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ठाकुरों का जमघट और बृजभूषण की चेतावनी, अब अपनों से घिर रही है BJP?

बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के भागलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से अपनी ही सरकार और मौजूदा राजनीतिक हालात पर हमला बोला है।

Brijbhushan singh

बृजभूषण शरण सिंह।

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उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सूबे की पार्टियां, नेता और कार्यकर्ता आदि बिसात बिछाने लगे हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के लिए होगी क्योंकि उसके सामने अपनी सत्ता को बचाए रखना और नाराज नेताओं को संभालना आसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर लगातार ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं, जिसको विपक्षी दल भुनाने में लगे हैं। ब्राह्मण विधायक और नेताओं की गोलबंदी करके एक साथ बैठक करने की खबरें आ चुकी हैं, जो साधारण नहीं हैं। 

 

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के एक और बड़े नेता बीजेपी के खिलाफ बयान दे रहे हैं, जो आने वाले समय में सीएम योगी के लिए घातक साबित हो सकता है। यह नेता और कोई नहीं बल्कि राज्य के बड़े राजपूत नेता और सात बार के सांसद बृजभूषण शरण सिंह हैं। कैसरगंज से बीजेपी सांसद रहे ब्रजभूषण सिंह के हालिया बयान से यूपी की सियासत गरमा गई है। 

 

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दरअसल, बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के भागलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से अपनी ही सरकार और मौजूदा राजनीतिक हालात पर हमला बोला है। उन्होंने मंच से सीधे चुनौती भरे लहजे में कहा कि आज सरकार की नजरों में उनका और उनके समाज का कोई अस्तित्व नहीं बचा है।

'राजपूत उपयोगिता साबित करके दिखा देंगे'

ब्रजभूषण शरण सिंह ने हजारों की तादाद के बीच मंच से कहा, 'अगर किसी को लगता है कि हम भार बन चुके हैं, तो बस एक बार कह दें कि हमारी जरूरत नहीं है। चाहे 2027 हो या 2029 का चुनाव, हम अपनी उपयोगिता साबित करके दिखा देंगे।' उन्होंने इसी दौरान राजपूत समाज को एकजुट होने का आह्वान किया और उनसे आत्ममंथन करने की सलाह दी। नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारी चुप्पी का नतीजा है कि आज हमें तवज्जो नहीं दिया जा रहा है।

दूर तक जाते हैं मायनें

पूर्व बीजेपी सांसद ने बाद में इतिहास और संविधान निर्माण के श्रेय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'संविधान केवल बाबा साहब ने नहीं बल्कि 242 सदस्यों वाली सभा ने बनाया था। इसमें बिहार का सबसे बड़ा योगदान था जिसे भुला दिया गया।' इसी दौरान उन्होंने आजादी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तंज कसते हुए कहा कि 'साबरमती के संत' वाले नारे ने झांसी की रानी, कुंवर सिंह और बिरसा मुंडा जैसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान को पर्दे के पीछे धकेल दिया।

 

उन्होंने राजपूत वर्ग से कहा कि अब समझाने का वक्त बीत चुका है, अब अपनी ताकत पहचानने और बल, बुद्धि, विद्या अर्जित करने का समय है। ब्रजभूषण शरण सिंह ने यह बयान भले ही बिहार की धरती से दिया है लेकिन इसके मायने दूर तक जाते हैं। वह बिहार से यूपी को संदेश दे रहे हैं कि उनको नजरअंदाज करना बीजेपी के लिए भारी पड़ सकता है।

 

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साक्षी महाराज भी दे चुके हैं चेतावनी

इससे पहले उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज भी बीजेपी के खिलाफ बगावती सुर अख्तियार कर चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने एटा जिले में लोधी समाज को लेकर ऐसे बयान दिए, जिन्हें बीजेपी पर दबाव या अप्रत्यक्ष आलोचना के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि 'लोधी समाज के इशारे पर सरकारें बनती और बिगड़ती हैं।' इसी दौरान उन्होंने मांग करते हुए कहा कि एमएलसी से लेकर राज्यसभा, राज्यपाल ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री पद में भी लोधी समाज की हिस्सेदारी होनी चाहिए।

ब्राह्मण विधायकों की बैठक हो चुकी है

इसके अलावा 23 दिसंबर 2025 को यूपी की राजधानी लखनऊ में बीजेपी के तीन दर्जनभर से ज्यादा ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की थी। यह बैठक कुशीनगर के बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर हुई थी। बताया जाता है कि बैठक में बीजेपी के लगभग 40 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए, जिसमें ज्यादातर बुंदेलखंड और पूर्वांचल के थे। यही नहीं इस बैठक में अन्य दूसरे दलों के ब्राह्मण विधायक भी हिस्सा लेने आए थे।

 

ब्राह्मण विधायकों की इस बैठक में समाज की एकजुटता बढ़ाने की बात हुई थी, साथ ही एकजुटता का स्पष्ट संदेश देने पर चर्चा भी हुई थी। बैठक में पिछले कुछ समय से राजनीति दलों, उनके नेताओं, सरकार में ब्राह्मण समाज को निशाना बनाने का मुद्दा उठाया गया गया। साफ है कि बीजेपी की सरकार में उच्च जातियों के बड़े नेताओं की यह बैठकें आने वाले चुनाव में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।


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