ज्योतिर्मठ ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी आदित्यनाथ सरकार के बीच विवाद को एक महीने से ज्यादा समय हो गया है। प्रयागराज में माघ मेला में त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से शुरू हुआ यह विवाद अब गंभीर कानूनी स्तर पर पहुंच गया है। मामले में जबरदस्त राजनीति भी हो रही है। यही नहीं विवाद में धार्मिक परंपराएं, प्रशासनिक नियम, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की बारिश हो रही है। मगर इस विवाद में मुख्य रूप से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य किरदार हैं। इसके अलावा बाकि सब इसमें शामिल हो गए हैं।
यह विवाद माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के दिन स्नान करने से हुआ। इस दिन शंकराचार्य अपनी पारंपरिक पालकी और छत्र के साथ संगम स्नान करने जा रहे थे। इस दौरान मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए शंकराचार्य को उनके काफिले और पालकी से स्नान घाट तक जाने से मना कर दिया। प्रशासन ने कहा कि इस कदम से मेले में भगदड़ हो सकती है। इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की के बाद झड़प और मारपीट हुई।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर जैसे ही यह सरकारी कार्रवाई हुई तो उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने भी विवाद में कुद गई। सपा शंकराचार्य को लेकर योगी सरकार पर अपमान करने का आरोप लगा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव बीजेपी सरकार द्वारा सनातन धर्म और शंकराचार्य के अपमान के रूप में देख रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि समाजवादी पार्टी 'शंकराचार्य' विवाद को लेकर योगी सरकार को कैसे घेर रही है...
शंकराचार्य और समाजवादी पार्टी
शंकराचार्य ने दावा किया कि योगी सरकार में पहली बार इतिहास में ऐसा हुआ कि शंकराचार्य बिना स्नान किए मेला छोड़कर चले गए। उन्होंने योगी सरकार पर 'सनातन विरोधी' और नकली हिंदू होने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को नकली संत भी बताया जो सत्ता के लालच में रहता है। दरअसल, योगी सरकार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ POCSO एक्ट और माघ मेला/स्नान रोकने के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की है। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर खुलकर योगी सरकार की आलोचना की है और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।

सपा का स्टैंड और प्लान
योगी सरकार जैसे-जैसे शंकराचार्य के ऊपर शिकंजा कस रही है, वैसे-वैसे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बार-बार शंकराचार्य को 'हम सबके पूजनीय' हैं कहकर संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य का सम्मान बचाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार ने 20 साल पुरानी घटना निकालकर शंकराचार्य के खिलाफ झूठा केस दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा कि सरकार इससे शंकराचार्य को अपमानित कर रही है।
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अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार खुद को भगवाधारी और सनातनी कहती है लेकिन पूजनीय शंकराचार्य पर ऐसा आरोप लगाकर वह उनका अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन और मजबूत हो रहा है। समाजवादी पार्टी ने एफआईआर को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए शिकायतकर्ता के बीजेपी नेताओं से संबंध होने का दावा किया। सपा ने लोगों से अपील की है कि वे शंकराचार्य के सम्मान के लिए खड़े हों और सरकार के खिलाफ आवाज उठाएं।
अखिलेश यादव कहां खड़े हैं?
अखिलेश यादव पिछले दिनों उन्नाव और कानपुर के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने इसी सिलसिले में कहा, 'शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान किसी हाल में स्वीकार्य नहीं।' उन्होंने कहा कि बीजेपी का चरित्र यही है जो भी उनके खिलाफ बोलेगा, उसकी आवाज बंद करने के लिए झूठे मुकदमे लगवाते हैं।
सपा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयानों में इसे बार-बार दोहरा रही है कि सरकार शंकराचार्य को फंसाने की कोशिश कर रही है। इसी बात को सपा के प्रवक्ता भी टीवी डिबेट्स में दोहरा कर बीजेपी पर सनातन पर हमला बता रहे हैं। ऐसे में कुल मिलाकर
समाजवादी पार्टी इस विवाद को यूपी में बीजेपी सरकार के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक हथियार बना रही है। पार्टी इस विवाद और शंकराचार्य के खिलाफ हुई कार्रवाई को सनातन धर्म की रक्षा और सामाजिक न्याय से जोड़कर जनता के बीच पेश कर रही है। यानी कि पार्टी का रुख साफ है कि वह पूरी तरह से शंकराचार्य के साथ में खड़ी है।