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फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज का नाम क्यों बदल रही असम सरकार?

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का कहना है कि राज्य के किसी भी शैक्षणिक संस्थान का नाम, व्यक्तिवादी नहीं है। स्थानीयता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है।

Himanta Biswa Sarma

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा। Photo Credit: PTI

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असम सरकार, फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने जा रही है। मंगलवार को राज्य सरकार ने एक कैबिनेट बैठक की, जिसके बाद अस्पताल का नाम बदलने पर मुहर लगी। अब अस्पताल का नाम बदलकर 'बारपेटा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने यह एलान किया है। 

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य के अधिकांश सरकारी मेडिकल कॉलेजों का नाम उन स्थानों के नाम पर रखा गया है जहां वे स्थित हैं। यह मेडिकल कॉलेज अपवाद था। स्थानीयता का ध्यान रखते हुए सरकार ने नाम बदलने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे कोई और मंशा नहीं है।

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हिमंत विश्व शर्मा, मुख्यमंत्री असम:-
हमारे सभी मेडिकल कॉलेजों का नाम उनके स्थानों के नाम पर रखा गया है। हम इसे गुवाहाटी, धुबरी, सिलचर, बोंगाईगांव, बिश्वनाथ और सोनितपुर के मेडिकल कॉलेजों में देखते हैं। किसी तरह, बरपेटा स्थित अस्पताल का नाम फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रख दिया गया, जो अन्य मेडिकल कॉलेजों के नामकरण के फॉर्मेट से मेल नहीं खाता है। मंत्रिमंडल ने भ्रम से बचने के लिए संस्थान का नाम बदलने का फैसला किया है।

क्यों बदल रहे हैं नाम?

हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, 'इसके नाम की वजह से कई लोग पूछते हैं कि क्या यह एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज है। इसीलिए आज मंत्रिमंडल ने इसका नाम बदलकर बारपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल करने का फैसला किया है।'

फखरुद्दीन अली अहमद से चिढ़ है क्या?

हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के सम्मान का सरकार ख्याल रखेगी। उनके नाम पर किसी अन्य संस्थान का नाम रखेगी। बस मेडिकल कॉलेज का नाम ही बदला जाएगा।

 

 



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नाम बदलने की कवायद क्यों?

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, अब हिंदुत्व की सियासत खुलकर करते हैं। राज्य में कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं। असम में अल्पसंख्यक आबादी 34 फीसदी के करीब है। एक तरफ जहां कांग्रेस और  ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) जैसी पार्टियां, अल्पसंख्यक वोटरों को लुभाने में लगी हैं, भारतीय जनता पार्टी का पूरा जोर हिंदुत्व पर है। नाम बदलने की कवायद को हिंदू ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

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फखरुद्दीन अली अहमद कौन थे?

फखरदुद्दीन अली अहमद, देश के 5वें राष्ट्रपति थे। साल 1974 से लेकर 1977 तक उन्होंने राष्ट्रपति के तौर पर देश का नेृत्व किया। वह भारतीय इतिहास के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति थे। वह देश के दिग्गज वकीलों में से एक थे। वह राजनीति में खासा सक्रिय रहे। वह केंद्र में कृषि और शिक्षा जैसे अहम मंत्रालयों को संभाल चुके थे। फखरदुद्दीन अली अहमद का कार्यकाल, भारतीय लोकतंत्र के विवादित अध्यायों में से एक है। साल 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर उन्होंने ही देश में आपातकाल की घोषणा के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उनका कार्यकाल के दौरान ही निधन हुआ था।


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