इस्लाम धर्म में ईद-ए-मिलाद नबी बेहद खास त्योहार माना जाता है। इस दिन पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ था। इस दिन को मुस्लिम धर्म में बेहद पाक माना जाता है। इसी वजह से ईद-ए-मिलाद का त्योहार मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रबीउल अव्वल महीने की 12वीं तारीख को मोहम्मद पैगंबर का जन्म हुआ था। इसी वजह से लाखों लोग रोजा रखकर त्योहार मनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोग रोजा रखने के बजाय अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर जश्न मनाते हैं।
इस साल ईद-ए-मिलाद नबी अगस्त महीने में ही मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 2026 में 26 अगस्त के दिन ईद-ए-मिलाद नबी का त्योहार मनाया जाएगा। मान्यता के अनुसार, इसी दिन मोहम्मद पैगंबर का जन्म हुआ था। इसके लगभग 62 साल बाद मोहम्मद जी का वफात यानी निधन हुआ था। इसी वजह से इस त्योहार को लेकर लोगों की अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं। इस त्योहार को लेकर लोगों की दो अलग-अलग मान्यताएं हैं। जहां एक तरफ कई लोग पैगंबर के जन्म की खुशी मनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई लोग खुशी के बजाय पैगंबर मोहम्मद के दुनिया छोड़ने का शोक मनाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ईद-ए-मिलाद के दिन रोजा रखना वाजिब है या नहीं।
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ईद-ए-मिलाद नबी का अर्थ
ईद-ए-मिलाद नबी शब्द के तीन अर्थ हैं। इस लफ्ज का पहला शब्द 'ईद' है, जिसका अर्थ खुशी या जन्म है। दूसरे शब्द 'मिलाद' का अर्थ जन्म है और तीसरे शब्द 'नबी' का अर्थ मोहम्मद पैगंबर है। इससे साफ होता है कि ईद-ए-मिलाद का संबंध पैगंबर मोहम्मद के जन्म से है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहम्मद पैगंबर का जन्म उस दौरान हुआ था, जब समाज में अन्याय चरम पर था। उनका जन्म 570 ईसवी में सऊदी अरब के मक्का में हुआ था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोहम्मद पैगंबर के प्रभावी विचारों से लोग प्रभावित हुए थे, जिस कारण समाज में शांति, भाईचारे और मानवता फैली थी।
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रोजा रखें या न रखें?
इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रोजा रखा जा सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि सभी लोगों को रोजा रखना ही चाहिए। इसलिए जिन लोगों की रोजा रखने की इच्छा है, वे रोजा रख सकते हैं। रोजा रखने के साथ लोगों को कुछ बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन लोगों को अपने मन की बुराई को खत्म करना चाहिए। अपने घर की महिलाओं की कद्र करनी चाहिए। साथ ही दूसरों को अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। अब सवाल उठता है कि इस पर्व को कैसे मनाएं।
कैसे मनाएं पर्व?
इस त्योहार में सभी पुरुषों को मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़नी चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी हो, उन्हें जरूरतमंद लोगों की आर्थिक सहायता करनी चाहिए और गरीब लोगों को खाना खिलाना चाहिए। इस दिन लोगों को अपने परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को गिफ्ट देकर खुशियां मनानी चाहिए।
नोट: यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।