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तेलंगाना बनेगा कर्नाटक? आंकड़ों से समझिए कैसे पैर पसार रही बीजेपी?

तेलंगाना में साल 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी अभी से चुनाव के लिए तौयारियों में जुट गई है क्योंकि उसे यहां सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति का भी सामना करना है।

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तेलंगाना में नितिन नवीन। Photo Credit (@NitinNabin)

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पिछले महीनें 28 जून से 30 जून तक तेलंगाना के तीन दिवसीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने राज्य के नेताओं और पदाधिकारियों संग संगठनात्मक बैठकें कीं। साथ ही उन्होंने एक रैली को भी संबोधित किया। नितिन नवीन के इस दौरे का मकसद तेलंगाना में बीजेपी के संगठन को पहले से मजबूत करना था। दरअसल, बीजेपी की नजर आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों पर है, जिसको लेकर पार्टी अपनी तैयारियों को धार दे रही है।

 

बीजेपी अध्यक्ष ने हैदराबाद और अन्य जगहों पर पार्टी नेताओं, जिला पदाधिकारियों, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, छात्रों और आदिवासी समुदाय के नेताओं से मुलाकात की। नवीन के इस दौरे का अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि केवल कांग्रेस सरकार की आलोचना करना काफी नहीं है, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना होगा ताकि तेलंगाना में बीजेपी सत्ता पर विराजमान हो सके।

 

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तेलंगाना राजनीतिक-आर्थिक महत्व

तेलंगाना राजनीतिक लिहाज से दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। 119 सदस्यीय राज्य में 17 लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा तेलंगाना की अर्थव्यवस्था 3,24,234 करोड़ रुपये है। यही वजह है कि बीजेपी कर्नाटक में सत्ता का सुख भोगने के बाद तेलंगाना में भी कमल खिलाना चाहती है। कर्नाटक के अलावा बीजेपी की किसी भी राज्य में कभी सरकार नहीं रही। केरल और तमिलनाडु में पार्टी दशकों से सरकार बनाने के लिए मेहनत कर रही है लेकिन उसे सफलता कभी नहीं मिली।

तेलंगाना भारत का सबसे नया राज्य 

हालांकि, बीजेपी आंध्र प्रदेश में अपने सहयोगी टीडीपी के साथ सरकार में भागीदार है। तेलंगाना भारत का सबसे नया राज्य है। इसका गठन 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किया था। राज्य के गठन के बाद यहां यह रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। इससे पहले लगातार 10 साल तक तेलंगाना राष्ट्र समिति की सरकार रही। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने के चंद्रशेखर राव की सरकार को हरा दिया था। अब कांग्रेस सत्ता पर काबिज है लेकिन अब बीजेपी भी तेलंगाना की गद्दी पर बैठने के लिए मेहनत कर रही है।

तेलंगाना में पिछले 15 साल का प्रदर्शन

मगर, भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना में पिछले 15 साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उसने यहां काफी तरक्की की है। या यूं कहें कि तेलंगाना राज्य के गठन के समय से ही बीजेपी यहां थोड़ी बहुत मजबूत थी। 2014 के सबसे पहले विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी ने के लक्ष्मण के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में बीजेपी को 7.10 फीसदी वोट मिले थे, जिसकी बदौलत उसके 5 विधायक जीतने में कामयाब रहे थे। 

 

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बीजेपी का 2018 में प्रदर्शन

इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन पिछले बार के मुकाबले कम रहा। पार्टी को महज 6.98 फीसदी वोट ही मिले। उसका मात्र एक विधायक ही जीतकर विधानसभा पहुंचा। इस हार से सबक लेते हुए बीजेपी ने तेलंगाना में सबसे पहले अपने संगठन को मजबूती देना शुरू किया, ताकि राज्य में उसकी विचारधारा को फैलाया जा सके। पिछले दिनों नितिन नवीन का दौरा भी इसी संगठन को मजबूत करने के लिए था।

बीजेपी ने 2023 में अपनी जमीन तैयार की

मजबूत संगठन के साथ में बीजेपी ने 2023 का विधानसभा चुनाव केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी के नेतृत्व में लड़ा। इस चुनाव में बीजेपी से अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस बार भगवा पार्टी का वोट शेयर बढ़कर पिछली बार से डबल हो गया और उसे 13.90 फीसदी वोट मिले। संख्या में बात करें तो बीजेपी को 2018 में कुल 1,450,456 वोट पड़े थे। मगर, 2023 में उसे 3,257,528 लोगों ने वोट किया। इसी की बदौलत बीजेपी को राज्य में 8 सीटें मिली, जिसकी वजह से विधानसभा में उसको मजबूती मिली। 

 

अब तेलंगाना में साल 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी अभी से चुनाव के लिए तौयारियों में जुट गई है क्योंकि उसे यहां सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति का भी सामना करना है।


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