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महर्षि सौभरि के श्राप ने कैसे बचाई कालिया नाग की जान? जानिए पूरी कहानी

श्रीमद्भागवत महापुराण के मुताबिक, एक बार भगवान श्रीकृष्ण के वाहन गरुड़ और कालिया नाग के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में कालिया नाग इसलिए बच पाए, क्योंकि महर्षि सौभरि ने पहले ही गरुड़ को श्राप दिया था।

Kaliya, naag and garud

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI

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हिन्दू धर्म के ग्रंथों में कई ऐसी कहानियां और प्रसंग बताए गए हैं, जिनसे आज भी व्यक्ति को सीख मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में देवी-देवताओं से जुड़े वरदान और श्राप की कई रोचक कथाएं वर्णित हैं। वरदान और श्राप का नाम सुनते ही लोगों के मन में यही विचार आता है कि वरदान मिलने से व्यक्ति का भला होता है और श्राप मिलने से उसका नुकसान होता है। जबकि श्रीमद्भागवत महापुराण में गरुड़ और कालिया नाग की एक ऐसी कथा मिलती है, जिसमें एक श्राप किसी दूसरे के प्राणों की रक्षा का कारण बनता है।

 

श्रीमद्भागवत महापुराण के स्कंध 10 के अध्याय 17 में कालिया नाग और गरुड़ की कथा का वर्णन मिलता है। इस कथा के अनुसार, राजा परीक्षित ने श्रीशुकदेव जी से पूछा था कि कालिया नाग ने रमणक द्वीप क्यों छोड़ दिया था। तब श्रीशुकदेव जी ने बताया कि कालिया नाग गरुड़ से अपनी जान बचाने के लिए रमणक द्वीप छोड़कर यमुना नदी में रहने लगे थे।

 

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गरुड़ और कालिया नाग के बीच युद्ध

 

कथा के अनुसार, रमणक द्वीप में प्रत्येक अमावस्या के दिन गरुड़ को एक सर्प अर्पित किया जाता था, ताकि वे अन्य नागों की रक्षा करते रहें। इसी परंपरा के तहत एक बार कालिया नाग की बारी आई। लेकिन गरुड़ का आहार बनने से बचने के लिए कालिया नाग वहां से भाग गया।

 

जब गरुड़ को कालिया नाग के भागने की खबर मिली तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने कालिया नाग को मारने का संकल्प लिया। इसके बाद दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। कालिया नाग ने अपने विषैले दांतों से गरुड़ पर हमला किया लेकिन गरुड़ ने भी जोरदार पलटवार किया। गरुड़ अत्यंत शक्तिशाली थे, इसलिए युद्ध में कालिया नाग पर भारी पड़ने लगे। अपनी जान बचाने के लिए अंत में कालिया नाग वहां से भाग निकला।

 

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श्राप ने कैसे बचाई कालिया नाग की जान?


कालिया नाग और गरुड़ के युद्ध से पहले महर्षि सौभरि ने गरुड़ को श्राप दिया था। कथा के अनुसार, एक बार गरुड़ को भूख लगी और वे यमुना नदी में मछलियां खाने पहुंचे। वहां उन्होंने मत्स्यराज नाम की एक बड़ी मछली को अपना आहार बना लिया। इससे उस कुंड में रहने वाली अन्य मछलियां अत्यंत दुखी हो गईं।


मछलियों की यह स्थिति देखकर महर्षि सौभरि को बहुत दुख हुआ। उन्होंने मछलियों की रक्षा के लिए गरुड़ को श्राप दिया कि अब से यदि वे उस नदी में प्रवेश करेंगे या वहां किसी जीव का भक्षण करेंगे, तो उनके प्राण चले जाएंगे।


कालिया नाग को इस श्राप की जानकारी थी। इसलिए वह अपनी जान बचाने के लिए यमुना नदी में आकर रहने लगा। महर्षि सौभरि के इसी श्राप के कारण गरुड़ यमुना में नहीं जा सके और कालिया नाग के प्राण बच गए।

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