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कालिया नाग, तक्षक और भगवान शिव से कैसे जुड़ी है नागपंचमी? कथा जानिए

इस साल नागपंचमी 17 अगस्त को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ करने की खास मान्यता है। इसके साथ लोगों को नाग देव से जुड़ी यह कथा पढ़नी चाहिए।

Nag Panchami

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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सनातन धर्म में नागपंचमी पर्व का खास महत्व है। इस दिन सभी भक्त शिव भगवान के साथ-साथ नाग देवता की भी पूजा-पाठ करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 17 अगस्त को नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। आज के दिन लाखों लोग सुबह से मंदिरों में दर्शन करने जा रहे हैं। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि भक्तों को सिर्फ मंदिरों में पूजा-पाठ ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि नाग देवता से जुड़ी एक खास कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, जिससे भक्तों को भगवान का आशीर्वाद मिलता है, वरना पूजा-पाठ अधूरी मानी जाती है।

 

हिंदू धर्म में नाग को शिव भगवान का एक विशेष आभूषण माना जाता है। इसी वजह से सावन महीने में नागपंचमी मनाई जाती है। इस साल नागपंचमी और सावन के सोमवार का विशेष संगम है, जिस वजह से आज के नागपंचमी के दिन का महत्व बढ़ जाता है। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि नागपंचमी के दिन भक्तों पर नाग देवता के आशीर्वाद से पितृदोष खत्म हो जाता है। अब सवाल उठता है कि नागपंचमी की पौराणिक कथा क्या है? आइए जानते हैं।

 

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कालिया नाग की कथा

हिंदू धर्म में दूसरी कथा कालिया नाग की है। इस कथा के बारे में भक्तों को नागपंचमी के दिन जानना चाहिए। कथा के अनुसार, यमुना नदी में कालिया नाग रहते थे, क्योंकि गरुड़ उनका वध करना चाहते थे। गरुड़ से बचने के लिए कालिया नाग यमुना नदी में रहने लगे थे।

 

एक बार कृष्ण जी अपने दोस्तों के साथ यमुना नदी के किनारे गेंद खेल रहे थे। तभी गेंद नदी में गिर गई, जिसके बाद कृष्ण जी नदी में गए और डूब गए। इसके बाद कालिया नाग ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। कृष्ण भगवान ने कालिया नाग से जमकर मुकाबला किया। तभी कृष्ण भगवान ने कालिया नाग को हरा दिया और कालिया नाग के सिर पर नृत्य करने लगे, जिससे कालिया नाग के सिर पर कृष्ण भगवान के पैरों के निशान रह गए।

 

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इसके बाद कृष्ण भगवान ने कालिया नाग को आदेश दिया कि वह यमुना नदी को छोड़कर चले, ताकि यमुना नदी नाग के विष से जहरीली न हो पाए। तो कालिया नाग ने उन्हें बताया कि गरुड़ उनका वध करना चाहता है, इस वजह से वह नदी में छिपे हैं। तब श्री कृष्ण ने कालिया नाग को बताया कि उनके सिर पर बने पैरों के निशान देखकर गरुड़ उनका वध नहीं करेंगे। कालिया नाग के सिर पर श्री कृष्ण के पैरों का निशान वरदान साबित हुआ।

तक्षक नाग की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक जन्मेजय नाम के राजा थे, जिनका निधन हो गया क्योंकि उन्हें तक्षक नाग ने काट लिया था। राजा जन्मेजय के बेटे ने तक्षक नाग से बदला लेने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में लंबी कतार में सांप आए, जो यज्ञ में आहुति देने आए थे, लेकिन यज्ञ कुंड में खिंचे चले जा रहे थे। इससे कई सांपों की मौत हो गई। नागों पर आए संकट को रोकने के लिए आस्तिक मुनि वहां गए। इसके बाद राजा के बेटे से निवेदन किया कि वह यज्ञ को रुकवा दे। इसके बाद यज्ञ को रोक दिया गया, जिससे नागों की रक्षा हुई।

 

नोट: यह कथा धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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