कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में BJP ने क्या खोया, क्या पाया?
कॉकरोच जनता पार्टी के लंबे आंदोलन के बाद मोदी सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।

कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के कुध घंटे बाद अपना आंदोलन खत्म कर दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक छोटे से प्रदर्शन से शुरू हुआ यह कारवां इतना बड़ा बन गया कि इसने मजबूत मानी जाने वाली मोदी सरकार के एक मंत्री का विकेट गिरा दिया। एक महीने से ज्यादा समय तक चले इस आंदोलन ने नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के इतिहास में पहला इतना बड़ा आंदोलन किया। प्रदर्शन की जब शुरुआत हुई तब सरकार ने इसे इतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितना लिया जाना चाहिए था।
मगर, 20 जुलाई को CJP ने अपना पहले से निर्धारित शांतिपूर्ण संसद मार्च कॉल किया था। CJP ने इसके लिए छात्रों और युवाओं से बड़ी संख्या में जुड़ने का आह्वान किया था। इस आह्वान का असर इतना हुआ कि हजारों की संख्या में जेन-जी युवा जंतर-मंतर पहुंच गए। 20 जुलाई की सुबह युवाओं ने संसद की तरफ कूच किया लेकिन दिल्ली पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। बाद में पुलिस और युवाओं के बीच संघर्ष हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें दर्जनों छात्रों को गंभीर चोटें आई और इतने ही सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।
अच्छे संकेत नहीं छोड़कर गया आंदोलन
20 जुलाई की घटना के बाद यह प्रदर्शन जैसे पूरे देश में आग की तरह फैल गया और कई शहरों में प्रदर्शन होने लगे। छात्र और युवा शक्ति की एकता को देखते हुए आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने बीते शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मगर, 37 दिनों के प्रदर्शन और युवाओं पर लाठीचार्ज के बाद मंत्री का इस्तीफा लेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार और बीजेपी के लिए अच्छे संकेत नहीं छोड़कर गया।
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दरअसल, 20 जुलाई की घटना के बाद पिछले 12 सालों में यह पहली बार था कि मोदी सरकार बेबस नजर आई। पहली बार सरकार से लेकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व रक्षात्मक दिखा और नीट पेपर लीक मामले में अपना बचाव करता रहा। बीजेपी और सरकार के विरोध में देश के करोड़ों युवाओं ने नारे लगाए और पीएम की आलोचना की। युवाओं ने विपक्ष की तारीफ भी की। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर CJP आंदोलन में बीजेपी ने क्या खोया क्या पाया है?
युवा वोटरों में भरोसे को झटका
सबसे पहले भारत के मुख्य न्यायधीश के कमेंट 'कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोजगार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं।' सीजेआई के इसी बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी की नींव पड़ी और देखते ही देखते उसे सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों का समर्थन मिल गया।
सीजेआई के इस व्यंग्य से शुरू हुए इस आंदोलन ने देश के छात्रों, खासकर नीट-यूजी पेपर लीक का मुद्दा उठाया। इसी को लेकर तंजर-मंतर पर 6 जून से प्रदर्शन शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो गया। इससे जमीन पर ही लाखों की संख्या में छात्रों और युवाओं ने अपना समर्थन दिया और सोशल मीडिया पर करोड़ों ने। इससे युवा पीढ़ी का सरकार के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आया।

इस आंदोलन से बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ भरोसा कम होने के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे अब बीजेपी को वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हुआ
20 जुलाई को युवाओं पर लाठीचार्ज होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई। लाठीचार्ज के बाद जंतर-मंतर पर जैसे युवाओं का सैलाब उमड़ने लगा। दिल्ली के बीचोबीच युवाओं का इतना बड़ी संख्या में इकट्ठा होना मोदी सरकार पर लगातार दबाव बनाता गया। मोदी सरकार ने इसकी गंभीरता और छात्रों की मांग को देखते हुए CJP के साथ तीन दौर की बातचीत की और अंत में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया।

मोदी सरकार की 'सख्त' छवि पर पड़ा असर
दरअसल, सालों बाद ऐसा देखने को मिला कि सड़क और सोशल मीडिया पर चले आंदोलन ने केंद्र सरकार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। इस आंदोलन और इस्तीफे की वजह से देश में यह संदेश गया कि सरकार जनता के दबाव से पूरी तरह अछूती नहीं है बल्कि सही मुद्दा होने पर झुकती है। जो मोदी सरकार दबाव होने पर अपने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करती थी, उसने अपने मंत्री का इस्तीफा ले लिया।
विपक्ष को मिला नया और बड़ा मुद्दा
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी (एपी) ने छात्रों के इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और मोदी सरकार को छात्रों-युवाओं के मुद्दे पर घेरा। इसके साथ ही विपक्ष ने मोदी सरकार को शिक्षा, बेरोजगारी और युवाओं के असंतोष को लेकर जमकर हमला किया। इस आंदोलन की वजह से एक तरह से विपक्ष का जान मिल गई है।
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बीजेपी ने क्या खोया?
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से बीजेपी को जो सबसे बड़ा नुकसान हुआ है वह युवाओं के बीच भरोसे में कमी और सरकार की छवि पर चोट है। मोदी सरकार युवाओं अपने पक्ष में करने में नाकाम साबित हुई, जिससे बीजेपी को आने वाले चुनावों में नुकसान हो सकता है। ऐसे में 2027 के यूपी चुनाव और आगे के चुनावों में इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि शिक्षा, रोजगार और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
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