जन्माष्टमी त्योहार का इंतजार आज खत्म हुआ। 4 सितंबर के दिन पूरे देश में धार्मिक माहौल है, जहां करोड़ों लोग व्रत रख रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्यक्ति को व्रत रखने से पहले सुबह ही व्रत का संकल्प ले लेना चाहिए। संकल्प के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। ऐसे ही कई नियम हैं, जिन्हें हर भक्त को जानना बेहद जरूरी है। वरना जन्माष्टमी का व्रत अधूरा रह जाएगा।
4 सितंबर के दिन पूरे देश में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन सभी भक्त श्रीकृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाते हैं। साथ ही कई भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम के समय पूजा की तैयारियां करते हैं। जन्माष्टमी के दिन रात के समय पूजा की जाती है। रात के समय ही श्रीकृष्ण भगवान का जन्म हुआ था। अब सवाल उठता है कि भक्तों को जन्माष्टमी के दिन सुबह से शाम तक क्या करना चाहिए।
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सुबह से शाम क्या करें?
जन्माष्टमी के दिन भक्तों को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए, जिसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान की सफाई करें। घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं और भगवान का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद मार्केट जाकर पूजा का सामान खरीद लें। इसमें पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, मिश्री और घी खरीद लें। इसके साथ ही कान्हा जी के लिए मोतियों की माला और नए कपड़े खरीदकर रख लें।
दोपहर होते ही कान्हा जी का पालना सजाना शुरू कर दें। इसके साथ ही श्रृंगार का सारा सामान एक जगह रख लें, ताकि शाम के समय कान्हा जी की सजावट में कोई दिक्कत न आए। इसके अलावा सभी भक्तों को पूजा स्थान के पास बैठकर मंत्र जाप करना चाहिए। जिन लोगों को भजन-कीर्तन करने का शौक है, उन्हें भजन-कीर्तन करना चाहिए।
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शाम को क्या करें?
शाम के समय पूरा परिवार मिलकर पूजा स्थान की सजावट करें। सजावट के बाद कान्हा जी को उनके झूले पर विराजमान करें। रात होते ही कान्हा जी के पास पंचामृत रखें। साथ ही भोग लगाने वाली सारी चीजें पूजा स्थान के पास रख लें।
हिंदू पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में रात 11:57 बजे से लेकर 12:43 बजे तक पूजा का समय है। इस दौरान भक्तों को कान्हा जी को स्नान कराना चाहिए। उसके बाद नए कपड़े पहनाकर पूजा-पाठ करना चाहिए। सभी भक्तों को माखन-मिश्री और मिठाई का भोग लगाना चाहिए।
क्या न करें?
जन्माष्टमी के दिन लोगों को गलती से भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा में चढ़ाने के लिए एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए।
इस दिन जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी लहसुन-प्याज खाने से बचना चाहिए।
जन्माष्टमी के दिन लोगों को दूसरों पर क्रोध करने से बचना चाहिए। साथ ही, जिन लोगों ने व्रत रखा है, उन्हें झूठ बोलने से बचना चाहिए।
आज के रात भक्तों को रात के समय पूजा किए बिना नहीं सोना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।