उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रभारी कुमारी सैलजा और लोकसभा में नेता विपक्ष
राहुल गांधी
ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश दावों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार से जवाब मांगा है। दोनों नेताओं ने BJP सरकार के निवेश दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरने का दावा करने वाली सरकार को जनता के सामने एक-एक आंकड़े का हिसाब देना चाहिए। दोनों नेताओं ने खुद कोई दस्तावेज नहीं पेश किए हैं, उन्होंने न्यूजलॉन्डी के एक रिपोर्ट का हवाला दिया है।
कुमारी सैलजा से पहले राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने धामी सरकार पर निवेश के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया और इसे BJP के डबल इंजन मॉडल का एक और नमूना बताया। राहुल गांधी के मुताबिक समिट में 1,779 समझौता ज्ञापन और 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रचार किया गया। रोडशो पर जनता के लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये को जमीन पर उतरा निवेश बताया।
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किस घोटाले की ओर इशारा कर रही है कांग्रेस?
कांग्रेस इसे 'आटा चक्की' घोटाले का नाम दे रही है। राहुल गांधी ने न्यूजलॉन्ड्री की पड़ताल के हवाले से कई बातें रखीं। राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि निवेशकों की सूची में आटा चक्कियां, खाद-बीज की दुकानें और छोटे क्लीनिक के मालिक शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ को इसकी जानकारी तक नहीं थी। 35,279 करोड़ रुपये यानी करीब 35 प्रतिशत निवेश सरकारी बिजली कंपनियों से जुड़ा बताया गया है।
कांग्रेस यह भी कह रही है कि CSR और दान से चलने वाले एक स्कूल को 24.49 करोड़ रुपये का निवेशक बताया गया। एक अन्य कंपनी को 1,200 करोड़ रुपये का निवेशक बताया गया, जिसकी कमाई चार साल से शून्य है और रिकॉर्ड में एक भी कर्मचारी नहीं है। दुबई और लंदन के रोडशो से 27,975 करोड़ रुपये के समझौतों का दावा किया लेकिन जमीन पर उतरे निवेश की सूची में इन दोनों शहरों की कोई कंपनी नहीं मिली। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि समिट से 7 दिन पहले, 1 दिसंबर 2023 को निवेश की परिभाषा तक बदल दी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से करीब 3,300 निवेशकों की पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।
सरकार से सवाल पूछने गांव-गांव जाएगी कांग्रेस
कुमारी सैलजा ने सरकार से पूछा कि इतने बड़े आंकड़ों से राज्य में कितनी नई फैक्ट्रियां लगीं। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिला और पहाड़ों से पलायन कितना कम हुआ। उन्होंने सवाल किया कि सरकार सभी निवेशकों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस इस मामले को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी गांव-गांव जाकर इन तथ्यों को जनता के सामने रखेगी। सरकार से हर दावे, हर समझौते और खर्च हुए हर रुपये का हिसाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को निवेश के आंकड़े नहीं, रोजगार के अवसर चाहिए।
उद्योग निदेशालय ने इन दावों पर क्या किया है?
उद्योग निदेशालय ने समिट को लेकर सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में राजपुर थाने में शिकायत दी थी। पुलिस ने आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
आटा चक्की स्कैम पर सरकार का क्या कहना है?
उत्तराखंड में तीन साल पहले हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 और राज्य में पूंजी निवेश को लेकर सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला दर्ज किया गया है। उद्योग निदेशालय की शिकायत पर राजपुर थाने में केस दर्ज हुआ है। पुलिस ने आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उद्योग निदेशालय, राजपुर के अपर निदेशक (उद्योग) मृत्युंजय सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में कहा गया है कि राज्य सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, निवेश लाने और रोजगार पैदा करने के लिए यह समिट आयोजित किया था।
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कांग्रेस और विपक्ष पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
शिकायत के अनुसार कामरान और अन्य लोग समिट और राज्य में निवेश को लेकर X और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार झूठी, भ्रामक और बेबुनियाद सामग्री फैला रहे हैं। आरोप है कि इस तरह की गलत जानकारी से निवेशकों में भ्रम और अविश्वास पैदा हो सकता है। इसका असर उत्तराखंड के निवेश माहौल पर पड़ सकता है।
क्यों जांच करा रहा है विभाग?
सरकार का कहना है कि राज्य के औद्योगिक हितों की रक्षा और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए मामले की साइबर और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही भ्रामक पोस्ट साझा करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। मामले की जांच नेहरू कॉलोनी थाने के इंस्पेक्टर देवेंद्र चौहान को सौंपी गई है।