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माओवाद-साम्यवाद से चिढ़ने वाली BJP ने CPC नेताओं का स्वागत क्यों किया?

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय का दौरा किया है। यह दौरा क्या है, क्या मकसद था, सब समझिए।

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BJP मुख्यालय में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के नेता। Photo Credit: BJP

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कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यालय का दौरा किया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हयान इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहीं थीं। भारतीय जनता पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने कहा है कि बैठक के दौरान बीजेपी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में एक दल ने बीजेपी और सीपीसी के बीच संवाद बढ़ाने को लेकर चर्चा की है।

भारत में चीन के राजदूत शु फीहोंग भी सीपीसी प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहे। बीजेपी के मुताबिक यह दौरा दोनों देशों के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच संचार और आपसी तालमेल बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टियों की धुर विरोधी पार्टियों में से एक रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस वामदलों के चीन के प्रति झुकाव की आलोचना बीजेपी करती है, फिर भी सीपीसी नेताओं का पार्टी मुख्यालय में स्वागत किया गया। 

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पहलगाम हमले में भारत के खिलाफ खड़ी थी CPC

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पाकिस्तान का साथ दिया था। CPC ने भारत की आलोचना की थी और पाकिस्तान के साथ नैतिक समर्थन दिया था। भारत और चीन के रिश्ते 2020 के गलवान झड़प के बाद से चार साल तक बहुत खराब रहे थे। 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर विवाद वाली जगहों से अपनी सेनाओं को हटाने के लिए डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया पर आगे बढ़ने का फैसला लिया। अब दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे हैं लेकिन CPC का रुख कभी भारत के समर्थन में नहीं रहा है। अलग बात है कि नए समझौतों के बाद दोनों देशों ने कई विश्वास बढ़ाने वाले कदम उठाए हैं। अब भारत और चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू हुआ है।

CPC की धुर आलोचक रही है बीजेपी

बीजेपी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति करती है। भारत में वामदलों को बीजेपी कम्युनिस्ट मार्क्सवाद-लेनिनवाद पर घेरती रही है, विदेशी विचारधारा से प्रेरित बताती है। बीजेपी कम्युनिस्टों को देश विरोधी, धर्म-विरोधी और चीन प्रभावित बताती रही है। वामदलों को हिंसक अतीत पर बीजेपी घेरती भी रही है। यह प्रतिनिधिमंडल चीन का है, इसलिए अब सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सीपीसी के सदस्य कांग्रेस या वाम दलों के साथ बैठक करते तो बीजेपी उन्हें विदेशी विचारधारा से प्रेरित बताकर घेरती। अतीत में ऐसा हो भी चुका है। 

कांग्रेस को इसी मुद्दे पर घेरती है बीजेपी

बीजेपी कांग्रेस पर 2008 के एक समझौते को लेकर हमला बोलती है। कांग्रेस और  चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के बीच बीजिंग में इसी साल एक समझौता हुआ था। सोनिया गांधी की मौजूदगी में राहुल गांधी ने हस्ताक्षर किए थे। तब शी जिनपिंग उपराष्ट्रपति थे। यह समझौता दोनों पार्टियों के बीच रणनीतिक संवाद के लिए था। दोनों दलों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए सहमति जताई थी। बीजेपी इसे चीन के हितों से जोड़कर कांग्रेस पर राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाती रही है।

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चीन से रिश्ते सुधारने की कवायद?

भारत और चीन, एक बार फिर से रिश्ते बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं। 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई, जिसमें करीब 750 भारतीय तीर्थयात्री गए। भारत ने चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट और बिजनेस वीजा फिर से जारी करना शुरू किया। चीन ने भारतीय कंपनियों को रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस देने शुरू किए। फिर भी, सीमा विवाद को लेकर कुछ परेशानियां बनी हुई हैं।2024 के अंत से अब तक सीमा मुद्दे पर दो स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव मीटिंग्स हो चुकी हैं।

दोनों देशों की नई पहल क्या है?

दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच कई दौर की मुलाकातें हो रहीं हैं। अगस्त 2025 में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली का दौरा किया था। उसी महीने के अंत में पीएम मोदी ने SCO समिट के लिए तियानजिन (चीन) का दौरा किया। पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2024 और 2025 में दो औपचारिक मुलाकातें कीं।

अमेरिका का विकल्प तलाश रहा भारत?

अब दोनों देशों के रिश्ते में थोड़ी गर्माहट दिख रही है। भारत-अमेरिका के रिश्ते अभी तनावपूर्ण हैं। अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 50 फीसदी  तक टैरिफ लगा दिया। चीन भी भारत से रिश्ते बेहतर करना चाहता है। 

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क्या BRICS समिट के लिए ऐसा हो रहा है?

2026 में BRICS समिट भी होने वाला है। नई दिल्ली में इस समिट का आयोजन होगा। इस बैठक में रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, मिस्र, UAE, ईरान और इंडोनेशिया के नेता शामिल होंगे।

 

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