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भोलेनाथ के कितने रूपों की होती है पूजा? जानिए अवतारों से जुड़ी खास बातें

भगवान शिव के प्रमुख 19 अवतार माने जाते हैं, जिनमें हनुमान और अश्वत्थामा प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, वे पशुपतिनाथ और ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूरे विश्व में पूजे जाते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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शिव पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार, शिव के अवतारों का उद्देश्य संसार में धर्म की स्थापना और अनुशासन बनाए रखना रहा है। शिव के अवतारों का उद्देश्य केवल धर्म की स्थापना करना ही नहीं बल्कि सृष्टि के संतुलन को बनाए रखना और भक्तों को खास  जीवन दर्शन सिखाना भी रहा है। भगवान शिव अनंत हैं, इसलिए उनके रूपों की गणना करना कठिन है लेकिन मुख्य रूप से उनके 19 अवतारों और 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा सबसे अधिक प्रचलित है।

 

इन रूपों में शिव का सौम्य और रौद्र दोनों ही स्वरूप देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, 'पशुपतिनाथ' रूप उनके समस्त जीवों के रक्षक होने का प्रतीक है, तो 'भैरव' रूप उनके न्यायप्रिय और विनाशक पक्ष को दर्शाता है। भक्त अपनी मनोकामना और आध्यात्मिक मार्ग के अनुसार इन अलग-अलग रूपों की उपासना करते हैं।

 

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मुख्य स्वरूप

पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर शिव पुराण के अनुसार, शिव ने समय-समय पर विभिन्न अवतार लिए। शिव की पूजा केवल उनके मानवीय स्वरूप में ही नहीं होती, बल्कि लिंग (निराकार ब्रह्म) और रुद्र (उग्र स्वरूप) के रूप में भी की जाती है। 

पशुपतिनाथ

यह शिव का सबसे कल्याणकारी रूप माना जाता है। 'पशु' का अर्थ है जीव और 'पति' का अर्थ है स्वामी। नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यह रूप सिखाता है कि मनुष्य को अपने भीतर के 'पशुत्व' (अज्ञान, क्रोध) को त्याग कर शिव की शरण लेनी चाहिए।

मुख्य अवतार

हनुमान: इन्हें शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है।

अश्वत्थामा: गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र, जो शिव के अंश से उत्पन्न हुए।

वीरभद्र: सती के आत्मदाह के बाद शिव के क्रोध से उत्पन्न महाशक्तिशाली अवतार।

पिप्पलाद: शनि देव के प्रकोप से मानव जाति को बचाने वाले अवतार।

शरभ: भगवान नृसिंह के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने यह पक्षी-रूपी अवतार लिया था।

काल भैरव

इन्हें शिव का 'भयानक' रूप माना जाता है। ये समय के अधिपति हैं और काशी के कोतवाल कहे जाते हैं।

खास बात: अहंकार को नष्ट करने और न्याय के लिए इनकी पूजा की जाती है।

अर्धनारीश्वर 

आधा शरीर शिव (पुरुष) और आधा शरीर शक्ति (स्त्री) का।

महत्व: यह रूप दर्शाता है कि सृष्टि में पुरुष और प्रकृति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।

 

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नटराज

नृत्य की मुद्रा में शिव।

खास बात: इनका 'तांडव' सृजन और विनाश के चक्र को दर्शाता है। यह रूप कलाकारों और संगीतज्ञों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

12 ज्योतिर्लिंग

  • गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर
  • आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन
  • मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर
  • उत्तराखंड में केदारनाथ
  • महाराष्ट्र में भीमशंकर, त्रयंबकेश्वर और घृष्णेश्वर
  • उत्तर प्रदेश में विश्वनाथ
  • झारखंड में वैद्यनाथ
  • तमिलनाडु में रामेश्वरम

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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