर सहमति का रास्ता कैसे निकालते हैं।