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हेमंत सोरेन के घर को लेकर झारखंड में बवाल क्यों मचा है? BJP और JMM भिड़ीं

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकार घर के मिर्माण के लिए सरकार ने अनुमानित लागत 68.91 करोड़ रुपये रखी है। इसी को लेकर बीजेपी सीएम को घेर रही है।

Hemant soren house cost

हेमंत सोरेन। Photo Credit (@HemantSorenJMM)

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भारत में नेताओं को सबसे ऊपर माना जाता है क्योंकि उनके पास पावर, पैसा और शहर के सबसे सुरक्षित और पॉश इलाके में आलिशान बंगला होता है। नेता जनता के बीच भले ही हमेशा सादे कुर्ते-पायजामें में जाते हैं लेकिन कुर्सी मिलते ही शानदार जिंदगी जीते हैं। दरअसल, देश में कई नेताओं के घरों की चर्चा होती है। इसमें आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। इस लिस्ट में और भी बड़े नेताओं के नाम हैं। मगर, इसी आलिशान सरकारी बंगलों में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम शामिल होने जा रहा है। 

 

दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में वर्तमान में सरकार चला रहे हैं। वह इससे पहले राज्य के दो बार और मुख्यमंत्री रह चुके हैं। झारखंड में एक नया विवाद शऊरू हो गया है। यह विवाद सीएम हेमंत सोरेन के प्रस्तावित सरकारी घर के निर्माण से जुड़ा है। इस घर के निर्माण में अनुमानित लागत 68.91 करोड़ रुपये आ रही है। घर को बनाने में आने वाली इसी अनुमानित लागत को लेकर झारखंड में राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। 

 

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने इसे फिजूलखर्ची बनाया है, जबकि सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे एक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बताकर इसका बचाव किया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद है क्या...

 

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कितना महंगा होगा घर? 

बीजेपी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का प्रस्तावित घर देश के सबसे महंगे घरों में से एक बन सकता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि सोरेन घर नहीं बल्कि 'शीश महल' बनवा रहे हैं। इस घर को बनाने की लागत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। इससे पहले बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल के सरकार घर को शीश महल कहकर संबोधित किया था, जिसने उनकी सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी।

 

दरअसल, झारखंड सरकार ने 25 मार्च को रांची के कांके रोड पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के घर के बनने के लिए कोटेशन मांगते हुए एक 'वेरी शॉर्ट-टर्म ई-क्वोटेशन इनविटेशन नोटिस' जारी किया। यानी की सरकार ने बहुत समय में ई-क्वाटेशन आमंत्रण सूचना जारी की। सरकार ने कहा है कि टेंडर 2 अप्रैल को वेबसाइट पर पब्लिश किया जाएगा, जिसके बाद 8 अप्रैल को प्री-बिड मीटिंग होगी। बिड जमा करने की आखिरी तारीख 29 अप्रैल है और बिड 30 अप्रैल को खोली जाएंगी।

 

टेंडर के मुताबिक,  सोरेन के घर के लिए निर्माण की अनुमानित लागत 69 करोड़ रुपये से थोड़ी ही कम है। बीजेपी के आदित्य साहू ने दावा किया है कि इस अनुमानित लागत में में घर की इंटीरियर और फर्निशिंग शामिल नहीं है, ऐसे में इसकी फाइनल लागत काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।

सरकार के टेंडर में क्या है?

जारी किए गए सरकार टेंडर दस्तावेजों में प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 68.91 करोड़ रुपये बताई गई है। इस लागत में जीएसटी कंसल्टेंसी और कानूनी चार्ज शामिल हैं। घर की मुख्य बिल्डिंग के निर्माण पर 47.80 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें बेसमेंट के अलावा ग्राउंड और ऊपर एक फ्लोर शामिल है।  घर में बिजली के काम के लिए 1.29 करोड़, सैनिटेशन और प्लंबिंग के लिए 1.01 करोड़, फायर-फाइटिंग सिस्टम के लिए 1.08 करोड़, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम के लिए 1.30 करोड़ और लिफ्ट के लिए 58.88 लाख शामिल हैं।

 

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घर के मुख्य स्ट्रक्चर के अलावा, इस एस्टीमेट में बड़े पैमाने पर पूरे एरिया का विकास और सहायक आधारभूत संरचना शामिल है। इसमें एक 1.99 करोड़ रुपये का फव्वारा, भूनिर्माण और बागवानी के लिए 2.63 करोड़ रुपये, बाउंड्री वॉल और मेन गेट, पार्किंग की सुविधा, एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज, साथ ही बाहरी इलेक्ट्रिफिकेशन और सर्विलांस सिस्टम। इन सभी कामों को मिलाकर बेस प्रोजेक्ट लागत 56.81 करोड़ हो जाती है, जो जीएसटी के बाद 67 करोड़ से ज़्यादा हो रही है। साथ ही अचानक पड़ी जरूरत, लेबर सेस और कंसल्टेंसी फीस जैसे खर्च के साथ में 68.91 करोड़ हो रही है।

देश के सबसे महंगे घरों में से एक होगा- बीजेपी 

बीजेपी का कहना है कि वह पिछले एक साल से ज्यादा समय से इस प्रस्तावित घर के मुद्दे को उठा रही है। पार्टी का कहना है कि जब कैबिनेट ने 2 करोड़ रुपये के फाउंटेन और 2.5 करोड़ रुपये के गार्डन जैसे प्रावधानों को मंजूरी दी थी। अब जब टेंडर हो गया है तो यह साफ है कि यह राज्य में एक बड़ा मुद्दा है। बीजेपी ने कहा कि 67 करोड़ रुपये का एस्टीमेट सिर्फ बेस कॉस्ट है। साथ ही पार्टी का कहना है कि इंटीरियर और फर्निशिंग को जोड़ने के बाद कुल कॉस्ट आसानी से 100 करोड़ रुपये को पार कर जाएगी।

 

बीजेपी दावा कर रही है कि प्रस्तावित घर देश के सबसे महंगे घरों में से एक होगा। साथ ही कहा है कि झारखंड जैसे गरीब राज्य के लिए यह पैसे बहुत ज्यादा हैं। पार्टी ने राज्य की कल्याणकारी योजनाओं ने तुलना करते हुए कहा है कि एक ऐसे राज्य में जहां सरकार कहती है कि उसके पास बेघरों को पक्के घर देने और स्कॉलरशिप जैसी स्कीमों के लिए फंड नहीं है, मुख्यमंत्री के घर पर इतनी रकम खर्च करना बिल्कुल गलत है।

'भविष्य का CM भी ऑफिस इस्तेमाल करेगा'

हालांकि, सत्ताधारी जेएमएम ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए इस प्रोजेक्ट को सरकार का एक रूटीन बुनियादी ढांचा पहल बताया है। पार्टी ने कहा है कि प्रस्तावित घर किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के मुख्यमंत्री के ऑफिस के लिए है। जेएमएम ने कहा है कि यह एक सरकारी परियोजना है जिसका मकसद आधारभूत संरचना को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री का घर किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं है। भविष्य में जो भी मुख्यमंत्री ऑफिस संभालेगा, वह इस घर का इस्तेमाल करेगा।


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