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20 दिन, एक एजेंडा, एक घेराबंदी, कांग्रेस का नया मिशन BJP के लिए आफत क्यों है?

कांग्रेस बूथ स्तर पर उतरकर भारतीय जनता पार्टी को चुनाव आयोग के मुद्दे पर घेरने वाली है। ऐसी तैयारी, कांग्रेस ने बीते एक दशक में नहीं की। पढ़ें रिपोर्ट।

Rahul Gandhi Protesting near Akashwani Buidling राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के सामने PTI Image

राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के सामने समर्थकों के साथ मौजूद। Photo Credit: PTI

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी, सड़कों पर उतर आई है। कांग्रेस के इशारे पर इंडिया गठबंधन की बड़ी पार्टियों ने जमीन पर उतरने का फैसला किया है। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ( ममता बनर्जी गुट) से लेकर बीजू जनता दल जैसी राजनीतिक पार्टियों के सांसद सड़कों पर हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं।

विपक्षी दलों का एक सुर में कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) की प्रक्रिया खत्म करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। 

विपक्ष के सांसदों का मानना है कि सत्तारूढ़ सरकार के इशारे पर ज्ञानेश कुमार, चुनावों में काम कर रह हैं, लोगों से वोट का अधिकार छीनकर बीजेपी के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्हें उनके सहयोगी चुनाव आयुक्त एसस संधू और विवेक जोशी ने 13 से ज्यादा सुझाव दिए लेकिन उन्हें अनसुना किया गया। आरोप यह भी हैं कि वह SIR को लेकर राज्य निर्वाचन आयोगों में गैर जरूरी दखल देते हैं।

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अब कांग्रेस किस एजेंडे पर कर रही है काम?

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने बताया है कि कांग्रेस अब 6 अक्तूबर से लेकर 26 नवंबर तक, अगले 20 दिनों की रूपरेखा तैयार कर चुकी है। कांग्रेस संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग तक मार्च निकालेगी, दिल्ली चलो आंदोलन शुरू करेगी और 'वोट बचाओ, देश बचाओ' की थीम पर कम करेगी। कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन पर दबाव बनाएगी। 

Priyanka Gandhi and Rahul Gandhi protesting ner Akashvani Building PTI
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर आकाशवाणी भवन के बाहर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी। Photo Credit: PTI

किस दिन क्या करने की तैयारी में है कांग्रेस?

  • 6 अक्टूबर: सुबह 11 बजे से सभी विपक्षी पार्टियों के सांसद पार्लियामेंट हाउस से निर्वाचन सदन तक मार्च 
  • 8 अक्टूबर: INDIA गठबंधन की सभी पार्टियां जिला स्तर पर वोट चोरी और CEC को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन
  • 10 से 20 अक्टूबर: ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस पार्टी वोट चोरी और CEC को हटाने की मांग को लेकर बाइक रैली, साइकिल रैली और पदयात्रा
  • 25 अक्टूबर से 25 नवंबर: कांग्रेस पार्टी राज्य, जिले और गांव स्तर पर 'वोट बचाओ-देश बचाओ' रैलियां
  • 1 नवंबर: रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की एक महारैली होगी, इसमें शामिल होने के लिए विपक्षी पार्टियों को न्योता
  • 25-26 नवंबर: 6 अलग-अलग राज्यों से 'दिल्ली चलो' यात्रा होगी और 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ दिल्ली में महाप्रदर्शन

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इस दौरान क्या करेगी कांग्रेस?

हर बूथ पर चुनाव आयोग की ओर से हटाए गए नामों को फिर से मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश अब कांग्रेस के कार्यकर्ता करेंगे। करीब 13 करोड़ नाम, अलग-अलग राज्यों के चुनाव आयोग से बाहर हुए हैं, जिन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए कांग्रेस कोशिश करती नजर आएगी। 

कांग्रेस की यह योजना, BJP के लिए आफत क्यों?

राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा:-
आज चुनाव आयोग तक निकाले गए विरोध मार्च में INDIA जनबंधन के सांसद शामिल थे। इस मार्च को निर्वाचन सदन के पास आकाशवाणी भवन के सामने रोक दिया गया। BJD के सांसद भी इसमें शामिल हुए। इसमें कोई संदेह नहीं कि अन्य विपक्षी दल भी नैतिक रूप से इस मार्च के साथ थे, और वे दल भी जो फिलहाल कुछ समय के लिए NDA का हिस्सा हैं। वोट चोरी हो या परिसीमन, PM-HM की जोड़ी के कुटिल मंसूबों को नाकाम करने के लिए विपक्ष की यह एकजुटता निश्चित रूप से कायम रहेगी। भारतीय झूठ पार्टी की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

BJP की कैसे बढ़ सकती है सियासी मुश्किल?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन का यह राष्ट्रव्यापी अभियान BJP और केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर एक सुनियोजित घेराबंदी तैयार करने वाला है। संसद से लेकर गांव, ब्लॉक और बूथ स्तर तक फैला यह कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की निष्पक्षता और कथित 'वोट चोरी' के सवाल को सीधे जनता की अदालत में ले जाने की रणनीति है।

साढ़े 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप के साथ घर-घर जाकर संपर्क साधना न केवल विपक्ष के कैडर को जमीनी स्तर पर सक्रिय करता है, बल्कि चुनावी मशीनरी पर जनता का संदेह बढ़ाकर 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह बड़ा सियासी खेल करने की कोशिश है। संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने की अफवाहें, बीजेपी के खिलाफ चली गईं थीं। अब विपक्ष की पूरी कोशिश है कि सत्तापक्ष की लोकतांत्रिक विश्वसनीयता और चुनावी जनादेश पर सीधा हमला किया जाए।

 

 



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Akhilesh Yadav
दिल्ली में कांग्रेस की अगुवाई में हुए विरोध प्रदर्शन में अखिलेश यादव शामिल हुए। Photo Credit: PTI

संसदीय विरोध से शुरू होकर जिला प्रदर्शन, बाइक-साइकिल रैलियों, रामलीला मैदान की महारैली और अंत में राज्यों से 'दिल्ली चलो' महाप्रदर्शन बीजेपी के लिए बूथ स्तर तक चुनौती की तरह है। लगातार 20 दिनों से लेकर महीने भर चलने वाला यह नैरेटिव मीडिया और सार्वजनिक संवाद बीजेपी के जमीनी अभियान को कमजोर कर सकता है।

सरकार अपनी उपलब्धियों को जमीनी स्तर पर पहुंचाने की कोशिश कर रही है, ठीक उसके उलट, बीजेपी सरकार के प्रति जनता को अविश्वास की राह कांग्रेस दिखा रही है। विपक्ष का रुख 'चुनावी पारदर्शिता' और 'वोट की सुरक्षा' जैसे बुनियादी लोकतांत्रिक मुद्दों पर है। ये जनहित के मुद्दे हैं, जिस पर लोग एकजुट हो रहे हैं। दिल्ली से लेकर बिहार तक में चुनाव आयोग के प्रति लोगों का संदेह गहरा रहा है। लगातार विरोध प्रदर्शन बीजेपी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।


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