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अगर चिंता ने छीन लिया है आपका सुकून, तो बाइबल से जानिए समाधान

चिंता हर व्यक्ति को किसी न किसी चीज को लेकर होती है। चिंता की वजह से व्यक्ति का मन अशांत और परेशान रहता है। चिंता के बारे में बाइबल में क्या लिखा है, जान लीजिए।

what jesus says about tension

प्रतीकात्मकत तस्वीर, Photo Credit- Gemini

आज के भागदौड़ के दौर में हर व्यक्ति किसी न किसी चीज को लेकर चिंता करता है। चिंता कई कारणों से होती है, जो हमारे मन को केवल दुखी ही करती है। कई बार लोगों को अपने भविष्य की चिंता होती है कि उन्हें भविष्य में कैसी नौकरी मिलेगी, तो कई बार लोगों को अपने परिवार और हेल्थ को लेकर चिंता होती है। चिंता से किसी व्यक्ति की समस्या का समाधान नहीं मिलता, इसके बजाय व्यक्ति का वर्तमान खराब हो जाता है क्योंकि चिंता के भाव की वजह से व्यक्ति को केवल दुख ही मिलता है। साथ ही व्यक्ति का सुकून भी छिन जाता है। इसी चिंता से मुक्ति पाने के लिए बाइबल में लिखे ईसा मसीह के कुछ उपदेशों को अपनाना चाहिए, जिससे चिंता का समाधान हो सके।

 

बाइबल ईसाई धर्म का सबसे अहम धर्म ग्रंथ है, जिसे पढ़कर व्यक्ति अपनी कई समस्याओं का समाधान पा सकता है। इसी बाइबल में लिखी बातों को अपनाकर व्यक्ति चिंता से समाधान पा सकता है। बाइबल में कई आयतें हैं, जिनमें चिंता से जुड़ी अहम बातें बताई गई हैं। बाइबल में माना जाता है कि किसी व्यक्ति को अपने जीवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर चिंता होती है। इसी समस्या का सबसे बड़ा उपाय प्रार्थना है। यानी व्यक्ति को समस्या को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रार्थना करनी चाहिए।

 

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बाइबल में चिंता को लेकर क्या कहा गया है?

अक्सर लोग अपने भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं। इसी को लेकर बाइबल के मत्ती अध्याय में ईसा मसीह ने अहम बात बताई थी। जिसके मुताबिक एक बार ईसा मसीह ने लोगों को सलाह दी थी कि उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए। इसको लेकर ईसा मसीह ने पक्षियों का उदाहरण देते हुए कहा, 'आकाश में पक्षी उड़ते हैं, जो न अनाज बोते हैं और न ही अनाज काटते हैं, फिर भी परमेश्वर उन्हें भोजन देता है।' इस उदाहरण के जरिए ईसा मसीह ने लोगों को शिक्षा दी कि जब परमेश्वर प्रकृति की हर चीज का ध्यान रखते हैं, तो वे अपने भक्तों की रक्षा भी जरूर करेंगे।

 

इसके बाद ईसा मसीह ने चिंता को लेकर कहा कि चिंता न तो व्यक्ति की समस्या को हल करती है और न ही व्यक्ति का जीवन बढ़ाती है। चिंता सिर्फ व्यक्ति का सुकून छीन लेती है। इस वजह से आने वाले कल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि एक दिन में एक ही दिन का जीवन जीना चाहिए।

 

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चिंता का बाइबल में क्या समाधान है?

1. प्रार्थना से चिंता से मुक्ति पाना- बाइबल में फिलिप्पियों की आयत में बताया गया है कि जब पौलुस जेल में बंद थे, तब उन्होंने चिंता करने की बजाय परमेश्वर से प्रार्थना की थी। जिससे वह चिंता के बोझ तले दबे नहीं थे। साथ ही प्रार्थना के जरिए व्यक्ति का मन शांत रहता है।


2. चिंता को परमेश्वर पर छोड़ दो- बाइबल में बताया गया है कि व्यक्ति को अपनी चिंता परमेश्वर पर छोड़ देनी चाहिए। इसे लेकर कहा गया है, 'अपनी सारी चिंता उस पर डाल दो, क्योंकि उसे तुम्हारी चिंता है।' इसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपना सब कुछ परमेश्वर को सौंप देना चाहिए। परमेश्वर हमारे बारे में परवाह करते हैं।


बाइबल चिंता को गलत भावना नहीं समझती है। बाइबल के मुताबिक परमेश्वर व्यक्ति को चिंता की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ते हैं। इस वजह से व्यक्ति को परमेश्वर पर भरोसा रखना चाहिए। साथ ही कठिन परिस्थिति में चिंता करने के बजाय मन को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए।

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