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महिलाओं के दूसरी शादी करने पर क्या कहती है मनुस्मृति? जान लीजिए

मनुस्मृति के हिसाब से महिलाओं को अपने जीवन में पतिव्रता धर्म अपनाना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार महिलाओं का दूसरी बार शादी करना सही है या नहीं। धर्म ग्रंथों के आधार पर जानिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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आज के दौर में कई लोगों का वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहता और वे शादी के सात वचन निभा नहीं पाते हैं। जब पति-पत्नी के विचार नहीं मिलते और हर बात पर बहस होने लगती है तो ऐसी स्थिति में लोग तलाक ले लेते हैं। इसके बाद व्यक्ति दूसरी शादी कर लेता है। इसके बजाय हिन्दू धर्म ग्रंथ मनुस्मृति में बताया गया है कि पत्नियों को जीवनभर पतिव्रता धर्म अपनाना चाहिए। ऐसे में लोगों को जानना चाहिए कि हिन्दू धर्मशास्त्रों के हिसाब से दूसरी शादी करनी चाहिए या नहीं।

 

हिन्दू धर्म में बताया गया है कि जो महिलाएं एक पतिव्रत धर्म निभा रही हैं, वे धर्म का पालन कर रही हैं। लेकिन कई परिस्थितियों में महिलाओं को दूसरी शादी करनी पड़ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो व्यक्ति बार-बार शादी करता है, क्या वह अधर्म के मार्ग पर चल रहा है? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि दूसरी शादी को लेकर धर्म ग्रंथों में क्या बताया गया है। इन सवालों के जवाब धर्म ग्रंथों में मिलते हैं।

 

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दूसरी शादी करना वाजिब है या नहीं?

हिन्दू धर्म ग्रंथों में एक पतिव्रत और पत्निव्रत को ही श्रेष्ठ माना गया है। इसका अर्थ है कि एक पुरुष को जीवनभर एक ही महिला को पत्नी का दर्जा देना चाहिए। इसी प्रकार महिलाओं को भी अपने पति का साथ देना चाहिए। इसके साथ ही मनुस्मृति में दूसरी शादी को गलत माना गया है।

 

इसके साथ ही कुछ धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि जब किसी महिला के पति का निधन हो जाए तो महिला को विधवा के रूप में दुखी और नीरस जीवन नहीं जीना चाहिए। इसी सिलसिले में ऋग्वेद में बताया गया है कि जब पति की मृत्यु हो जाए तो पत्नी को हमेशा दुखी नहीं रहना चाहिए, बल्कि संसार की ओर लौट जाना चाहिए।

 

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उदीर्ष्व नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुप शेष एहि।  
हस्तग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सम्बभूथ॥

 

इस श्लोक का अर्थ है कि हे स्त्री, संसार की ओर लौट जाओ। जिस पति के पास तुम बैठी हो, वह मृत है। जिसने तुम्हारा हाथ थामा था, वह जा चुका है। तुम दोनों का रिश्ता अब समाप्त हो गया।

कुछ परिस्थितियों में दूसरी शादी वाजिब

हिन्दू धर्म ग्रंथ पाराशर स्मृति में बताया गया है कि कुछ खास परिस्थितियों में महिलाएं दूसरी शादी कर सकती हैं। पाराशर स्मृति के अनुसार, जब पति लापता हो, पति की मृत्यु हो जाए, पति संन्यासी हो जाए या कुछ अन्य विशेष परिस्थितियां उत्पन्न हों, तो इन परिस्थितियों में महिलाओं को दूसरा विवाह करने की अनुमति बताई गई है।

 

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नष्टे मृते प्रव्रजिते क्लीबे च पतिते पतौ।  
पञ्चस्वापत्सु नारीणां पतिरन्यो विधीयते॥

 

इस श्लोक का अर्थ है- जब पति के लापता होने, मरने, संन्यासी हो जाने या अन्य विपत्तियों की स्थिति हो, तो इन परिस्थितियों में स्त्री के लिए दूसरे पति का विधान बताया गया है। इस श्लोक से यह समझा जा सकता है कि कुछ खास परिस्थितियों में महिलाओं के दूसरी शादी करने का सही है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और धर्म ग्रंथों में वर्णित बातों पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

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