बीते कुछ महीनों में जिस तरह से राजनीतिक दलों में टूट हुई है, उससे कई पार्टियां अलर्ट हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवेसना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के लोकसभा सांसदों के टूटने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) को लेकर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि NCP (SP) के 8 में से 5-6 सांसद ऐसे हैं जो पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए खुद शरद पवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। रोचक बात है कि इन विकल्पों में कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) चारों शामिल हैं। अलग-अलग नेताओं की राय अलग है लेकिन ज्यादातर सांसद सत्ता पक्ष के साथ जाना चाहते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में NCP (SP) के कुल 8 लोकसभा सांसद जीते थे। इन 8 में एक तो खुद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले हैं। हाल ही में खबरें आईं कि कुछ सांसद टूट सकते हैं तो शरद पवार और सुप्रिया सुले दोनों ने ही इससे इनकार किया लेकिन अब खबरें हैं कि दोनों ही नेता अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग पार्टी के नेताओं से बात कर रहे हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं कि शरद पवार के सामने मौजूद विकल्प क्या-क्या हैं?
कांग्रेस में विलय?
कांग्रेस से निकलकर अपनी पार्टी बनाने वाले शरद पवार के बारे में कहा जा रहा है कि वह खुद तो कांग्रेस के साथ ही रहना चाहते हैं। इस स्थिति में पार्टी का कांग्रेस में विलय करके सुप्रिया सुले और कुछ अन्य नेताओं के लिए महाराष्ट्र से दिल्ली तक बड़े पद मांगे जा सकते हैं। कहा जा रहा है कि इसको लेकर खुद शरद पवार कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं। यह भी चर्चा है कि शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसा पद चाहते हैं और महाराष्ट्र का प्रदेश अध्यक्ष भी अपने खेमे का बनाना चाहते हैं। हालांकि, इसी को लेकर कांग्रेस सहमत नहीं है।
यह भी पढ़ें: पुराने तेवर के साथ 'राम रक्षा आंदोलन' कर रहे उद्धव, मिलेगी खोई सियासी जमीन?
अगर ऐसा होता है तो 8 में 5 या 6 सांसद दो तिहाई के आधार पर किसी भी दूसरे दल में नहीं जा पाएंगे। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि कुछ नेता कांग्रेस के साथ जाने में सहज नहीं हैं और शरद पवार के ऐसा करने की कोशिश करते ही वे पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि शरद पवार खुलेआम ऐसी कोशिश नहीं कर रहे हैं और पर्दे के पीछे से ही विकल्पों को तलाश रहे हैं।
NDA का समर्थन
दूसरा प्लान है कि सारे सांसद NCP (SP) में ही बने रहें और इंडिया गठबंधन के बजाय सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) का हिस्सा हो जाएं। इस स्थिति में सुप्रिया सुले के लिए केंद्र में मंत्री पद के साथ-साथ राज्य की सरकार में भी हिस्सेदारी मांगी जा सकती है। हालांकि, वैचारिक रूप शरद पवार एनडीए के साथ नहीं दिखते इसलिए इस पर भी एकमत नहीं है। कहा जा रहा है कि कई सांसद इस विकल्प के पक्ष में हैं ताकि उन पर बागी होने का ठप्पा भी न लगे और वे शरद पवार के नेतृत्व में ही आगे भी काम करते रहें।
यह भी पढ़ें: BJP के कोर वोटबैंक पर AAP, कांग्रेस की नजर? समझिए पंजाब में कितने अहम हैं हिंदू
BJP, NCP और शिवसेना भी डाल रहीं डोरे
शिवसेना ने जब से शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों को तोड़ा है तब से ही महाराष्ट्र बीजेपी और खुद देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ एनसीपी यानी सुनेत्रा पवार की पार्टी के भी कान खड़े हो गए हैं। अब सभी दलों में खुद को मजबूत दिखाने की होड़ लग गई है। एनसीपी (शरद पवार) के कई सांसद व्यक्तिगत स्तर पर शिवेसना, बीजेपी और एनसीपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस स्थिति में सांसदों को कम से कम दो तिहाई यानी 5 से 6 सांसद एकसाथ लाने होंगे जो कि फिलहाल इतना आसान नहीं लग रहा है।
हां, इतना जरूर है कि AAP, TMC और शिवसेना (UBT) का हश्र देखने के बाद शरद पवार के कैंप में खलबली जरूर मची हुई है। शरद पवार के बारे में कहा जा रहा है कि वह कांग्रेस के साथ ही जाना चाहते हैं लेकिन अपनी और अपनी बेटी सुप्रिया सुले की भूमिका को और दमदार बनाने के लिए बाकी दलों से भी बात कर रहे हैं ताकि इसका दबाव कांग्रेस पर पड़े और वह उन्हें और अहमियत दे। यह भी चर्चा है कि अगर शिवसेना में 6 सांसदों के शामिल होने और TMC में टूट को स्पीकर की मंजूरी मिल जाती है तब एनसीपी (शरद पवार) के सांसद भी इसी दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।