उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी जीत को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। सपा ने इंडिया गठबंधन के मौजूदा और संभावित दलों के लिए स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार गठबंधन में शामिल किसी दल को केवल उन्हीं प्रत्याशियों को उतारने की अनुमदि दी जाएगी जो जिताऊ हों। यह कदम आगामी चुनावों में सपा की जीत को सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
सपा का मानना है कि गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मैदान में उतारे गए उम्मीदवार कितने प्रभावी हैं। ऐसे में कांग्रेस सहित सहयोगी दलों को अपने प्रत्याशियों के नाम और उनकी जीत की संभावनाओं का विवरण पहले प्रस्तुत करना होगा।
सपा सभी 403 सीटों पर कर रही तैयारी
सपा प्रमुख अखिलेश यादव संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए है। वह प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके है। बूथ स्तर तक पार्टी का संगठन तैयार है। सपा अपने बूथ अध्यक्षों से मतदाता सूची के आधार पर जातीय गणना भी करवा रही है। जिससे चुनाव से पहले पता लग जाएगा कि किस विधानसभा में किस जाति के मतदाता अधिक है। ऐसे में उसी जाति के प्रत्याशी को वरीयता के आधार पर टिकट दी जाएगी।
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साल 2022 में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोग दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा था। पार्टी ने 111 सीटें जीती थी। आरएलडी ने 8 व सुहेल देव पार्टी ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी व आरएलडी ने सपा से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
कांग्रेस 2 सीटों पर ही थी सिमटी
वर्ष 2022 में कांग्रेस ने यूपी में अकेले सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज कर पाई। पार्टी के ज्यादातर प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा। सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज कर परचम लहराया था, वहीं कांग्रेस ने भी 6 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में एक सीट पर ही कांग्रेस चुनाव जीतने में कामयाब हुई थी।
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अखिलश यादव और राहुल गांधी यूपी में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। कांग्रेस आगामी चुनाव में सौ से ज्यादा सीटों की मांग करेगी। वहीं सपा जमीनी स्तर पर नई नीति के साथ सीट बंटवारे को लेकर काम रही है। ऐसे में सीट बंटवारे की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।