logo

मूड

ट्रेंडिंग:

शोर-शराबे के बिना पूरे हो सकता हैं काम, देवी कूष्मांडा से सीखें जीवन का सबक

शारदीय नवरात्र पर्व के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। दुर्गा मां का यह स्वरूप भक्तों को सीख देता है कि जीवन में कोई भी काम मुस्कराकर और शांत मन से किया जा सकता है।

Goddess Kushmanda

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

कई लोगों की आदत होती है कि वे कठिन से कठिन काम करने से पहले घबरा जाते हैं। इसके साथ ही, चुनौतियों का सामना करने से पहले ही चिंता करने लगते हैं। इसके अलावा, कई लोग अपने काम को लेकर ढिंढोरा पीटते हैं, जिस वजह से चुनौतियां और भी कठिन लगने लगती हैं। इसी सिलसिले में लोगों को देवी मां कूष्मांडा की सीख को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी कूष्मांडा बड़ी से बड़ी चुनौतियों का शांत मन से और मुस्कराकर सामना करती है। यहीं सीख लोगों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र के चौथे दिन यानी 14 अक्टूबर को देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है। उनके आशीर्वाद से भक्तों को न सिर्फ सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि देवी की कृपा से हर चुनौती का डटकर सामना करने की शक्ति भी मिलती है।

 

यह भी पढ़ें: 14 अक्टूबर का राशिफल: मां कूष्मांडा के प्रभाव से किसके जीवन में आएगा नया सवेरा?

देवी कूष्मांडा ने किया चमत्कार

धार्मिक कथाओं के मुताबिक, जब सृष्टि अस्तित्व में नहीं आई थी, तब पूरा संसार अंधकार में घिरा हुआ था। तब देवी दुर्गा ने कूष्मांडा का स्वरूप धारण किया। देवी कूष्मांडा ने गहरे अंधकार को देखकर न तो क्रोध किया और न ही उग्र रूप धारण किया। इसके बजाय, वह मुस्कराईं। उनकी मुस्कान की वजह से सृष्टि रौशन हुआ। इस कहानी के जरिए मां कूष्मांडा ने समझाया कि चुनौतियों को देखकर कई बार सिर्फ बल या रौद्र रूप दिखाने की जरूरत नहीं होती है, बल्कि उन चुनौतियों का मुस्कराकर भी समाधान किया जा सकता है।

 

मां कूष्मांडा ने यह साबित किया कि कोमलता और शांत स्वभाव कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति हैं, जो कठिन से कठिन काम को आसानी से पूरा करने में मदद कर सकते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि देवी कूष्मांडा अष्टभुजा हैं, जिनके आठों हाथों में अलग-अलग अस्त्र और वस्तुएं हैं। उनके हाथों में कमल, बाण, धनुष, अमृत कलश और चक्र आदि हैं। इतने अस्त्र होने के बावजूद उन्होंने शांत भाव से मुस्कराकर सृष्टि में प्रकाश फैला दिया।

 

यह भी पढ़ें: नवरात्रि के पहले दिन होती है देवी शैलपुत्री की पूजा, कौन से मंदिर प्रसिद्ध हैं?

मां कूष्मांडा से क्या मिलती है सीख?

देवी कूष्मांडा ने संदेश दिया कि जीवन के अंधकार को खत्म करने के लिए युद्ध करने और शोर मचाने की जरूरत नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी शांत मन, धैर्य और लगातार कोशिशों के जरिए काम पूरा किया जा सकता है।

 

इसके साथ ही, मां कूष्मांडा का संदेश है कि हर व्यक्ति को कोई नया काम शुरू करने से पहले उसका हर जगह ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए, बल्कि मेहनत करनी चाहिए। तभी व्यक्ति की मेहनत रंग लाएगी। इसके अलावा, मां कूष्मांडा ने यह सीख दी कि नई चीजों का सृजन करने के लिए व्यक्ति को केवल शारीरिक बल की नहीं, बल्कि बुद्धि और सकारात्मक सोच की भी जरूरत होती है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

Related Topic:#Navratri

और पढ़ें