शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता देवी की आराधना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा मां का स्कंदमाता स्वरूप साक्षात प्रेम और ममता का प्रतीक है। इसके साथ ही माना जाता है कि स्कंदमाता की गोद में कार्तिकेय विराजमान हैं। इस वजह से इन्हें ममता का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति की बुद्धि और विवेक बढ़ता है। इसलिए हर व्यक्ति को नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना करनी चाहिए।
15 अक्टूबर को स्कंदमाता देवी की उपासना की जाएगी। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि स्कंदमाता का प्रिय फल केला है। इस वजह से भक्तों को केला या केले से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए, ताकि देवी मां प्रसन्न हों। अब सवाल उठता है कि पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है।
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कैसे करें देवी स्कंदमाता की पूजा?
पूजा करने के लिए सभी भक्तों को सुबह उठना चाहिए। उसके बाद स्नान करके घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। माता की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं, फिर मां स्कंदमाता की एक सुंदर तस्वीर चौकी पर रखें। अब पूजा स्थान पर फूल, फल, मिठाई, लौंग और इलायची का भोग लगाएं। साथ ही मां स्कंदमाता के समक्ष घी का दीपक जलाएं। धार्मिक जानकारों का मानना है कि भक्तों को पूजा के बाद दुर्गा चालीसा पढ़नी चाहिए। इसके बाद खास मंत्रों का जाप करना चाहिए।
पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:51 बजे से लेकर सुबह 05:39 बजे तक है।
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:49 बजे से लेकर दोपहर 12:35 बजे तक है।
गोधूलि मुहूर्त - शाम 05:47 बजे से शाम 06:11 बजे तक है।
मूल मंत्र
'ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नमः।'
'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः।'
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स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
स्कंदमाता के कुछ प्रसिद्ध मंदिर
वाराणसी: नवरात्रि के पांचवें दिन कई लोग बड़ी तादाद में उत्तर प्रदेश के काशी में स्कंदमाता के मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के जैतपुरा क्षेत्र में स्थित वागेश्वरी देवी मंदिर है, जहां वागेश्वरी माता के साथ-साथ स्कंदमाता की मूर्ति भी विराजमान है।
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मध्य प्रदेश: स्कंदमाता का दूसरा प्रसिद्ध मंदिर मध्य प्रदेश के विदिशा में है, जहां सभी भक्त दुर्गा मां के पांचवें स्वरूप के दर्शन करने जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को न सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, बल्कि देवी के आशीर्वाद से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।