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पुरानी पेंशन बहाल का वादा कर अखिलेश ने खेला बड़ा दांव, उदाहरण से समझें असर

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार बनने पर पुरानी पेंशन को बहाल करने की घोषणा की है। पेंशन बहाल की घोषणा से सपा को क्या फायदा होगा? आइए जानते हैं...

Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव, Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन का मुद्दा फिर गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाएगी और इसे पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा। इस ऐलान के बाद दूसरे राज्यों में पुरानी पेंशन को लेकर किए गए वादों और फैसलों की चर्चा तेज हो गई है।

 

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया था, चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी और सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन बहाल करने का फैसला हुआ। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारों ने पुरानी पेंशन लागू करने का फैसला किया, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद दोनों राज्यों में सत्ता बदल गई। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने 2023 के चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू करने का वादा किया, लेकिन वहां भाजपा ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई। वहीं केरल में 2026 से सुनिश्चित पेंशन योजना शुरू की गई है, जिसे पुरानी पेंशन योजना से अलग व्यवस्था माना जाता है।

हिमाचल में बनी सरकार और लागू हुई पुरानी पेंशन

हिमाचल प्रदेश का उदाहरण इस बहस में सबसे अहम है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा किया था। उस समय यह कर्मचारियों के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 में से 40 सीटों पर जीत दर्ज की और सरकार बनाई। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में नई पेंशन व्यवस्था के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में वापस लाने का फैसला किया गया। कांग्रेस ने इसे अपने चुनावी वादे को पूरा करना बताया था।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन का वादा

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारों ने भी पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का फैसला किया था। इन दोनों राज्यों में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन को लेकर कांग्रेस सरकारों ने कदम उठाए।इसके बाद 2023 में दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। राजस्थान में भाजपा ने 200 में से 115 सीटें जीतकर सरकार बनाई, जबकि कांग्रेस 70 सीटों पर रह गई। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतीं और कांग्रेस को 35 सीटें मिलीं। दोनों राज्यों में चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

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मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस ने किया था पुरानी पेंशन का वादा

मध्य प्रदेश में भी पुरानी पेंशन का मुद्दा चुनाव से पहले कांग्रेस के घोषणा पत्र और वादों में शामिल था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनने पर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की बात कही थी।लेकिन मध्य प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। 230 विधानसभा सीटों वाले राज्य में भाजपा ने 163 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 66 सीटें मिलीं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई। इसके बाद भाजपा ने सरकार बनाई।

केरल में शुरू हुई सुनिश्चित पेंशन योजना

केरल का मामला भी इस बहस में महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। केरल में 1 अप्रैल 2026 से सुनिश्चित पेंशन योजना शुरू की गई है। इसे सीधे पुरानी पेंशन योजना कहना सही नहीं होगा।इस व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अंतिम मूल वेतन के अधिकतम 50 प्रतिशत तक सुनिश्चित पेंशन मिल सकती है। इसके साथ महंगाई राहत का भी प्रावधान है। नई व्यवस्था में आने वाले कर्मचारियों के लिए नई पेंशन व्यवस्था और सुनिश्चित पेंशन योजना में विकल्प दिया गया है, जबकि मौजूदा नई पेंशन व्यवस्था वाले कर्मचारियों को भी नियमों के तहत नई योजना में आने का विकल्प दिया गया है।

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अब उत्तर प्रदेश में अखिलेश ने बढ़ाया मुद्दा

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रमुख वादों में शामिल करने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि सपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी। पार्टी इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की तैयारी में है। अखिलेश यादव ने केवल पुरानी पेंशन की बात नहीं की है।

 

उन्होंने शिक्षकों, मदरसा शिक्षकों, संस्कृत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और दूसरे शिक्षा कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी वादे किए हैं। सपा का कहना है कि इन मुद्दों को 2027 के घोषणा पत्र में जगह दी जाएगी। अब उत्तर प्रदेश में सवाल यह है कि सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़ा पुरानी पेंशन का मुद्दा 2027 के चुनाव में कितना बड़ा बनता है। 


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