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पश्चिमी यूपी में इतने आक्रामक बयान क्यों दे रहे हैं योगी आदित्यनाथ?

सीएम योगी लगातार गाय, नमाज, गंगा, पाकिस्तान और मौलाना को लेकर बयान दे रहे हैं। योगी अपनी आक्रामक भाषा से जनता को लुभा रहे हैं।

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सीएम योगी आदित्यनाथ।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिमी यूपी को लेकर सियासी रूप से सक्रिय हो गए हैं। वह पिछले दिनों बिजनौर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन मुद्दों पर बात की, जो राज्य की सियासत पर वर्तमान में असर डाल रहे हैं। सीएम ने इस रैली में गाजियाबाद जिले के खोड़ा में हुए सूर्या चौहान हत्याकांड से लेकर नमाज और गाय पर बात की। इसी दौरान सीएम योगी सूर्या चौहान और उसके हत्यारे असद से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

सीएम यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि नालायक औलादों को सबक सीखना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सामने खर-दूषण हो तो शस्त्र उठाना होगा। इसी दौरान उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर बयान देने वाले मौलवियों और मौलानाओं पर तीखा निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि माता है और माता तथा पुत्र के बीच के रिश्ते को किसी सरकारी घोषणा की जरूरत नहीं होती। 

किन मुद्दों को उठा रहे मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ मौलाना लगातार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि गाय हमारे लिए पशु नहीं है। गाय हमारी माता है। साथ ही उन्होंने कहा कि माता और बेटे के बीच के रिश्ते को कभी घोषित नहीं किया जाता। यह संबंध आस्था, संस्कार और श्रद्धा से जुड़ा होता है।

 

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उन्होंने गंगा, पाकिस्तान और मौलाना को लेकर भी बात की। कुल मिलाकर इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ की भाषा आक्रामक रही। ऐसे में चर्चा होने लगी है कि आखिर सीएम योगी पश्चिमी यूपी में बोरोजगारी और महंगाई की बात छोड़कर ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं? आइए जानते हैं पश्चिमी यूपी में योगी आदित्यनाथ इतने आक्रामक बयान क्यों दे रहे हैं...

2027 में यूपी के विधानसभा चुनाव

दरअसल, अगले साल 2027 में यूपी के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव होने में अब कुछ ही महीने शेष बचे हैं। ऐसे में बंद कमरे में रणनीति बनाने के साथ ही बड़े नेता जनता के बीच जाकर अपना एजेंडा सेट कर रहे हैं, जिससे कि लोगों को प्रभावित किया जा सके। सीएम योगी भी यही कर रहे हैं। वह अपने एजेंडे गाय, पाकिस्तान, नमाज और मौलवी पर बहस लाकर विरोधियों के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। चुनावी लिहाज से पश्चिमी यूपी काफी अहम इलाका है।

पश्चिमी यूपी का माजरा

पश्चिमी यूपी में विधानसभा की कुल 136 विधानसभा सीटें हैं। पिछले 2022 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 93 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी गठबंधन ने 43 सीटें ही जीतीं। इस इलाके में कुछ जिले मुस्लिम बाहुल्य हैं, अगर सपा ओबीसी और दलित जातियों को एकजुट कर ले जाती है तो यह बीजेपी और सीएम योगी के लिए खतरे की घंटी बजा सकती है। ऐसे में योगी चुनाव से पहले ही पश्चिमी यूपी में हिंदू-मुस्लिम के बीच डिबेट लाकर बीजेपी के पक्ष में माहौल सेट कर रहे हैं।

 

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पश्चिमी यूपी के प्रमुख जिले

पश्चिमी यूपी के प्रमुख जिलों में सहारनपुर मंडल, मेरठ मंडल, मुरादाबाद मंडल, बरेली मंडल, अलीगढ़ मंडल और आगरा मंडल आते हैं। इन मंडलों में कई जिले आते हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव से ही पीडीए का नारा बुलंद कर रहे हैं। इसी नारे के दम पर वह बीते लोकसभा चुनाव में अपना दमखम दिखा चुके हैं। अब अगर, सपा 2027 में पीडीए को भुना ले जाएगी तो यूपी में बड़ा उलटफेर हो सकती है।

 

पिछले चुनाव में सपा-रालोद का गठबंधन था। गठबंधन ने जाट-मुस्लिम प्रभाव वाले जिलों, खासकर मुजफ्फरनगर, शामली और बागपत बेल्ट में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार रालोद बीजेपी के साथ आ गई है, तो इस बार समीकरण सपा के खिलाफ भी जा सकते हैं। हालांकि, पश्चिमी यूपी में 2022 में बीजेपी सबसे मजबूत दल के तौर पर उभरी थी। बीजेपी ने जाट, गैर-यादव ओबीसी और शहरी वोट के दम पर बढ़त बनाए रखी। अब 2027 में भी सीएम योगी इसी गठजोर के बल पर सपा पर हावी रहना चाहते हैं। 


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