आज के दौर में हर व्यक्ति की एक ही समस्या है कि दुखों का साया कभी पीछा नहीं छोड़ता। अक्सर व्यक्ति का मन किसी न किसी वजह से दुखी हो जाता है। इसी सिलसिले में बौद्ध धर्म के गौतम बुद्ध ने बेहद खास सीख दी है। गौतम बुद्ध ने अपने अनुयायियों को बताया कि व्यक्ति के दुखों की वजह इच्छा और उम्मीद है। जब व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को प्रेम, आदर और सम्मान देता है, तो वह खुद भी उम्मीद करता है कि उसे भी बदले में प्रेम और सम्मान मिले। यही उम्मीद पूरी न होने पर व्यक्ति को दुख होता है। इसी वजह से दुखों की एक बड़ी वजह इच्छा और उम्मीद है। इसी इच्छा और उम्मीद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए गौतम बुद्ध ने 8 मार्ग बताए हैं।
बौद्ध धर्म में आंतरिक शांति को ही परम सुख माना जाता है। बौद्ध धर्म के जानकार भी मानते हैं कि व्यक्ति तभी असल मायने में सुख का अनुभव करता है, जब उसके जीवन में शांति बनी रहती है। जीवन में यह शांति तभी मिल सकती है, जब व्यक्ति सही मार्ग पर जीवन जिए। जीवन के सही मार्ग बताते हुए गौतम बुद्ध ने आर्य अष्टांगिक मार्ग बताया है, जिसमें 8 मार्ग बताए गए हैं। इसमें दुखों के निवारण के तरीके बताए गए हैं।
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दुख के निवारण का मार्ग
गौतम बुद्ध ने जिन 8 मार्गों के बारे में बताया है, उनमें दुख, दुखों के कारण और दुखों के निवारण के तरीके बताए गए हैं। इन मार्गों को अपनाकर व्यक्ति दुखों से छुटकारा पाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। तो ऐसे में आइए जानते हैं कि वे 8 मार्ग क्या हैं।
गौतम बुद्ध ने बताया कि व्यक्ति को चार आर्य सत्यों को समझना चाहिए। इसमें सबसे पहले अपने जीवन के दुखों पर विचार करें और उसके बाद दुखों के कारण को समझें। दुखों के कारण समझने के बाद व्यक्ति को दुखों के निवारण के मार्ग पर चलना चाहिए। दुखों के निवारण के लिए गौतम बुद्ध ने बताया है कि व्यक्ति को सुख और दुख को एक ही नजरिए से देखना चाहिए। यानी सुख और दुख को एक समान भाव से देखना चाहिए।
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इसके अलावा बाकी 7 मार्गों में बताया गया है कि व्यक्ति को जीवन में अपने मानसिक विकास के लिए निरंतर नियंत्रित प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को झूठ बोलने से बचना चाहिए। व्यक्ति को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरों का नुकसान हो। इसके अलावा गौतम बुद्ध ने कहा कि व्यक्ति को खुद को पहले से बेहतर बनाने के लिए पूरे जीवन प्रयास करते रहना चाहिए।