logo

मूड

ट्रेंडिंग:

6 या 7 अक्टूबर कब है इंदिरा एकादशी? तारीख से लेकर पारण तक का समय जानिए

इंदिरा एकादशी पर्व अक्टूबर महीने में मनाया जाएगा। इस एकादशी में व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं, साथ ही संतान सुख भी प्राप्त होता है।

lord vishnu, इंदिरा एकादशी

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI generated

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

सनातन धर्म में एकादशी पर्व बेहद खास माना जाता है। यह पर्व हर महीने 2 बार मनाया जाता है और साल में 24 बार यह मनाया जाता है। उन सभी पर्वों में से इंदिरा एकादशी का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन महिलाओं की एक भी संतान नहीं है, वे महिलाएं इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखें तो उन्हें भगवान विष्णु की कृपा से पुत्र की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही माना जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत रखने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि इंदिरा एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पितरों के लिए बैकुंठ धाम का द्वार खुल जाता है। इस वजह से इंदिरा एकादशी को खास महत्व दिया जाता है।

 

इंदिरा एकादशी का पर्व पितृ पक्ष के दौरान मनाया जाएगा। इस वजह से इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा। इंदिरा एकादशी पर्व में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-पाठ और आराधना की जाती है। इस दौरान लाखों लोग पितृ पक्ष की परंपरा भी निभाएंगे। धार्मिक जानकारों का भी मानना है कि इंदिरा एकादशी में उन लोगों को भी व्रत रखना चाहिए, जो लोग पितृ पक्ष की परंपरा निभा रहे हैं।

 

यह भी पढ़ें:  पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखना जरूरी है या नहीं? धर्म ग्रंथों समझें

कब है इंदिरा एकादशी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कुआर महीने की 6 तारीख की रात 2 बजकर 47 मिनट पर इंदिरा एकादशी पर्व की शुरुआत होगी। इसके बाद 7 अक्टूबर की रात 12 बजकर 47 मिनट पर पर्व की तिथि खत्म हो जाएगी। पर्व की उदय तिथि पर नजर डालें तो इंदिरा एकादशी पर्व की सही तारीख 6 अक्टूबर है।

 

तिथि के हिसाब से सभी भक्तों को 6 अक्टूबर के दिन ही व्रत रखना चाहिए। उसके बाद 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 38 मिनट तक व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।

 

यह भी पढ़ें: साप्ताहिक राशिफल: किन 5 राशियों का चमकेगा भाग्य और बदलेगी लाइफस्टाइल?

पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:47 से लेकर 05:36 तक।

विजय मुहूर्त- दोपहर 02:17 से 03:04 तक।

गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:13 से लेकर 06:38 तक।

निशिता मुहूर्त- रात 11:55 से लेकर 12:44 तक।

तर्पण करना वाजिब है या नहीं

धार्मिक जानकारों के अनुसार, इंदिरा एकादशी के दिन श्राद्ध की परंपरा निभा सकते हैं। इस दिन खासकर उन पितरों का श्राद्ध करना चाहिए, जिनका निधन किसी भी महीने की एकादशी तिथि में हुआ था। इसके अलावा धार्मिक मान्यता है कि जिन पूर्वजों ने गृहस्थ जीवन त्यागकर संन्यास लिया था, उनका भी श्राद्ध किया जा सकता है।

 

यह भी पढ़ें: 9 दिन, 9 रंग: कश्मीर से कन्याकुमारी तक कैसे बदल जाता है नवरात्रि का रूप?

 

पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण के लिए सबसे शुभ कुतुप और रोहिणी मुहूर्त माना जाता है। उस समय श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, इंदिरा एकादशी के दिन कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है। उसके बाद रोहिणी मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 20 मिनट तक है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।


और पढ़ें