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महारथी छोड़ रहे ममता का साथ, अब दूर हुए सुदीप बंद्योपाध्याय, TMC का क्या होगा?

संदीप सुदीप बंद्योपाध्याय ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वह NDA के साथ हैं।

Sudeep and Mamata Banerjee

सुदीप बंद्योपध्याय और ममता बनर्जी। Photo Credit: PTI

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, अपनों की बगावत का ऐसा दौर देख रही है, जिसमें वह कल्पना नहीं कर पा रहीं हैं कि अब कौन साथ छोड़ देगा। तृणमूल कांग्रेस ने जिस सुदीप बंद्योपाध्याय पर भरोसा जताया था, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में स्वीकार किया जाता था, उन्हीं ने झटका दे दिया है। कोलकाता उत्तर के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने इशारा कर दिया है कि वह अब ममता बनर्जी के साथ नहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने पार्टी नेताओं को बताया था कि वह पेट की समस्या के कारण कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन बाद में उन्हें दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर देखा गया।

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महुआ मोइत्रा, तृणमूल कांग्रेस:-
संदीप बंदोपध्याय का मास्क और विग दोनों उतर गया है। उन्होंने हमें बताया था कि पेट की खराबी की वजह से वह कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि अचानक हमने उन्हें दिल्ली में भूपेंद्र यादव के घर पर टीवी पर देखा। दादा, कम से कम अपना X हैंडल बदलकर @SudipBJPBTeam कर लीजिए। हमारे नाम का इस्तेमाल मत कीजिए।

'नकाब उतर गया है'

महुआ मोइत्रा ने कहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय का नकाब उतर गया है। सुदीप बंद्योपाध्याय के जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई है। कुणाल घोष ने भी सुदीप बंद्योपाध्याय पर हमला बोल उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने इन्हें पद और सम्मान दिया, लेकिन ये लोग पार्टी के साथ धोखा कर रहे हैं। कुणाल घोष ने कहा कि सुदीप बंद्योपाध्याय का पार्टी बदलने का पुराना इतिहास है।

 

 



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सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी निकले?

सुदीप बंद्योपाध्याय और विद्रोही सांसद शताब्दी रॉय ने शनिवार को दिल्ली में भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद टीएमसी ने सुदीप बंद्योपाध्याय को उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष पद से हटा दिया है और कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

सुदीप बंद्योपाध्याय के जाने से क्या होगा?

ममता बनर्जी अब और कमजोर पड़ने वाली हैं। उनकी पार्टी बिखर चुकी है। विधानसभा में अब 64 विधायक उनके खेमे से हट चुके हैं। उनके पास सिर्फ 18 विधायकों का समर्थन है। 64 विधायक, ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं। तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 अब अलग संसदीय दल बनाने के पक्ष में हैं। विद्रोही गुट सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अलग समूह के रूप में मान्यता मांग सकता है। यह दल, एनडीए का समर्थन करने वाला है। ऐसे में केंद्र में एनडीए और बीजेपी की ताकत और बढ़ सकती है, ममता बनर्जी के सामने उनका अपना गढ़ ही बिखरता नजर आ रहा है। वह न पार्टी बचा सकी हैं, न ही सत्ता। 

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