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सपा-बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति गाजीपुर में क्यों अटकी? आखिर यहां क्या है

गाजीपुर जिले में निशा विश्वकर्मा की मौत का मामले को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस बीजेपी सरकार के ऊपर हमलावर हैं।

nisha vishwakarma case

राहुल गांधी, योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव।

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में निशा विश्वकर्मा की मौत का मामला हाई प्रोफाइल हो गया है। अब यह मामला गाजीपुर के करंडा ब्लॉक से निकलकर जिले से होते हुए पूरे प्रदेश में फैल गया है। जिस मौत के मामले को स्थानीय पुलिस और प्रशासन सुलझा सकते थे, अब वह इससे कहीं आगे निकल गया है। यह हत्याकांड ऐसा केस बन गया है, जिसपर बीजेपी के बड़े नेता, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी अपना बयान दे चुके हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तो 29 अप्रैल को मृतक निशा विश्वकर्मा के घर सांत्वना देने जा रहे हैं।

 

इतने बड़े नेताओं के इस केस में शामिल और बयान देने के बाद यह साफ है कि यह निशा विश्वकर्मा की मौत का मामला और आगे जाएगा। साथ ही इसपर राजनीति भी जमकर होगी। दरअसल, गाजीपुर के निशा विश्वकर्मा की मौत का मामले पर समाजवादी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस तीनों ही बयानबाजी कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गाजीपुर जिले के इस केस में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से सपा-बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति यहां अटक गई है।    

पहले गाजीपुर का मामला समझिए

यह मामला गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव का है। निशा विश्वकर्मा नाम की नाबालिग इसी गांव की निवासी थी। 15 अप्रैल 2026 को उसका शव गंगा नदी के किनारे से बरामद हुआ था। पुलिस ने शव को बरामद करके कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने इसमें आत्महत्या मानकर कार्रवाई शुरू की लेकिन मृतका के परिजनों ने हत्या की शिकायत दी। साथ ही आशंका जताई गई कि निशा के साथ दुष्कर्म हुआ था। बाद में मामला बढ़ा तो पुलिस ने हरिओम पांडे और अभिषेक पांडे पर हत्या का केस दर्ज करके दोनों को अरेस्ट किया और जेल भेज दिया। 

 

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सपा नेताओं पर पथराव और बवाल

शुरुआत में आरोप लगा कि प्रशासन इस मामले को हल्की धाराएं लगाकर इसे रफा-दफा करना चाहता है। यह खबर जैसे ही सोशल मीडिया के जरिए फैली सबकी निगाहें निशा विश्वकर्मा पर गड़ गईं। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने निशा और उसके परिवार से बात करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए 22 अप्रैल को कटरिया गांव में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। सपा प्रतिनिधिमंडल 22 अप्रैल को जब मृतक के गांव पहुंचा तो आरोपियों ने उनका विरोध किया और सपा नेताओं पर जमकर पथराव करके हिंसा किया।

 

इस पथराव में कई सपा के नेता और इंस्पेक्टर-पुलिसवाले घायल हो गए। इस मामले का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। क्योंकि मामला एक विश्वकर्मा समाज की लड़की की मौत से जुड़ा है और आरोपी सवर्ण समाज से हैं तो ऐसे में मामला अगड़ा बनाम पिछड़ा हो गया है। यही नहीं पथराव की घटना में मामला यूपी की राजनीति में सत्ता बनाम विपक्ष की बड़ी लड़ाई का बन गया। समाजवादी पार्टी इस मामले को लेकर सीधे सरकार पर हमलावर है। वहीं पुलिस प्रशासन का दावा है कि अराजक तत्वों ने जानबूझकर दुष्कर्म की अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

अखिलेश यादव की भी एंट्री 

इन सबके बीच निशा विश्वकर्मा के कथित हत्याकांड मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की भी एंट्री हो गई है। अखिलेश यादव पीड़ित परिवार से मिलने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाएंगे। सपा नेताओं पर हुए पथराव के बाद से और अखिलेश यादव के गांव जाने के ऐलान के बाद पूरे गांव को छआवनी में तब्दील कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। गाजीपुर पुलिस ने हिंसा में शामिल 200 लोगों पर केस दर्ज कर लिया। इसमें सपा नेताओं के नाम भी शामिल कर लिए गए हैं। इसके बाद यह मामला पूरी तरह राजनीतिक बन गया है। खासतौर से बीजेपी-सपा और कांग्रेस।

 

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राहुल गांधी का जोरदार हमला

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मामले पर कहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की बेटी के साथ बलात्कार घटना एक पैटर्न बन गया है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया। राहुल ने कहा, 'हर बार वही चेहरा- पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, गरीब। हर बार वही सच्चाई- अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना। हर बार वही चुप्पी- सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था।' राहुल गांधी के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी अपना प्रतिनिधिमंडल गाजीपुर में पीड़िता के घर भेजने का फैसला किया है।

बीजेपी भी कूदी

सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर का गाजीपुर जाने का कार्यक्रम था लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें कटरिया गांव जाने से पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया। ऐसे में कांग्रेस भी लगातार इस मामले को अगड़ा बनाम पिछड़ा बताकर उठा रही है। वहीं, बीजेपी विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। बीजेपी की राज्यसभा सांसद संगीता बलवंत ने अखिलेश यादव के 29 अप्रैल के प्रस्तावित दौरे को प्रशासन से रोकने की मांग की है। बीजेपी इस पूरे मामले को अगड़ा बनाम पिछड़ा होने से रोकने का प्रयास कर रही है, ताकि इससे विपक्ष का चुनाव में बढ़त ना मिले। 

 

यूपी का समूचा विपक्ष बीजेपी और पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाकर हमला बोल रहा है।


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