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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गोरक्षा यात्रा से किसे होगा नुकसान? समझिए

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी में गाय की रक्षा के लिए गोरक्षा निकालने का एलान कर दिया है। यह यात्रा सीएम योगी के गृह जिले गोरखपुर से निकलेगी।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। Photo Credit- PTI

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण यात्रा निकालने जा रहे हैं। यह यात्रा और इसका उद्देश्य ऐसा है कि भारतीय जनता पार्टी और योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए असमंजस की स्थिती पैदा कर सकती है। दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 3 मई 2026 से उत्तर प्रदेश में एक बड़ी गोरक्षा यात्रा निकालने जा रहे हैं। इस यात्रा को गविष्ठि यात्रा या गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा भी कहा जा रहा है। यह यात्रा मुख्य रूप से यूपी में 'गौ रक्षा और गौ माता' को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और पूर्ण गोहत्या प्रतिबंध के मुद्दे पर केंद्रित रहेगी।

 

यात्रा के आयोजकों ने बताया है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोरक्षा के लिए यात्रा की शुरुआत सीएम योगी के गृह जिले गोरखपुर से करेंगे। इस यात्रा का समापन 24 जुलाई को लखनऊ में होगी। हालांकि, इस यात्रा का रूट क्या होगा फिलहाल इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है।  

 

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माघ मेले में शुरू हुई अदावत

प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों और पुलिस प्रशासन के बीच बड़ा विवाद देखने को मिला था। आरोप है कि उस दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों को संगम में स्नान करने से रोक दिया गया। उनके समर्थकों का दावा था कि उनके साथ पुलिस ने धक्का-मुक्की और मारपीट की। वहीं प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में अविमुक्तेश्वरानंद ने इस कार्रवाई के पीछे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया था।

 

साथ ही यूपी सरकार और पुलिस की तरफ से भी इस यात्रा और इसकी सुरक्षा के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई है। बताया गया है कि पूरी यात्रा की सुरक्षा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के 'चतुरंगिनी' के सैनिक संभालेंगे। जब इस यात्रा का समापन लखनऊ में होगा तो, उस समय उनकी अक्षौहिणी सेना के 2,18,700 लोग शंकराचार्य की अगवानी करेंगे। इस यात्रा की पूरी रूपरेखा मेरठ में एक बैठक में तैयार की गई है।

 

योगी और अविमुक्तेश्वरानंद का 36 का आंकड़ा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की यह गौ रक्षा यात्रा सीएम योगी के लिए सीधे चुनौती साबित होगी। माघ मेले में जिस तरह से अविमुक्तेश्वरानंद के ऊपर प्रयागराज प्रशासन के हमले और बाद में उनके 'शंकराचार्य' होने के सबूत मांगे गए उसका बदला इस यात्रा में लिया जा सकता है। उस दौरान सवामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन घटनाक्रमों को लेकर सीधे सीएम को घेरा था। इस बार भी वह उन्हीं को सीधे घेरेंगे।

 

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दरअसल, यूपी में पिछले 10 साल से बीजेपी की सरकार है। इस सरकार के मुखिया भी योगी आदित्यनाथ दस साल से हैं। ऐसे में स्वामी आरोप लगा रहे हैं कि यूपी में गायों की सही सुरक्षा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा है कि सरकार खुद को 'हिंदुत्ववादी' बताती है, लेकिन जमीनी हकीकत एकदम से अलग है। साथ ही कहा है कि सीएम के नीतियों और दावों में फर्क है।

सीएम योगी पर लगाए हैं कई आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसके अलावा ये भी आरोप लगाते रहे हैं कि यह सरकार खुद को हिंदुत्ववादी बताती है लेकिन इसके राज में 'बीफ एक्सपोर्ट' निर्यात हो रहा है। उनका आरोप है कि यूपी का देश के मांस निर्यात में बड़ा हिस्सा है। इसी आधार पर उन्होंने कहा था, 'सरकार राजस्व कमाई को गाय से ज्यादा प्राथमिकता दे रही है।' इसी दौरान उन्होंने सीएम योगी को चुनौती देते हुए कहा था, 'साबित करो कि आप हिंदू समर्थक हैं।' स्वामी ने सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यूपी में बीफ एक्सपोर्ट बंद करो और गाय को 'राज्य माता' घोषित करो। उन्होंने कहा कि यही असली परीक्षा है कि सरकार सच में हिंदू हितैषी है या नहीं? 

 

इन बयानों और आरोपों को देखते हुए साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गौ रक्षा यात्रा से बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ की परेशानी बढ़ेगी।


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