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3 जिले, 43 सीटें, ममता बनर्जी के 'SIR आंदोलन' का सीक्रेट जान लीजिए

तृणमूल कांग्रेस सरकार, चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के खिलाफ है। ममता बनर्जी खुद SIR के खिलाफ रैलियां करेंगी। क्या है मामला, आइए जानते हैं।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (Photo Credit: PTI)

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मालदा और मुर्शिदाबाद में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के खिलाफ रैली करेंगी। वह कूचबिहार में चुनाव आयोग के खिलाफ जनसभा भी करेंगी। तृणमूल कांग्रेस, SIR पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की योजना बना रही है। ममता बनर्जी पहले भी चुनाव आयोग का मुखर होकर विरोध कर चुकी हैं। उनका कहना है कि सरकार और चुनाव आयोग की मिलीभगत से पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्य और गरीब तबके का वोट काटा जा रहा है। 

ममता बनर्जी, अब दूसरी बार SIR के खिलाफ जमीन पर उतरकर प्रदर्शन करने वाली हैं। इससे पहले उन्होंने पिछले सप्ताह शरणार्थी बहुल मतुआ बाहुल इलाके बनगांव में रैली की थी। रैली के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों को डराने के लिए एसआईआर अभियान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। 

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क्यों प्रदर्शन कर रही है तृणमूल कांग्रेस?

तृणमूल ने यह अभियान, बीजेपी के 'घुसपैठियों का सफाया' अभियान के जवाब में शुरू किया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता मालदा में 3 दिसंबर और मुर्शिदाबाद में चार दिसंबर को रैली करेंगे। कूचबिहार में 9 दिसंबर को रैलियां आयोजित करेंगे।

मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार में ही क्यों जाएंगे ममता बनर्जी?

तीनों जिले अल्पसंख्यक बाहुल जिले हैं। यहां प्रवासी और विस्थापित आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की वजह से इन जिलों में एक तबके को ज्यादा मुश्किलों का समाना करना पड़ा है।  पश्चिम बंगाल के इन जिलों से कई बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) की खुदकुशी की खबरें सामने आईं हैं। अब इन्हें ही मुद्दा बनाकर ममता बनर्जी घेरने की कोशिश कर रहीं हैं।

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सियासी नजरिए से ममता के लिए फायदेमंद क्यों हैं ये जिले?

मालदा क्यों जाएंगी ममता बनर्जी?

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 2 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं। यहां यह आबादी निर्णायक स्थिति में है। एक अनुसूजित जनजाति के लिए भी आरक्षित सीट है। कुल 12 विधानभा सीटें हैं। 2 लोकसभा सीटें हैं। 4 सीटें बीजेपी के पास हैं, एक सीट कांग्रेस के पास और 7 सीटें टीएमसी के पास हैं। 12 विधायकों में 4 मुस्लिम विधायक हैं। मालदा उत्तर से बीजेपी के खगेन मुर्मू सांसद हैं, वहीं मालदा दक्षिण से कांग्रेस के इशा खान चौधरी सांसद हैं।

साल 2011 में हुई जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि मालदा की कुल आबादी करीब 3,988,845 है। इनमें कुल 51 फीसदी आबादी मुसलमान हैं। हिंदुओं की आबादी 47.99 फीसदी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, अल्पसंख्यक समीकरण साधने में कामयाब रही हैं। ऐसे में उनकी इस रैली को अल्पसंख्यक तुष्टीकरण से जोड़कर बीजेपी देख रही है। ममता अल्पसंख्यक वोटों में ही छेड़छाड़ की बात कह रहीं हैं, ऐसे में वह यहां मतदाताओं को रुझाने की पूरी कोशिश कर रहीं है। 

मुर्शिदाबाद क्यों जाएंगी ममता बनर्जी?

मुर्शिदाबाद भी अल्पसंख्यक बाहुल जिला है। यहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, उनकी आबादी 33.21 फीसदी है। मुस्लिम आबादी 66.27 फीसदी है। मालदा में 22 विधानसभा और 3 लोकसभा सीटें हैं। 22 में 14 विधायक अल्पसंख्यक तबके से आते हैं। यहां 20 सीटों पर टीएमसी को जीत मिली है। मुर्शिदाबाद के सभी तीन सांसद तृणमूल कांग्रेस के हैं। उत्तरी मुर्शिदाबाद में अप्रैल 2025 में हिंसा भड़की थी। मुर्शिदाबाद की 8 में से 7 नगरपालिकाओं और सभी 26 पंचायत समितियों में तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। यहां के अल्पसंख्यक ममता बनर्जी के कोर वोटर हैं, वह उन्हें SIR के बहाने एक बार फिर साधने की कोशिश कर रहीं हैं। 

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कूचबिहार में जाने की क्या रणनीति है?

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक कूचबिहार में हिंदुओं की आबादी करीब 74.06 फीसदी है, वहीं मुस्लिम आबादी 25.54 फीसदी है। मुस्लिम निर्णायक स्थिति में हैं। कूचबिहार में 3 लोकसभा सीटें हैं। कूचबिहार की 2 लोकसभा सीटों पर बीजेपी काबिज है, वहीं एक सीट पर टीएमसी है। यहां 9 विधानसभा सीटें हैं। सिर्फ दो सीटें टीएमसी के पास हैं, वहीं 7 सीटों पर बीजेपी है। ममता बनर्जी, यहां अपनी पार्टी को मजबूत करने और अल्पसंख्यक वोटरों को साधने के लिए उतर रहीं हैं। ममता बनर्जी 9 दिसंबर को कूचबिहार जा रही हैं। उनकी रैली 

बीजेपी ने कैसे जवाब दिया है?

बीजेपी का कहना है कि ममता बनर्जी, SIR से डर गईं हैं, अवैध बांग्लादेशियों को बचाने के लिए वह जमीन पर आंदोलन कर रहीं हैं। बीजेपी, अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए रैली कर रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों पार्टियां SIR पर अपने-अपने पक्षों को साधने में जुटीं हैं।


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