उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को एक बार फिर यूपी के चुनावी मैदान में सक्रिय करने की रणनीति बनाई है। आकाश आनंद 28 अक्टूबर से प्रदेश में चुनावी अभियान शुरू करेंगे। इस दौरान अलग-अलग मंडलों में रैलियां करने के साथ संभावित विधानसभा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान भी किया जाएगा। बसपा की इस रणनीति को पार्टी के कमजोर पड़ते जनाधार को दोबारा मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आकाश आनंद के चुनावी अभियान की शुरुआत 28 अक्टूबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की अनूपशहर विधानसभा सीट से प्रस्तावित है। यहां वह मनोज कुमार प्रधान को बसपा का प्रत्याशी घोषित कर सकते हैं। इस रैली के जरिए मेरठ मंडल के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने की तैयारी है। इसके बाद 2 नवंबर को सहारनपुर जिले की नकुड़ विधानसभा सीट पर आकाश आनंद की रैली प्रस्तावित है। यहां नरेश कुमार सैनी के नाम की घोषणा की जा सकती है। सहारनपुर मंडल बसपा की पुरानी राजनीतिक जमीन रहा है। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि इस क्षेत्र में संगठन को फिर से मजबूत किया जाए और स्थानीय सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में साधा जाए।
यह भी पढ़ें: 'आकाश आनंद बदल गए हैं...', मायावती ने फिर बनाया BSP का राष्ट्रीय संयोजक
अयोध्या, आगरा और कानपुर पर भी नजर
बसपा के चुनावी कार्यक्रम में अयोध्या, आगरा और कानपुर मंडल को भी अहमियत दी गई है। 20 नवंबर को अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट पर बड़ी सभा प्रस्तावित है। इस दौरान पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू की उम्मीदवारी का ऐलान किया जा सकता है। वहीं, 22 नवंबर को आगरा मंडल की एत्मादपुर विधानसभा सीट पर सर्वेश बघेल के नाम की घोषणा संभावित है।
कानपुर मंडल की बिल्हौर विधानसभा सीट पर अवधेश कोरी को प्रत्याशी घोषित करने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इन सभाओं के जरिए बसपा अलग-अलग क्षेत्रों में अपने संभावित उम्मीदवारों को पहले से चुनावी मैदान में उतारकर कार्यकर्ताओं को लामबंद करने की कोशिश करेगी। प्रत्याशियों की घोषणा को रैलियों से जोड़ने की रणनीति के पीछे स्थानीय स्तर पर चुनावी माहौल बनाने का मकसद है। इससे उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र में पहचान बनाने का मौका मिलेगा, वहीं पार्टी संगठन को भी चुनाव से पहले सक्रिय किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें: बिठूर में BJP की बंपर जीत, राणा समरेन्द्र सिंह जीते; कांग्रेस को सिर्फ 58 वोट
मायावती ने आकाश आनंद पर क्यों लगाया दांव?
2027 का विधानसभा चुनाव बसपा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पिछले चुनावों में लगातार कमजोर प्रदर्शन और लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुलने के बाद बसपा के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने और संगठन को फिर से खड़ा करने की चुनौती है। ऐसे में मायावती युवा चेहरे आकाश आनंद को आगे करके पार्टी में नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही हैं।
आकाश आनंद को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। अब प्रदेश के अलग-अलग मंडलों में रैलियों और प्रत्याशियों की घोषणा से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता बढ़ने जा रही है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश होगी कि बसपा 2027 के चुनाव को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रही है।
सपा और बीजेपी के बीच बसपा की अलग रणनीति
उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी भी अपनी राजनीतिक तैयारियों में जुटी हैं। सपा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ जोड़ने की रणनीति पर जोर दे रही है, जबकि बीजेपी अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों के सहारे चुनावी बढ़त बनाए रखने की कोशिश करेगी। ऐसे माहौल में बसपा के सामने अपने दलित वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की चुनौती होगी।
आकाश आनंद की रैलियों के जरिए बसपा उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है, जहां पार्टी का संगठन पहले प्रभावशाली रहा है। प्रत्याशियों के नाम पहले घोषित करने से उम्मीदवारों को क्षेत्र में काम करने के लिए अधिक समय भी मिल सकता है। रैलियों और संभावित प्रत्याशियों की घोषणाओं से ही बसपा की चुनावी सफलता तय नहीं होगी। पार्टी को जमीनी संगठन, बूथ स्तर की सक्रियता और मतदाताओं के भरोसे को मजबूत करना होगा।
यह भी पढ़ें: दिव्या मित्तल ने क्यों चुनी मिर्जापुर सदर विधानसभा, समीकरण और रणनीति क्या है?
क्या आकाश आनंद बसपा को दिला पाएंगे नई ताकत?
मायावती के इस फैसले को मिशन-2027 के लिए अहम कदम माना जा रहा है। आकाश आनंद के सामने पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, युवाओं तक पहुंच बनाने और बसपा के पारंपरिक जनाधार को दोबारा मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। वहीं, पार्टी के बड़े फैसलों और उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय में मायावती की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। अब निगाहें 28 अक्टूबर से शुरू होने वाले अभियान पर हैं। इन रैलियों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी, स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता और प्रत्याशियों को मिलने वाले समर्थन से यह संकेत मिलेगा कि बसपा मिशन-2027 में कितनी मजबूती से आगे बढ़ रही है।