आम आदमी पार्टी ने पंजाब में साल 2022 में सरकार बनाकर इतिहास रच दिया था। लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच ही सत्ता की चाबी रही लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस ट्रेंड को तोड़कर भारी जीत के साथ पंजाब में पहली बार सरकार बनाई। इस सरकार के गठन के बाद भी पंजाब में आम आदमी पार्टी का विस्तार होता रहा। शिरोमणि अकाली दल के कई नेता टूटकर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए जिनमें कई पूर्व विधायकों और मंत्रियों का नाम भी शामिल है। शिरोमणि अकाली दल में नेतृत्व संकट के कारण भी यह स्थिति पैदा हुई की पार्टी के कार्यकर्ताओं को पार्टी का साथ छोड़ना पड़ा।
आम आदमी पार्टी ने पिछले पांच साल में शिरोमणि अकाली दल को सबसे बड़ा झटका पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा के रूप में दिया है। सुरजीत सिंह रखड़ा ने हाल ही में अकाली दल को छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा है। सीएम भगवंत मान ने खुद उन्हें पार्टी में शामिल करवाया।
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रखड़ा ने दिया झटका
अकाली दल के लिए सुरजीत सिंह रखड़ा का जाना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। रखड़ा ने साफ किया है कि जिस तरह से पार्टी ने धार्मिक मामलों में स्टैंड लिया है उसके चलते वह पार्टी में शामिल हो रहे हैं। अगले विधानसभा चुनाव में वह समाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। सुरजीत सिंह रखड़ा पंजाब की राजनीति में बड़ा और रसूखदार नाम हैं। राजनीति के साथ-साथ उनका और उनके भाइयों का विदेश में बड़ा कारोबार है।
राज महेंद्र सिंह मजीठिया
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में कई दूसरी पार्टियों के नेता भी आम आदमी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद राज महेंद्र सिंह मजीठिया ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है।
पवन कुमार टिन्नू
पवन कुमार टिन्नू शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने दो साल पहले ही अकाली दल को छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था। उनकी दलित वोटों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। टिन्नू ने बीएसपी से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। 2012 में वह अकाली दल में शामिल हुए और पहली बार जालंधर के आदमपुर से विधायक बने। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार से चुनाव हार गए। 2017 में वह फिर से चुनाव लड़े और जीत गए लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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हरमीत सिंह संधू
आम आदमी पार्टी ने हरमीत सिंग संधू को शिरोमणि अकाली दल से पार्टी में शामिल करवाया। संधू तरनतारन सीट से तीन बार विधायक रह चुके थे। 2002 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते थे। 2007 और 2012 में वह अकाली दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने इसके बाद आम आदमी पार्टी की टिकट रतरनतारन सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे। आम आदमी पार्टी लगातार दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी को मजबूत कर रही है।