आज देशभर में महाशिवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष का महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी। साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं लेकिन महाशिवरात्रि को सबसे ज्यादा विशेष माना जाता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग उपवास करते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं तो कुछ निर्जला भी इस व्रत को करते हैं। शिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ लग जाती हैं।
इस दिन सुबह-सुबह भगवान शिव की पूजा की जाती है। अगर आप सुबह के समय में पूजा नहीं कर पाएं हैं तो शाम के समय में भी पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव की पूजा शाम के समय में भी होता है। आइए जानते हैं शाम के समय में भगवान शिव की पूजा कैसे करनी है?
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शाम के समय में पूजा करने के नियम
सूरज डूबने से पहले स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद शरीर के ऊपर थोड़ा सा गंगाजल छिड़क लें और फिर भगवान शिव पर जल अभिषेक करें। इसके बाद चंदन का लेप लगाएं, बेलपत्र अर्पित करें, सफेद फूल और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव की चलीसा पढ़ें और आरती करें। भगवान शिव को खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं। उसके बाद प्रसाद को अपने आसपास के लोगों में बांट दें।
शिवरात्रि का महत्व खास क्यों है?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह-सुबह उठकर मंदिर जाते हैं। भगवान को शिवलिंग पर जल, दूध, घी, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल- फूल और मिठाई अर्पित किया जाता है। भगवान शिव का ऊं नम शिवाय का जाप करते हैं, चलीसा पढ़ते हैं और आरती करते हैं।
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महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 23 तक मिनट तक रहेगा। आप इस दौरान कभी भी पूजा कर सकते हैं।