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CJP और कांग्रेस को जोड़ने वाली कड़ी या सबकी पसंद, आखिर क्या हैं नेहा बोरा?

CJP और कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच नेहा बोरा इकलौता ऐसा चेहरा हैं जो दोनों ही मंचों पर बराबर दिखती हैं। सोमवार को वह राहुल गांधी के आगे-आगे चलती दिखाई दी थीं। 

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ नेहा बोरा

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ नेहा बोरा, Photo Credit: Congress

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में विपक्षी दलों ने अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन किया। इसी तरह कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 और 11 अक्तूबर को प्रदर्शन किया। रोचक बात है कि ना तो कांग्रेस के नेता CJP के समर्थन में उतरे और ना ही कांग्रेस के मार्च में CJP का कोई प्रमुख नेता शामिल हुआ। इस सबके बीच नेहा बोरा इकलौता ऐसा चेहरा हैं जो दोनों तरफ ना सिर्फ दिख रही हैं बल्कि उन्हें मंचों पर भरपूर जगह भी दी जा रही है। ऐसे में वह लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। कुछ लोग उन्हें CJP और कांग्रेस के बीच की कड़ी मान रहे हैं। वहीं, कुछ का यह भी मानना है कि नेहा बोरा मौजूदा वक्त में भले CJP के साथ हों लेकिन आखिर में वह कांग्रेस के ही साथ आएंगी।

 

सोमवार को जब विपक्षी सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया तो नेहा बोरा ने सबका ध्यान खींचा। वही नेहा बोरा जिन्हें एक दिन पहले हिरासत में लिया जा रहा था, वह सड़कों पर दौड़ रही थीं और पुलिस से बचने के जतन कर रही थीं। इस बार पहले तो उन्हें उस बस में जगह मिली जिसमें विपक्षी सांसद थे। फिर वही नेहा बोरा प्रियंका गांधी के साथ पैदल चलती नजर आईं। राहुल गांधी यहां भी संदेश देने से नहीं चूके। उन्होंने बार-बार नेहा बोरा को आगे बढ़ाया और खुद उनके पीछे चलते रहे।

 

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बीच की कड़ी या सबकी पसंद?

CJP के आंदोलनों को आम आदमी पार्टी (AAP), सीपीआई और सीपीएम के अलावा कई अन्य दलों का समर्थन मिल रहा है। जंतर-मंतर पर पिछली बार हुए आंदोलन में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) समेत तमाम दलों के नेता CJP के मंच पर पहुंचे थे। हालांकि, कांग्रेस ने दूरी बनाई थी। तब भी नेहा बोरा जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रही थीं। भूख हड़ताल खत्म करने के बाद वह राहुल गांधी से भी मिली थीं। 25 जुलाई को राहुल गांधी ने नेहा बोरा और उनके साथियों के साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

 

इसी तरह CJP के कार्यक्रमों में भी वह लगातार नजर आ रही हैं। वह CJP के प्रवक्ताओं के साथ भी दिखती हैं और कांग्रेस के साथ भी दिखती हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी किसी भी कीमत पर नेहा बोरा को कांग्रेस के साथ रखना चाहते हैं। इसकी वजह है कि नेहा बोरा तेज तर्रा हैं, अच्छी वक्ता हैं, जुझारू हैं और बेहद मुखर भी हैं। इस बीच उन्होंने अपने तौर-तरीकों से हर किसी को हैरान किया है।

 

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CJP भी अब उनको अहमियत देने लगी है क्योंकि खुद उस पर भी आरोप लगे हैं कि उसके नेतृत्व में महिलाएं कम हैं। एक रत्ना सिंह को छोड़ दें तो CJP के शीर्ष नेताओं में दूसरी कोई महिला नहीं दिखती है। यही वजह है कि CJP अपने मंचों पर नेहा बोरा को भरपूर जगह देती है भले ही वह AISA की अध्यक्ष हैं।

कन्हैया कुमार की तरह नेहा बोरा को भी कांग्रेस में लाएंगे राहुल गांधी?

कन्हैया कुमार भी JNU के छात्र थे। वह एक और वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के टिकट पर चुनाव लड़कर छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। JNU से निकलने के बाद वह सीपीआई के टिकट पर बिहार की बेगूसराय की लोकसभा सीट से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़े थे। इस हार के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2024 में वह दिल्ली से लोकसभा का चुनाव लड़े और हार के बावजूद धीरे-धीरे कांग्रेस में उनका ओहदा बढ़ता गया।

 

अब ऐसा लग रहा है कि राहुल गांधी कन्हैया कुमार की तरह ही नेहा बोरा को भी कांग्रेस की ओर खींचने में जुटे हुए हैं। वह लगातार नेहा बोरा के साथ खड़े हो रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं। नेहा बोरा भी भरपूर आत्मविश्वास से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी से मिलती हैं। गांधी परिवार से उनकी केमिस्ट्री दिखाती है कि वह उनसे बेहद सहज हैं और आगे चलकर लेफ्ट का दामन छोड़कर कांग्रेस में भी आ सकती हैं।

 

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कौन हैं नेहा बोरा?

उत्तराखंड के खटीमा की मूल निवासी नेहा बोरा के पिता सेना में रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पढ़ीं नेहा बोरा इस समय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। वह लेफ्ट के छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 2024 से इस पद पर काबिज नेहा बोरा JNU के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन करने के चलते तिहाड़ जेल भी जा चुकी हैं। वह NEET पेपर लीक को लेकर हुए आंदोलन के समय भूख हड़ताल करने की वजह से भी चर्चा में रही हैं। इसके बाद से वह लगातार सक्रिय हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में हो रहे प्रदर्शनों में पहुंच रही हैं।  

 

नेहा बोरा की सक्रियता ने ना सिर्फ उन्हें एक जुझारू नेता के रूप में पेश किया है बल्कि वह प्रतिरोध के एक बड़े चेहरे के रूप में भी उभरी हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि वह लंबे समय तक इसी तरह दो धड़ों के बीच एक कड़ी बनी रहती हैं या फिर समय के साथ वह किसी एक ही नाव की सवारी करती दिखेंगी।

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