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महावीर के 5 सिद्धांत बदल सकते हैं जिंदगी, दुखों से मुक्ति पाने का मार्ग जानिए

जैन धर्म के महावीर स्वामी ने जीवन के 5 सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपना जीवन बदल सकता है। साथ ही वह दुखों से मुक्ति पा सकता है।

Mahavir 5 principles can change your life

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Creadit- Gemini

आज के दौर में हर व्यक्ति को दुख और कष्टों का सामना करना पड़ता है। इंसान हमेशा इन दुखों और कष्टों से भागने की कोशिश करता है लेकिन इसमें अक्सर असफल हो जाता है। दुख और कष्टों से भागने की बजाय व्यक्ति को उनका सामना करना सीखना चाहिए, साथ ही उनका समाधान ढूंढ़ना चाहिए। जैन धर्म के मुताबिक दुख व्यक्ति को बाहर से नहीं मिलता, बल्कि दुख व्यक्ति के भीतर ही समाया होता है। जैन धर्म की मान्यता के अनुसार जब व्यक्ति महावीर स्वामी के 5 सिद्धांतों को अपना लेता है, तो वह दुखों से मुक्ति पा सकता है। इन पांच सिद्धांतों से व्यक्ति का जीवन देखने का नजरिया ही बदल जाता है।

 

जैन धर्म में महावीर स्वामी 24वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म बिहार के लिच्छवी परिवार में हुआ था। वह राजा सिद्धार्थ के पुत्र थे। इसके बावजूद उन्होंने राजपाट छोड़कर तपस्या का मार्ग चुना था। उन्होंने 12 साल की कठिन तपस्या के बाद अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त की थी। महावीर स्वामी ने पूरी दुनिया को अहिंसा की राह पर चलना सिखाया था। अब सवाल उठता है कि ये पांच सिद्धांत क्या हैं।

 

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महावीर के पांच सिद्धांत

जैन धर्म के मुताबिक महावीर स्वामी का पहला सिद्धांत अहिंसा था। इसमें सिर्फ किसी को शारीरिक चोट न पहुंचाने की बात नहीं कही गई है, बल्कि क्रोध, घृणा और दूसरों से बदला लेने की भावना को खत्म करने की सीख दी गई है। महावीर स्वामी का दूसरा सिद्धांत है झूठ न बोलना। तीसरे सिद्धांत के मुताबिक व्यक्ति को लालच और ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। चौथे सिद्धांत के मुताबिक व्यक्ति को ब्रह्मचर्य अपनाना चाहिए। इसके अलावा पांचवें सिद्धांत के मुताबिक व्यक्ति को अधिक लगाव से बचना चाहिए।

 

1.अहिंसा
2.झूठ न बोलना
3.लालच और ईर्ष्या नहीं करना
4.ब्रह्मचर्य अपनाना
5.दूसरों से अधिक लगाव न करना

 

सिद्धांतों को अपनाकर दुखों से मुक्ति कैसे पाएं


अगर व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपना लेता है, तो वह दुखों से मुक्ति पा सकता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।


1. अहिंसा-व्यक्ति के दुख का सबसे बड़ा कारण हिंसा है। हिंसा का मतलब सिर्फ मारपीट नहीं है, बल्कि महावीर स्वामी के मुताबिक दूसरों पर गुस्सा करना, घृणा करना और किसी को गंदे शब्द बोलना भी हिंसा है। इस प्रकार की हिंसा को त्यागकर व्यक्ति दुखों से बच सकता है। जब कोई व्यक्ति किसी पर गुस्सा करता है या दूसरों को गंदे शब्द बोलता है, तो बाद में उसे पछतावा होता है, जिससे वह दुखी हो जाता है।

 

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2. झूठ न बोलना-झूठ बोलने से व्यक्ति के मन में हमेशा डर बना रहता है। अगर व्यक्ति सच बोलेगा, तो वह डर से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।


3. लालच और ईर्ष्या से मुक्ति- जब व्यक्ति दूसरे की तरक्की देखकर ईर्ष्या करता है, तो वह कहीं न कहीं खुद की तुलना दूसरों से करने लगता है, जिससे उसे सिर्फ निराशा मिलती है।


4. ब्रह्मचर्य- ब्रह्मचर्य से व्यक्ति अपने मन पर काबू पा सकता है। जैन धर्म की मान्यता के मुताबिक मन की इच्छाओं की वजह से ही दुखों का जन्म होता है।


5. लगाव-जब व्यक्ति किसी चीज, इंसान या खुद से जरूरत से ज्यादा लगाव रखता है, तो यह लगाव एक न एक दिन जरूर टूटता है, जिससे व्यक्ति को दुख होता है। इसलिए व्यक्ति को अत्यधिक लगाव नहीं रखना चाहिए।

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