एक त्योहार, कई अंदाज, देश के अलग-अलग राज्यों में होली की खास परंपराएं
होली एक बड़ा त्योहार है, जिसे देशभर में खुशी और जश्न के साथ मिलकर मनाया जाता है। होली पूरे देश में भले ही मनाई जाती है, लेकिन इसे मनाने का तरीका हर राज्य में अलग होता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर,Photo Credit- Sora
भारत त्योहारों का देश है, जहां हर पर्व केवल एक उत्सव नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और भावनाओं का संगम है। इन्हीं त्योहारों में होली एक ऐसा पर्व है जो रंग और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। यह सिर्फ रंगों से खेलने का दिन नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, एकता का प्रतीक है।होली के दिन लोग एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं। होली पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन इस पर्व को मनाने का तरीका और पर्व का नाम हर राज्य में अलग होता है। बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक अलग-अलग अंदाज में होली मनाई जाती है।
होली पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है लेकिन हर राज्य में इसे मनाने का तरीका, परंपराएं और रस्में अलग-अलग हैं। कहीं फूलों से होली खेली जाती है, तो कहीं लट्ठमार अंदाज में, कहीं भजन-कीर्तन होते हैं, तो कहीं लोक गीत और विशेष रीति-रिवाजों के साथ यह पर्व मनाया जाता है। जैसे बिहार में होली को फगुआ कहा जाता है और वहां अलग अंदाज में होली मनाई जाती है। इसी प्रकार देश के अलग-अलग राज्यों में अलग तरीके और परंपराओं से होली मनाई जाती है। हालांकि त्योहार मनाने का भाव एक ही होता है, सिर्फ मनाने का तरीका अलग होता है। अब सवाल उठता है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में किस तरह होली मनाई जाती है
यह भी पढ़ें: जिस माउंट आबू को पर्यटन के लिए जानते हैं लोग, उसका पौराणिक महत्व पता है?
बंगाल की डोल जात्रा
पश्चिम बंगाल में होली को डोल जात्रा के रूप में मनाया जाता है। डोल यात्रा में लोग भगवान श्रीकृष्ण और राधा की प्रतिमाओं को सजाते हैं, जिसके बाद उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही राधा-श्याम भगवान को कई प्रकार की मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं। फिर घर, आस-पड़ोस और रिश्तेदार मिलकर भजन-कीर्तन करते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं, जो प्रेम और एकता का प्रतीक है। साथ ही नाचते-गाते हुए भगवान की याद करते हैं।
आंध्र प्रदेश की मेदुरु होली
आंध्र प्रदेश में होली को मेदुरु होली कहा जाता है। यहां होली का जश्न दस दिनों तक मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते हैं। होली के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही यहां कोलातम नाम का लोकगीत गाए जाते हैं।
यह भी पढ़ें: ज्योतिर्मठ: जिस मठ के शंकराचार्य हैं अविमुक्तेश्वरानंद, वहां होता क्या है?
केरल की मंजल कुली होली
यह होली मुख्य रूप से केरल के कोंकणी और कुदुम्बी समुदाय के लोग मनाते हैं। यहां होली के दिन रंगों और गुलाल से होली नहीं खेली जाती, बल्कि हल्दी का पानी या हल्दी का पेस्ट एक-दूसरे पर लगाकर होली मनाई जाती है। हल्दी एक-दूसरे पर लगाकर शरीर और मन को शुद्ध किया जाता है, जिसे कई बार हल्दी स्नान भी कहा जाता है। संस्कृत में मंजल का अर्थ हल्दी और कुली का मतलब स्नान होता है। इसलिए केरल में होली को मंजल कुली होली कहा जाता है।
गोवा की शिमगो होली
गोवा में होली को शिमगो होली कहा जाता है। यहां होली का जश्न होलिका दहन के पांच दिन बाद तक मनाया जाता है। यह त्योहार खास तौर पर यहां के मछुआरे समुदाय द्वारा मनाया जाता है। ढेर सारे रंग, पकवान और नाच-गाने के जरिए होली का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह भी पढ़ें: खाटू श्याम का लक्खी मेला शुरू, मान्यता से महत्व तक, पढ़ें हर सवाल का जवाब
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की रंग पंचमी
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में होली को रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यहां होलिका दहन के बाद पांच दिनों तक होली का उत्सव चलता है। इन पांच दिनों में देवी-देवताओं की विशेष पूजा की जाती है। रंग पंचमी के बारे में कहा जाता है कि पहले के समय में होली कई दिनों तक मनाई जाती थी और रंग पंचमी के साथ इसकी समाप्ति मानी जाती थी। इसके बाद कोई होली नहीं खेलता था, इसलिए इसे रंग पंचमी कहा जाता है।
पंजाब का होला मोहल्ला
पंजाब में होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। होला मोहल्ला खास तौर पर सिख धर्म के लोग मनाते हैं। यह उत्सव लगातार तीन दिनों तक चलता है। लोग पहले गुरुद्वारे में भजन-कीर्तन करते हैं। यहां एक योद्धा शैली की होली मनाई जाती है, जिसमें लोग मार्शल आर्ट का प्रदर्शन करते हैं। होली के दिन रंग और अबीर भी एक-दूसरे पर डाले जाते हैं।
यह भी पढ़ें: 18 या 19 फरवरी, कब शुरू होगा 2026 का रमजान महीना?
बिहार की फगुआ होली
बिहार में होली को फगुआ होली कहा जाता है। यहां होली के दिन फागुन महीने के गीत गाए जाते हैं। एक-दूसरे पर पानी वाले रंग और गुलाल लगाए जाते हैं। यहां होली का उत्सव बसंत पंचमी से शुरू होकर होली के दिन तक चलता है। होली के दिन सुबह रंगों से खेला जाता है, फिर शाम होते ही लोग नए कपड़े पहनकर दोस्त और रिश्तेदारों के घर जाते हैं। वहां मिठाइयां खिलाई जाती हैं और गुलाल लगाकर बधाई दी जाती है।
उत्तराखंड की कुमाऊंनी होली
उत्तराखंड में होली कुछ अलग अंदाज में मनाई जाती है। यहां होली केवल रंगों से नहीं, बल्कि अभिनय, नृत्य और गीतों के माध्यम से मनाई जाती है। होली के दिन लोग अपनी संस्कृति के पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और सब मिलकर रंग लगाते हैं।
यह भी पढ़ें: देवी पार्वती को क्यों लेना पड़ा अन्नपूर्णा अवतार? कहानी वाराणसी की नगर देवी की
उत्तर प्रदेश की लट्ठमार होली
उत्तर प्रदेश की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह होली बरसाना में मनाई जाती है, जहां बरसाने की महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में फूलों वाली होली भी मनाई जाती है, जहां रंगों की बजाय एक-दूसरे पर फूल डाले जाते हैं। इस तरह एक ही त्योहार होने के बावजूद देश केअलग राज्यों में होली अलग
अंदाज में मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल भाव प्रेम, एकता और उल्लास ही है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



