logo

मूड

ट्रेंडिंग:

गुप्तेश्वर धाम: जहां खुद शिव ने छिपकर बचाई थी जान

बिहार में कैमूर की पहाड़ियों में गुप्तेशवर धाम एक गुफा है जहां शिवलिंग पर पहाड़ों से  खुद-ब-खुद जल टपकता रहता है। पौराणिक कथाओ के अनुसार, भस्मासुर के डर से भगवान शिव ने इसी गुफा में शरण ली थी।

Gupteshwar Dham

गुप्तेश्वर धाम, Photo Credit- Social Media

बिहार के रोहतास जिले में कैमूर की ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसा शिव मंदिर है, जिसे लेकर श्रद्धालु हैरान रहते हैं। इसे 'गुप्ताधाम' या गुप्तेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। इस गुफा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के शिवलिंग पर चौबीसों घंटे पहाड़ों से बूंद-बूंद करके पवित्र जल टपकता रहता है। भक्त इस जल को भगवान का आशीर्वाद और प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं।

 

यह स्थान  ने केवल अपनी धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यहां तक आना भी किसी रोमांच से कम नहीं है। शिवरात्रि और सावन के महीने में यहां लाखों की भीड़ उमड़ती है, जो इस दुर्गम रास्ते को पार कर महादेव के दर्शन करने पहुंचती है।

 

यह भी पढ़ें: फाल्गुन अमावस्या पर चंद्रमा कैसे बदलेंगे आपका भाग्य? पढ़ें राशिफल

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं की मानें तो इस गुफा का इतिहास भस्मासुर से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब भस्मासुर ने भगवान शिव से 'किसी के भी सिर पर हाथ रखकर भस्म करने' का वरदान पा लिया, तो वह खुद शिव पर ही इसे आजमाने चल पड़ा। अपनी जान बचाने के लिए महादेव ने इसी गुफा में शरण ली थी। इसी वजह से इसे 'गुप्तेश्वर' धाम कहा जाता है।

पाताल गंगा और अनोखा शैलचित्र

गुफा के अंदर लगभग 363 फीट गहराई में जाने पर एक बड़ा जलकुंड मिलता है, जिसे स्थानीय लोग 'पाताल गंगा' कहते हैं। गुफा का रास्ता काफी संकरा और अंधेरे से भरा है, जहां कृत्रिम रोशनी के सहारे ही आगे बढ़ा जा सकता है। खास बात यह है कि यहां की दीवारों पर प्राचीन शैलचित्र भी देखने को मिलते हैं, जो इसकी ऐतिहासिकता को और पुख्ता करते हैं।

 

यह भी पढ़ें: सूर्यग्रहण पर भारत में सूतक लगेगा या नहीं? सही बात जान लीजिए

कैसे पहुंचें यहां?

जिला मुख्यालय सासाराम से लगभग 35 किलोमीटर दूर चेनारी प्रखंड में यह धाम स्थित है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पांच पहाड़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है और 'दुर्गावती' नदी को पांच बार पार करना होता है। दुर्गम रास्ता होने के बावजूद बाबा के प्रति अटूट आस्था भक्तों को यहां खींच लाती है। लोग बक्सर से गंगाजल लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।


और पढ़ें