logo

मूड

ट्रेंडिंग:

नवरात्रि के दूसरे दिन कैसे करें पूजा, किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से भक्तों को संयम, धैर्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।

Ma Brahmacharini

मां ब्रह्मचारिणी, Photo Credit- AI generated

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधान है। मान्यता है कि माता के इस रूप की भक्ति करने से व्यक्ति के भीतर आत्मसंयम, सहनशीलता और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग बहुत पसंद है। इसलिए इस खास दिन पूजा के दौरान सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है।

 

माता रानी को प्रसन्न करने के लिए चीनी, मिश्री, पंचामृत या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चीनी और मिश्री अर्पित करने से साधक को दीर्घायु का वरदान मिलता है। पूजा के दौरान 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः' मंत्र का जाप करने से जीवन की सभी परेशानियों और दुखों से मुक्ति मिलती है।

 

यह भी पढ़ें: 12 अक्टूबर का राशिफल: मां ब्रह्मचारिणी के आशीर्वाद से मिलेगी मन की शांति?

जाने कैसे करें पूजा?

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठे। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। सफेद या हल्के पीले रंग के साफ-सुथरे कपड़े धारण करें। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, रोली, हल्दी और सुगंधित इत्र अर्पित करें।

 

माता ब्रह्मचारिणी को चमेली के फूल या कोई भी सफेद रंग का फूल जरूर चढ़ाएं। पूजा के समय 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः' अथवा 'ॐ ऐं नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। मां को चीनी, मिश्री या खीर-बर्फी का भोग लगाएं। फिर पूरे भक्ति भाव से आरती करके सभी में प्रसाद बांटें।

 

यह भी पढ़ें: तमिलनाडु के जलकंटेश्वर मंदिर की क्या है कहानी? PM नरेंद्र मोदी ने किए दर्शन

पूजा के दौरान किन बातों का रखें खास ध्यान?

घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें। लहसुन-प्याज या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से दूर रहें। पूजा में बासी फूलों और पुराने प्रसाद का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। मन में क्रोध, कड़वे विचार या किसी से झगड़ा करने से बचें। यदि आप व्रत रख रहे हैं तो ब्रह्मचर्य का पालन करें। साथ ही शांत मन से माता का ध्यान करें। विद्यार्थियों और तपस्या या साधना करने वालों के लिए यह पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।


और पढ़ें