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आकाश आनंद को निकालने से BSP में बढ़ी बेचैनी, इस्तीफों से पार्टी में मचा हड़कंप

बीएसपी से आकाश आनंद के निष्कासन से नाराज विधानसभा और लोकसभा के दो पूर्व प्रत्याशियों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इससे बसपा में हलचल तेज हो गई है। पार्टी कार्यालय में संगठन के नेताओं की बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

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बसपा प्रमुख मायावती। Photo Credit: Social Media

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद अंदरूनी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में एक के बाद एक बदलाव और नेताओं की नाराजगी ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आकाश आनंद के समर्थन में कुछ नेताओं के इस्तीफे सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती के फैसले को लेकर बसपा में असंतोष आगे और बढ़ सकता है? पार्टी मुख्यालय में शुक्रवार को दिनभर बैठकों और मंथन का दौर चलता रहा।

आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के बाद उनके समर्थक उनकी वापसी की मुहिम में जुटे हुए हैं। हालांकि आकाश ने पूरे घटनाक्रम पर अभी तक सार्वजनिक तौर पर कोई बड़ा बयान नहीं दिया है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से मायावती की सोशल मीडिया पोस्ट को भी रिपोस्ट नहीं कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी की ओर से आकाश को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं, लेकिन आकाश की तरफ से इन प्रस्तावों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मायावती ने वापसी को लेकर रखी शर्त

बसपा प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को साफ किया कि पार्टी से निष्कासन के बाद दूसरे दलों में जाने वाले नेताओं की वापसी आसान नहीं होगी। हालांकि जो लोग निष्कासन के बावजूद बसपा और बहुजन समाज के हित में काम करते रहे हैं, उनके मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार किए जाने की बात कही गई है। मायावती के इस बयान को आकाश आनंद और उनके समर्थकों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। आकाश को लेकर पार्टी के भीतर आगे क्या फैसला होगा, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

 

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धर्म सिंह गौतम ने भी आकाश के समर्थन में छोड़ी BSP

मऊ में भी आकाश आनंद के निष्कासन का असर दिखाई दिया। मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र से बसपा के पूर्व प्रत्याशी धर्म सिंह गौतम ने आकाश के समर्थन में पार्टी से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा मायावती को भेजा। धर्म सिंह गौतम लंबे समय से बसपा से जुड़े रहे हैं और संगठन में बूथ अध्यक्ष से लेकर सेक्टर अध्यक्ष, विधानसभा स्तर की जिम्मेदारियों और मंडल प्रभारी के तौर पर भी काम कर चुके हैं। धर्म सिंह गौतम ने कहा कि आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के फैसले से वह असहमत हैं। उन्होंने पार्टी के दूसरे पदाधिकारियों से बसपा में बने रहकर संगठन के लिए काम करने की अपील भी की है।

मेरठ में देववृत्त त्यागी ने भी छोड़ी पार्टी

इसी कड़ी में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से बसपा के पूर्व प्रत्याशी देववृत्त त्यागी ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को भेजा है। देववृत्त त्यागी ने संगठन में लगातार हो रहे फेरबदल पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों के समय संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन लगातार बदलाव से कार्यकर्ताओं में असमंजस और अविश्वास की स्थिति बन रही है।


त्यागी का आरोप है कि पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ लोगों के फैसलों से संगठन कमजोर हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि मेरठ में कई पुराने बसपाई मौजूदा कार्यप्रणाली से नाराज हैं और आने वाले समय में कुछ और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर भी साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मायावती ने आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ पर भी निशाना साधा है। मायावती ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा को टालने के लिए रातभर कई तरह के प्रयास किए। मायावती के मुताबिक अधिक देरी से पार्टी और बहुजन आंदोलन को नुकसान हो सकता था। उन्होंने संकेत दिया कि इस पूरे मामले से जुड़ी और जानकारी सही समय पर पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने रखी जाएगी।

 

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2027 से पहले बसपा के सामने बड़ी चुनौती

आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद सामने आए इस्तीफों और पुराने नेताओं की नाराजगी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सामने संगठनात्मक चुनौती बढ़ा दी है। एक तरफ मायावती पार्टी में अनुशासन और अपनी राजनीतिक लाइन को लेकर सख्त संदेश दे रही हैं, तो दूसरी तरफ आकाश समर्थक नेता लगातार उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं।


ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस्तीफों का सिलसिला यहीं रुकता है या बसपा के भीतर असंतोष और बढ़ता है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की नजर संगठन को एकजुट रखने और चुनाव से पहले जमीनी ढांचे को मजबूत करने पर है।


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