पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा दांव खेला है। बीजेपी ने मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसिरानी रथ को नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा, रेजीनगर विधानसभा सीट पर शाखारव सरकार को उम्मीदवार बनाया गया है। 2026 में हुए चुनाव में जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ थी जिसके चलते यहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं। अब वह भवानीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं।
पहले चर्चा थी कि इस सीट से
ममता बनर्जी
खुद चुनाव लड़ सकती हैं क्योंकि अब वह विधायक भी नहीं हैं। हालांकि, तृणूल कांग्रेस ने यहां से संचिता डे को उतारा है। वहीं, पिछली बार इस सीट को मुश्किल से जीत पाने वाली बीजेपी ने इस बार शुभेंदु अधिकारी के बेहद खास रहे चंद्रनाथ रथ की मां को उतारकर सहानुभूति की लहर बनाने की कोशिश की है।
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चंद्रनाथ रथ के साथ क्या हुआ था?
पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे आने के कुछ दिन बाद ही चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की थी। चंद्रनाथ रथ अपनी कार में बैठकर कहीं जा रहे थे। नॉर्थ 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में उनकी कार पर हुई गोलीबारी में उनकी जान चली गई थी।
एयरपोर्स में रहे चंद्रनाथ रथ लंबे समय से शुभेंदु अधिकारी के साथ ही काम कर रहे थे। तब भी चर्चा थी कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने पर चंद्रनाथ को बड़ी भूमिका मिलेगी। हालांकि, इससे पहले ही उनकी हत्या कर दी गई।
नंदीग्राम में महिला vs महिला
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया है। अब बीजेपी ने हसिरानी रथ को उतारकर मुकाबले को महिला बनाम महिला कर दिया। वहीं, कांग्रेस ने मिलन प्रधान को और ऋतब्रत बनर्जी के धड़े वाले गुट ने मोहम्मद एतेस्मुल हक को उतारा है। सीपीआई ने यहां से शाति गोपाल गिरी को उम्मीदवार बनाया है। पिछले चुनाव में यहां से तृणमूल कांग्रेस के पबित्र कर को 1,17,636 वोट वोट मिले थे और बीजेपी के टिकट पर लड़े शुभेंदु अधिकारी ने 1,27,301 वोट पाकर जीत हासिल की थी।
रेजीनगर में रोमांचक मुकाबले की तैयारी
रेजीनगर विधानसभा सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण खाली हुई थी। वह भी दो सीटों से चुनाव जीते थे और यह सीट छोड़ दी थी। उन्होंने अपने बेटे गुलाम नबी आजाद को उतारा है। उनके मुकाबले ममता बनर्जी की टीएमसी ने रबीउल आलम चौधरी को, ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने शेख सैफुद्दीन को, कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को, सीपीएम ने सैयद असद अली को और अब बीजेपी ने शाखारव सरकार को उतारा है।
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इन दो सीटों का उपचुनाव ममता बनर्जी के वजूद के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। चुनावी हार के बाद टूट चुकी TMC अगर इन दो सीटों पर जीत जाती है तो उसके काडर में जान आ सकती है। वहीं, फिर से हार मिलने पर हौसले पस्त भी हो सकते हैं। वहीं, शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी के लिए दोनों सीटें प्रतिष्ठा का विषय हैं। एक सीट तो खुद शुभेंदु के इस्तीफे के कारण ही खाली हुई है।
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