उत्तर प्रदेश की तीन रिक्त विधानसभा सीटों, घोसी, दुद्धी और फरीदपुर पर उपचुनाव को लेकर लंबे समय से राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही थीं। इन सीटों के खाली होने के बाद माना जा रहा था कि भारत निर्वाचन आयोग जल्द ही उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। हालांकि अब इस पूरे मामले पर तस्वीर साफ हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन तीनों विधानसभा सीटों पर अब उपचुनाव नहीं कराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब एक वर्ष से भी कम समय बचा है, इसलिए निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर अलग से चुनाव कराने के बजाय सीधे अगले विधानसभा चुनाव में मतदान कराने का फैसला किया है। इससे साफ हो गया है कि अब इन तीनों क्षेत्रों के मतदाता 2027 के आम विधानसभा चुनाव में ही अपने नए विधायक का चुनाव करेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया बड़ा ऐलान
लखनऊ स्थित भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग पिछले कुछ महीनों से अलग-अलग चुनावी प्रक्रियाओं में व्यस्त रहा। विशेष गहन पुनरीक्षण (
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), पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनाव और विभिन्न संवैधानिक दायित्वों के चलते आयोग ने स्थिति की समीक्षा की। चूंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब निकट हैं, इसलिए तीनों रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता नहीं समझी गई।
किन सीटों पर होना था उपचुनाव?
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घोसी सीट समाजवादी पार्टी के विधायक दारा सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। इस सीट पर उपचुनाव की चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं। राजनीतिक दल भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब यहां सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान होगा।दुद्धी विधानसभा सीट विधायक विजय सिंह गोंड के निधन के बाद रिक्त हुई थी। आदिवासी बहुल इस सीट पर भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा सभी अपनी रणनीति तैयार कर रहे थे। अब यहां भी अलग से उपचुनाव नहीं होगा।फरीदपुर सीट भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद खाली हुई थी। यह सीट भी उपचुनाव की सूची में शामिल थी, लेकिन निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद अब यहां भी अगले विधानसभा चुनाव में ही मतदान कराया जाएगा।
कौन-कौन से दल कर रहे थे तैयारी?
तीनों सीटों पर भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही थीं। स्थानीय स्तर पर संगठन सक्रिय हो चुके थे और चुनावी तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। हालांकि निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद सभी दलों की रणनीति अब सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित हो जाएगी।
अब 2027 में ही होगा चुनाव
निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद घोसी, दुद्धी और फरीदपुर विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को नए विधायक के लिए अलग से मतदान नहीं करना पड़ेगा। इन तीनों सीटों पर अब सीधे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 के दौरान मतदान कराया जाएगा। इससे उपचुनाव पर होने वाला खर्च भी बचेगा और चुनावी प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनाव के साथ ही पूरी होगी।
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राजनीतिक मायने भी अहम
तीनों सीटों पर उपचुनाव नहीं होने का फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा था कि इन सीटों के नतीजे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और दलों की रणनीति का संकेत देंगे। अब सभी प्रमुख दलों को इन सीटों पर अपनी ताकत दिखाने के लिए सीधे विधानसभा चुनाव का इंतजार करना होगा।